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नेशनल सिक्युरिटी एडवाइजर ‘अजीत डोभाल’ की जीवनी | Ajit Doval

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Ajit Doval

National Security Advisor Ajit Doval :

पीओके (POK) में सर्जिकल स्ट्राइक की रणनीति बनाने में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल की अहम भूमिका रही है। उन्हें 37 साल जासूसी का अनुभव है और वह रियल जेम्स बॉण्ड माने जाते हैं।

अजित डोभाल का जन्म और उनकी पढ़ाई :

  • अजित डोभाल का जन्म 20 जनवरी, 1945 को उत्तराखंड के पौढ़ी गढ़वाल में हुआ। उन्होंने अजमेर मिलिट्री स्कूल से पढ़ाई की।

अजित डोभाल का करियर और उपलब्धियां :

  • केरल के 1968 बैच आईपीएस अधिकारी डोभाल अपनी नियुक्ति के चार साल बाद 1972 में ही इंटेलिजेंस ब्यूरो से जुड़ गए। वे इकलौते ऐसे पुलिस अधिकारी हैं, जिन्हें कीर्ति चक्र और शांतिकाल में मिलने वाले गैलेंट्री अवॉर्ड से नवाजा जा चुका है।
  • 1980 के बाद से वह कई सुरक्षा अभियानों का हिस्सा रहे। अपनी हिम्मत और जज्बे के बूते डोभाल जासूसी के रियल जेम्स बॉण्ड माने जाते हैं।
  • उनका अंडरकवर ऑपरेशन इतना जबरदस्त था कि लालडेंगा उग्रवादी समूह के 7 में से 6 कमांडरों को उन्होंने भारत के पक्ष में कर लिया था। बाकी उग्रवादियों को भी मजबूरन समझौता करना पड़ा था।
  • जून 1984 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर पर हुए आतंकी हमले के काउंटर ऑपरेशन ब्लू स्टार में जीत के नायक बने।
  • डोभाल जब आईबी में थे, तब उन्हें 1986 में पूर्वोत्तर में उग्रवादियों के खिलाफ खुफिया अभियान चलाने का अनुभव है।
  • ऑपरेशन ब्लूस्टार के 4 साल बाद 1988 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में एक और अभियान ऑपरेशन ब्लैक थंडर को अंजाम दिया गया।1988 में सैन्य सम्मान कीर्ति चक्र से सम्मानित होने वाले देश के पहले पुलिस अफसर बने। अमूमन ये पुरस्कार सिर्फ सेना के लोगों को ही दिया जाता है।
  • पूरे कॅरिअर में डोभाल ने महज 7 साल ही पुलिस की वर्दी पहनी। उनका ज्यादातर समय खुफिया विभाग में बतौर जासूस गुजरा है।
  • खुफिया एजेंसी रॉ (ROW) के अंडर कवर एजेंट के तौर पर डोभाल 7 साल (1990 से 1996 तक) पाकिस्तान के लाहौर में एक पाकिस्तानी मुस्लिम बन कर रहे थे।
  • मंदिर के अंदर दोबारा कुछ आतंकी छिप गए थे। डोभाल वहां रिक्शा चालक बनकर पहुंचे थे। कई दिनों तक आतंकियों ने उन पर नजर रखी और एक दिन बुला लिया।
  • बताया जाता है कि डोभाल ने आतंकियों को भरोसा दिलाया कि वह आईएसआई एजेंट हैं और मदद के लिए आए हैं।
  • डोभाल एक दिन स्वर्ण मंदिर के अंदर पहुंचे और आतंकियों की संख्या, उनके पास मौजूद हथियार और बाकी चीजों का मुआयना किया।
  • 1999 में कंधार विमान अपहरण कांड के दौरान ऑपरेशन ब्लैक थंडर में डोभाल आतंकियों से बात करने वाले मुख्य अधिकारी थे। उन्होंने आतंकियों के साथ 110 घंटे बातचीत की। इसके बाद केवल तीन आतंकियों को छोड़ा गया जबकि मांग 40 की थी।
  • जम्मू-कश्मीर में कई आतंकियों को सरेंडर कराकर भारत समर्थक बनाया।
  • अजित डोभाल 33 साल तक पूर्वोत्तर, जम्मू-कश्मीर और पंजाब में जासूस रहे।
  • उन्होंने बाद में पंजाब पुलिस को बाकायदा नक्शा बनाकर दिया। दो दिन बाद ऑपरेशन शुरू हुआ और आतंकियों को बाहर किया गया।
  • अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में डोभाल मल्टी एजेंसी सेंटर और ज्वाइंट इंटेलिजेंस टास्क फोर्स के प्रमुख थे।
  • 2005 में आईबी डायरेक्टर पद से रिटायर हुए।
  • 2015 में मणिपुर में आर्मी के काफिले पर हमले के बाद म्यांमार की सीमा में घुसकर उग्रवादियों के खात्मे के लिए सर्जिकल स्ट्राइक ऑपरेशन की योजना उन्होंने ही बनाई।
  • जनवरी 2016 में हुए पठानकोट आतंकी हमले के काउंटर ऑपरेशन को सफलतापूर्वक लीड किया।

आगे जानिए अजीत डोभाल सर्जिकल स्‍ट्राइक में उनका योगदान

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