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बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की जीवनी | Bankim Chandra Chattopadhyay Biography in Hindi

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Bankim Chandra Chattopadhyay
Bankim Chandra Chattopadhyay
पूरा नामबंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय
अन्य नामबंकिमचंद्र चटर्जी
जन्म27 जून 1838
जन्मस्थानबंगाल (भारत)
पितायादव चन्द्र चट्टोपाध्याय
मातादुर्गादेवी चट्टोपाध्याय
पत्नीमोहिनी देवी
कार्यभारतीय उपन्यासकार
प्रसिध्य रचनावन्दे मातरम्
नागरिकता/राष्ट्रीयताभारतीय

 

महान कवि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय (Bankim Chandra Chattopadhyay Biography in Hindi) :

बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय बंगाली भाषा के एक महान कवि, उपन्यासकार, गद्यकार और पत्रकार थे। उन्होंने साल 1865 में ‘दुर्गेश नन्दिनी’ नाम से अपना पहला उपन्यास लिखा था। बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय 20 दिसंबर 1876 को भारत के राष्ट्रगीत “वंदे मातरम” की रचना करके प्रसिद्ध और अमर हो गए। इस रचना भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के काल में क्रान्तिकारियों का प्रेरणास्रोत बन गई थी। इस रचना को बाद में आनन्द मठ नामक उपन्यास में शामिल किया गया। The Great Poet Bankim Chandra

 

प्रारंभिक जीवन (Early life of Bankim Chandra Chattopadhyay) :

बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का जन्म 26 जून 1838 को कंठालपाड़ा नैहाटी शहर, बंगाल भारत में हुआ था। इनके पिता का नाम यादव चन्द्र चट्टोपाध्याय और माता का नाम दुर्गादेबी चट्टोपाध्याय था। इनके पिता उस समय के मिदनापुर के डिप्टी कलेक्टर के पद पर सरकारी अधिकारी के रूप में कम करते थे। इनके माता पिता की तीन संतान से वह अपने परिवार में सबसे छोटे थे। इनके बड़े भाई संजीब चंद्र चट्टोपाध्याय भी एक उपन्यासकार थे। वह उन्हें उनकी प्रसिद्ध पुस्तक “पलामू” के लिए जाना जाता है।

 

शिक्षा और नौकरी (Education of Bankim Chandra) :

बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की शिक्षा हुगली कॉलेज और प्रेसीडेंसी कॉलेज, कोलकाता में हुई। उन्होने 1857 में  बी.ए. पास किया और बाद में 1869 में लो की डिग्री हासिल की। प्रेसीडेंसी कॉलेज से बी. ए. की उपाधि लेनेवाले ये पहले भारतीय थे। इसके बाद में उन्होने सरकारी नौकरी मिली और साल 1891 में सरकारी सेवा से वह रिटायर हो गए। 

 

साहित्यिक करियर (Literary Career of Bankim Chandra) :

बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की पहचान बंगाल के कवि, उपन्यासकार, लेखक और पत्रकार के रूप में है। उनकी प्रकाशित पहली रचना राजमोहन्स वाइफ थी। इसकी रचना अंग्रेजी में की गई थी। बाद में उन्होंने 1865 में 27 वर्ष की उम्र में अपना पहला उपन्यास ‘दुर्गेश नन्दिनी’ लिखा। यह एक रूमानी रचना है। उनकी अगली रचना का नाम कपालकुंडला है जो साल 1866 में प्रकाशित हुई। इसे उनकी सबसे अधिक रूमानी रचनाओं में से एक माना जाता है।

1872 में उन्होंने मासिक पत्रिका बंगदर्शन नाम से भी प्रकाशित किया। साल 1873 में अपनी इस पत्रिका में उन्होंने विषवृक्ष उपन्यास का क्रमिक रूप से प्रकाशित किया। बाद में कृष्णकांतेर विल में चट्टोपाध्याय ने अंग्रेजी शासकों पर तीखा व्यंग्य किया है। Chandra Chattopadhyay Biography in Hindi

बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने 20 दिसंबर 1876 में राष्ट्र गीत ‘वंदे मातरम’ की रचना की। जिसे बाद में आनन्द मठ नामक उपन्यास में शामिल किया गया। आनंदमठ (1882) राजनीतिक उपन्यास है। इस उपन्यास में उत्तर बंगाल में 1773 के संन्यासी विद्रोह का वर्णन किया गया है। इस पुस्तक में देशभक्ति की भरपूर भावना प्रकट की है। उनका अंतिम उपन्यास सीताराम (1886) था। इसमें मुस्लिम सत्ता के प्रति एक हिंदू शासक का विरोध प्रदर्शन दर्शाया गया है। Creator of Vande Mataram

