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रंगों का शानदार उत्सव होली की कहानी

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होली की कहानी : Story of festival Holi

होली हमारे लिये सांस्कृतिक और पारंपरिक उत्सव है जिसे हम सभी बेहद खुशी के साथ मनाते है.

  • होली रंगों का एक शानदार उत्सव है जो भारत में हिन्दु धर्म के लोग हर साल बड़ी धूमधाम से मनाते है.
  • ये पर्व हर साल वसंत ऋतु के समय फागुन (मार्च) के महीने में आता है जो दिवाली की तरह सबसे ज्यादा खुशी देने वाला त्योहार है.
  • ये हर साल चैत्र महीने के पहले दिन मनाया जाता है.
  • इस दौरान पूरी प्रकृति और वातावरण बेहद सुंदर और रंगीन नजर आते है.
  • होली एक खुशी और सौभाग्य का उत्सव है जो सभी के जीवन में वास्तविक रंग और आनंद लाता है. रंगों के माध्यम से सभी के बीच की दुरिया मिट जाती है.

होलिका से संबंधित एक पौराणिक कहानी :

इस महत्वपूर्णं उत्सव को मनाने के पीछे प्रह्लाद और उसकी बुआ होलिका से संबंधित एक पौराणिक कहानी है. होली को मनाने के पीछे भक्त प्रह्लाद की मुख्य भूमिका है. काफी समय पहले एक असुर राजा था हिरण्यकश्यप. वो प्रह्लाद का पिता और होलिका का भाई था.

उसे ये वरदान मिला था कि उसे कोई इंसान या जानवर मार नहीं सकता, ना ही किसी अस्त्र या शस्त्र से, न घर के बाहर न अंदर, न दिन न रात में. इस असीम शक्ति की वजह से हिरण्यकश्यप घमंडी हो गया था और भगवान के बजाए खुद को भगवान समझता था साथ ही अपने पुत्र सहित सभी को अपनी पूजा करने का निर्देश देता था.

हर तरफ उसका खौफ था, इसीलिये सभी उसकी पूजा करने लगे सिवाय प्रह्लाद के क्योंकि वो भगवान विष्णु का भक्त था. पुत्र प्रह्लाद के इस बर्ताव से चिढ़ कर हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन के साथ मिलकर उसे मारने की योजना बनायी.

उसने अपनी बहन होलिका को प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर आग में बैठने का आदेश दिया. आग से न जलने का वरदान पाने वाली होलिका भस्म हो गई वहीं दूसरी ओर भक्त प्रह्लाद को अग्नि देव ने छुआ तक नहीं. उसी समय से हिन्दु धर्म के लोगों द्वारा होलिका के नाम पर होली उत्सव की शुरुआत हुई. इसे हम सभी बुराई पर अच्छाई की जीत के रुप में भी देखते है. रंग-बिरंगी होली के एक दिन पहले लोग लकड़ी, घास और गोबर के ढ़ेर को रात में जलाकर होलिका दहन की पौराणिक कथा को याद करते है.

ऐसी मान्यता है कि इस दिन परिवार के सभी सदस्यों द्वारा सरसों के उपटन का मसाज शरीर पर करवाने से शरीर और घर की गंदगी साफ हो जाती है और घर में खुशियाँ और सकारात्मक शक्तियों का प्रवेश होता है.होलिका दहन के अगले दिन सभी लोग इस पर्व के मौके पर सभी अपने मित्र, परिवार प्रियजनों से मिलते है, रंग और गुलाल से होली खेलते है, साथ ही कई सारी क्रियाओं में भाग लेते है जो एक-दूसरे के लिये खुशी को प्रदर्शित करता है.

सभी इस उत्सव को गीत-संगीत, खुशबुदार पकवानों और रंगों में रंगकर होकर मनाते है. इस दिन सभी स्कूल, कार्यालय, और सभी संस्थान बंद रहते है ताकि लोग इस खास पर्व को एक-दूसरे के साथ मना सके.

इस दिन सभी लोग सामाजिक भेदभाव को भुलाकर एक-दूसरे पर रंगों की बौछार करते है, और बच्चे गुब्बारों और पिचकारियों में रंग भरकर दूसरों पर फेंकते है. साथ ही स्वादिष्ट पकवान और मिठाईयाँ बाँटकर खुशी का इजहार करते है. इस तरह लोग रंगों के इस त्योहार में अपनों के संग खुशियाँ मनाते है.

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