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अंतरिम जमानत के बाद कन्हैया की मां ने कहा- मेरा बेटा आतंकवादी नहीं है

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नई दिल्ली: देशद्रोह कांड में गिरफ्तार जेएनयू (JNU) छात्रसंघ के अध्यक्ष कन्हैया की जमानत पर आज सुनवाई हुई. कन्हैया को दिल्ली हाईकोर्ट से 6 महीने की अंतरिम जमानत मिली है. कन्हैया कुमार को 10,000 रुपये निजी मुचलके पर अंतरिम जमानत मिली है. हाई कोर्ट ने कन्हैया से जांच में सहयोग करने को कहा था.

इस खबर के बाद कन्हैया कुमार की मां की प्रतिक्रिया आई है. कन्हैया कुमार की मां मीना देवी ने न्यूज़ एजेंसी पीटीआई से कहा, ”मेरा बेटा आंतकवादी नहीं है और दुनिया को बहुत जल्दी पता चल जाएगा. मुझे अपने बेटे पर पूरा विश्वास है. हर मां के लिए उसका बेटा महान होता है. अगर मेरा अपना दोष कबूल करता है तो उसे सजा दो लेकिन उससे आतंकवादी मत कहो.”

आपको बता दें कन्हैया कुमार की मां आंगड़वाडी़ कार्यकर्ता हैं और उन्हें हर महीने 3500 रुपये का पारिश्रमिक मिलता है. कन्हैया के पिताकी आयु 65 वर्ष है और वे लकवाग्रस्त है.

आज जेल से छूटने पर सस्पेंस

कन्हैया कुमार के आज जेल से छूटने पर सस्पेंस बना हुआ है. कन्हैया कुमार तिहाड़ जेल में बंद है. तिहाड़ जेल के मैनुअल के मुताबिक अगर शाम सात बजे तक अदालत के आदेश की कॉपी जेल पहुंच जानी चाहिए. इसके साथ ही जेल से आरोपी की रिहाई भी सात बजे तक हो जानी चाहिए. लेकिन आज अदालत का आदेश समय से जेल तक पहुंचना मुश्किल है. इसलिए जानकारों के मुताबिक कन्हैया कुमार की आज जेल से छूटना मुश्किल है.

दिल्ली पुलिस को झटका नहीं

कन्हैया पर हाई कोर्ट के फैसले के बाद दिल्ली पुलिस के वकील शैलेन्द्र बब्बर ने एबीपी न्यूज़ से कहा फैसला पुलिस के लिए झटका नहीं है. इसके साथ ही दिल्ली पुलिस के वकील ने कहा पुलिस के पास कन्हैया के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं.

कोर्ट ने अंतरिम जमानत के आदेश में क्या कहा

23 पन्नों के आदेश में कोर्ट ने देश विरोधी नारों पर सख्त रुख अपनाया. कोर्ट अपने देश में माना है अगर जेएनयू में देश विरोधी नारे लगे हैं तो ये गंभीर मामला है. कोर्ट ने कहा कि फ्रीडम ऑफ स्पीच के नाम पर देश विरोधी गतिविधियों को सही नहीं ठहराया जा सकता.

कोर्ट ने कहा कि जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष होने के नाते कन्हैया और शिक्षकों की जिम्मेदारी बनती थी कि ऐसे किसी भी देश विरोधी काम को होने से रोकते. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यह एक ऐसा घाव था जिसका उपचार करना जरूरी था. असके साथ ही कोर्ट ने भविष्य में जांच एजेंसी के सामने जरूरत पड़ने पर पेश होने का भी आदेश दिया.

पहले सुनवाई में कोर्ट ने क्या कहा था?

आपको बता दें कि सोमवार की सुनवाई के दौरान अदालत के पुलिस से ये पूछने पर कि क्या उनके पास कन्हैया के ख़िलाफ़ कोई सीसीटीवी फ़ुटेज या अन्य सबूत है, दिल्ली पुलिस ने कहा था कि वीडियो में कन्हैया नारे लगाते हुए नहीं दिख रहे हैं, लेकिन ऐसे गवाह मौजूद हैं जिन्होंने उन्हें नारे लगाते हुए देखा है.

कन्हैया की जमानत याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस की जांच प्रक्रिया को कटघरे में खड़ा कर दिया था. कोर्ट ने पूछा था जब 9 फरवरी को नारेबाजी के वक्त सादे कपडों मे पुलिस मौके पर मौजूद थी तो फिर 11 फरवरी को एक न्यूज चैनल की फुटेज के आधार पर FIR क्यों दर्ज की गई ? अदालत ने ये भी पूछा कि क्या कन्हैया ने ही 9 फरवरी के कार्यक्रम का आयोजक था और अगर नारे लगाने वाले लोग बाहर से आये थे तो उसके लिए कन्हैया को ज़िम्मेदार कैसे ठहराया जा सकता है?

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