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गुजरातियों का दबदबा था युगांडा में, स्कूल-कॉलेज तक व्यापारियों के नाम पर

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gujarati in ugandaकंपाला। युगांडा की राजधानी कंपाला में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के पहले विपक्षी दल के उम्मीदवार फिजा बेसिजे की गिरफ्तारी के बाद हिंसा भड़क गई है। इससे कंपाला में रहने वाले करीब 10 हजार गुजरातियों में दहशत फैल गई है। गुजरातियों के परिजनों ने राज्य और केंद्र सरकार से चिंता जाहिर की है।

युगांडा में गुजरातियों का इतिहास:
दरअसल, गुजरातियों को युगांडा अंग्रेज ले गए थे। उस समय इंडिया के साथ-साथ युगांडा में भी ब्रितानियां सरकार का कब्जा था। सन 1800 में अंग्रेजों ने मोम्बासा से किसुमु तक रेलवे लाइन डालने का विचार किया। इसके लिए गुजराती अली भाई मुल्ला जीवणजी की कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट दिया। अली भाई की कंपनी 1901 में सैकड़ों गुजरातियों को युगांडा ले गई थी। इसके बाद से गुजराती युगांडा में ही बस गए और वहां गुजरातियों की संख्या बढ़ती चली गई।

सन 1970 में करीब ढाई लाख गुजरातियों को स्थाई किया गया। इस समय युगांडा की अर्थव्यवस्था गुजरातियों के हाथों में ही थी। बिजनेस से लेकर अन्य सभी क्षेत्रों में गुजराती ही आगे थे। इसके बाद युगांडा के तत्कालीन राष्ट्रपति ईदी अमीन ने गुजरातियों समेत अन्य भारतीयों पर कहर बरपाना शुरू किया। युगांडा में गृहयुद्ध की स्थिती बन गई, जिससे लाखों की संख्या में गुजराती अमेरिका और इंग्लैंड की तरफ कूच कर गए। इस समय युगांडा में करीब 80 हजार गुजराती रह रहे हैं।
युगांडा में गुजरातियों का मुख्य बिजनेस:
एक समय ऐसा भी था, जब युगांडा में गुजरातियों का ही बोलबाला था। युगांडा में दाखिल होने के बाद अपनी बिजनेस स्किल से गुजरातियों ने वहां की अर्थव्यवस्था अपने हाथ में ले ली। इस समय भी कंपाला और जिंजा में गुजरातियों के बड़े-बड़े शो रूम हैं। इतना ही नहीं, वहां के कई स्कूल-कॉलेजों के नाम भी गुजराती व्यापारियों के नाम पर हैं। बैंकिंग, कंस्ट्रक्शन, होटल और ग्रॉसरी जैसे बिजनेस में भी गुजरातियों का बोलबाला है। माधवाणी, मेहता, रूपारेलिया जैसे गुजराती युगांडा के नामी बिजनेसमैन हैं। पूर्वी अफ्रीका की सबसे बड़ी कंपनियों में भी गुजराती ही टॉप जगह रखते हैं।

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