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अरुण जेटली ने पेश किया आर्थिक सर्वे, रोजगार में आएंगे ‘अच्छे दिन’

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Arun Jaitley

Budget 2016 : वित्त मंत्री(Finances Minister) अरुण जेटली(Arun Jaitley) आज लोकसभा में आर्थिक सर्वेक्षण पेश कर दिया. आर्थिक सर्वे से अर्थव्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है. पिछले 12 महीने की आर्थिक स्थिति और विभिन्न विकास कार्यक्रमों की समीक्षा रिपोर्ट है. इसमें सन 2016-17 के लिए अनुमानित आंकड़े जारी किए गए हैं.

आज पेश हुए आर्थिक सर्वेक्षण की दस बड़ी बातें :

  • आर्थिक सर्वे से जनता के लिए अच्छी खबर है कि मैनियुफैक्चरिंग सेक्टर में तेजी आने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे.
  • आर्थिक सर्वेक्षण में साल 2015-16 में विकास दर 7 – से 7.5 रहने का अनुमान भी जताया गया है.
  • सर्वेक्षण में बताया गया है कि सरकार की सातवें वेतन आयोग की लागू होने से महंगाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
  • आर्थिक सर्वे में कहा गया है कि सरकार सुधार प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और इस तरह के तेज विकास के लिए जो मौजूदा स्थितियां हैं, उनमें वृहत-आर्थिक स्थिरता सहायक साबित हो रही है.
  • आर्थिक सर्वे में कहा गया है कि ग्लोबल इकोनॉमी में भारत का योगदान अब और ज्यादा बढ़ गया है, क्‍योंकि चीन फिलहाल अपने को फिर से संतुलित करने में जुटा हुआ है.
  • इसके साथ ही 2016-17 में खुदरा महंगाई दर 4 से 4.5 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है.
  • आर्थिक सर्वे के मुताबिक डिफेंस सेक्टर में 49% तक, रेलवे में 100%, बीमा और पेंशन में 49% तक, एफडीआई की अनुमति के साथ अधिक सार्वजनिक एफडीआई नीति अपनाई गई है.
  • आर्थिक सर्वेक्षण में अर्थव्यस्था बेहतर होने की उम्मीद जताई गई है.
  • आर्थिक सर्वे में कहा गया कि वर्ष 2015-16 के दौरान GDP के अनुमान से कम रहने के बावजूद राजकोषीय घाटे के लक्ष्‍य को जीडीपी के 3.9 प्रतिशत के स्‍तर पर सीमित रखना संभव नजर आ रहा है.
  • आर्थिक सर्वे में जो बड़ी हात कही गई हा वो ये कि अगले 2-3 साल में 8 से 10 फीसदी ग्रोथ रेट संभव है.

आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) : 

आर्थिक सर्वेक्षण से पता चलता है कि सरकार के फैसलों का देश की अर्थव्यवस्था पर कैसा असर होता है. देश के किस क्षेत्र में कितना निवेश हुआ. और कृषि समेत अन्य उद्योगों का कितना विकास हुआ, यह जानकारी भी आर्थिक सर्वेक्षण से मिलती है.

बीते वित्तीय वर्ष में देश की सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था की समीक्षा के बाद वित्त मंत्रालय यह वार्षिक दस्तावेज बनाता है. इसे बजट सत्र के दौरान संसद के दोनों सदनों में पेश किया जाता है.

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