बाद में उन्होंने सभी उपन्यासों का भारत की लगभग सभी भाषाओं में अनुवाद किया था। बांग्ला में सिर्फ बंकिम और शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय को यह गौरव हासिल है कि उनकी रचनाएं हिन्दी सहित सभी भारतीय भाषाओं में प्रचलित है। बंकिमचंद्र शरद और रवीन्द्रनाथ टैगोर से भी काफी लोकप्रिय हैं। उन्होंने धर्म, सामाजिक और समसामायिक मुद्दों पर आधारित कई निबंध भी लिखे। उनकी कविताएं ललिता ओ मानस नामक संग्रह में प्रकाशित हुई थी। Composer of Vande Mataram national anthem

वह बहुमुखी प्रतिभा वाले रचनाकार थे। उनके कथा साहित्य के अधिकतर पात्र शहरी मध्यम वर्ग के लोग हैं। इनके पात्र आधुनिक जीवन की त्रासदियों और प्राचीन काल की परंपराओं से जुड़ी दिक्कतों से साथ साथ जूझते हैं। यह समस्या भारत भर के किसी भी प्रदेश के शहरी मध्यम वर्ग के समक्ष आती है। लिहाजा मध्यम वर्ग का पाठक बंकिम के उपन्यासों में अपनी छवि देखता है। रवीन्द्रनाथ टैगोर ‘बंग दर्शन’ में लिखकर ही साहित्य के क्षेत्र में आए। वे बंकिम को अपना गुरु मानते थे।

 

बंकिमचंद्र का राष्ट्र प्रेम (Nation Love of Bankim Chandra) :

बंकिमचंद्र का जन्म उस काल में हुआ जब बंगला साहित्य का न कोई आदर्श था और न ही रूप या सीमा का कोई विचार। ‘वन्दे मातरम्’ राष्ट्रगीत के रचयिता होने के नाते वे बड़े सम्मान के साथ सदा याद किए जायेंगे। उनकी शिक्षा बंगला के साथ-साथ अंग्रेज़ी और संस्कृत भाषाओ में भी हुई थी। आजीविका के लिए उन्होंने सरकारी सेवा की, परन्तु राष्ट्रीयता और स्वभाषा प्रेम उनमें कूट-कूट कर भरा हुआ था। Chandra Chattopadhyay Biography in Hindi

 

बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का उपन्यास (The Novel of Bankim Chandra) :

  • 1864 – राजमोहन्स वाइफ (Rajmohans wife)
  • 1865 – दुर्गेशनन्दिनी (Durgeshnandini)
  • 1866 – कपालकुण्डला (Kapalakundla)
  • 1869 – मृणालिनी (Mrinalini)
  • 1876 – वंदे मातरम (Vande Matram)
  • 1873 – इन्दिरा (Indira)
  • 1874 – युगलांगुरीय (Jugalanguriya)
  • 1875 – चन्द्रशेखर (Chandrasekhar)
  • 1876 – राधारानी (Radharani)
  • 1877 – रजनी (Rajani)
  • 1878 – कृष्णकान्तेर उइल (Krishnakanter Uil)
  • 1882 – राजसिंह (Rajsimha)
  • 1882 – आनन्दमठ (Anandamath)
  • 1883 – बिषबृक्ष (Vishabriksha)
  • 1884 – देबी चौधुरानी (Devi Chaudhurani)
  • 1887 – सीताराम (Sitaram)

 

बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का ग्रंथ (The Book of Bankim Chandra) :

  • 1874 – लोक रहस्य (Lok Rahasya)
  • 1886 – कृष्ण चरित्र (Krishna Charitra)
  • 1875 – बिज्ञान रहस्य (Bijnan Rahasya)
  • 1879 – साम्य (Samya)
  • 1876 – बिबिध प्रबन्ध (Bichitra Prabandha)

 

मृत्यु (Death of Bankim Chandra) :

55 वर्ष की आयु में 8 अप्रैल 1894 को कलकत्ता, बंगाल प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश भारत में बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय ने अपना प्राण त्याग दिया। 1969 में भारत सरकार ने बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के मान में भारत के स्टेम्प पर उनकी मुन्द्रा लगाई।

आगे जानिए :

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