The Amazing Facts

अमिताव घोष की जीवनी | Amitav Ghosh Biography in Hindi

SHARE
, / 564 0
Amitav Ghosh
Amitav Ghosh
नाम  अमिताव घोष
जन्म11 जुलाई, 1956
जन्मस्थानकोलकाता, भारत
पिता  शैलेंद्र चंद्र घोष
माताअंसाली घोष
पत्नी डेबोरा बेकर
शिक्षादिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड
व्यवसायलेखक
पुरस्कारज्ञानपीठ पुरस्कार, पद्म श्री, आर्थर सी। क्लार्क पुरस्कार, प्रिक्स मेदिसिस ऐन्ट्रेंजर
नागरिकताभारतीय

 

महान साहित्यकार अमिताव घोष (Amitav Ghosh Biography in Hindi) :

अमिताव घोष एक लेखक हैं। उन्होंने अपने उपन्यास के लिए काफी साहित्यिक
पुरस्कार और उनकी की पहली उपन्यास, ‘द सर्किल ऑफ रीजन’ किताब के लिए अमिताव घोष को कलकत्ता में अनंदा पुरस्कार दिया गया था। Great writer Amitav Ghosh

प्रारंभिक जीवन (Amitav Ghosh Early Life) :

भारतीय लेखक अमिताव घोष का जन्म 11th जुलाई, 1956 कलकत्ता के बंगाली हिंदू परिवार में हुआ था। अमिताव घोष के पिता सेना में लेफ्टिनेंट-कर्नल थे, जिसके लिए, अमिताव घोष को दुनिया के अलग अलग स्थलों की यात्रा करनी पड़ी थी। Amitav Ghosh Biography in Hindi

शिक्षा (Amitav Ghosh Education) :

अमिताव घोष ने अपनी प्रांरभिक शिक्षा दून स्कूल देहरादून से प्राप्त की थी। और बाद में उच्च शिक्षा के लिए विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया। अमिताव घोष ने दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज में अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी की थी। बाद में अमिताव घोष ने दिल्ली विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में स्नातक किया। Amitav Ghosh Biography in Hindi

अमिताव घोष ने अपनी मास्टर्स ऑफ आर्ट्स डिग्री पूरी करने के बाद में वे बोरगुइबा देश गए। जहा उन्हों ने लैंग्यूस विवानेंट्स ट्यूनिस के एक इंस्टीट्यूट से अरबी में डिप्लोमा प्राप्त किया था। बाद में अमिताव घोष ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी गए, जहा उन्होंने सामाजिक मानविकी में डिप्लोमा प्राप्त किया, और 1982 के साल में डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त की थी।

 

निजी जीवन (Amitav Ghosh Married Life) :

अमिताव घोष की पत्नी का नाम डेबोरा बेकर था। उनके दो बच्चे थे, उसका नाम लीला और नयन हैं। Amitav Ghosh Biography in Hindi

 

करियर (Amitav Ghosh Career) :

अमिताव घोष ने भारत की परमाणु नीति पर उनका एक पुस्तक ‘काउंट डाउन’, ‘इमाम एंड द इंडियन’, उपन्यास का इतिहास जैसे विभिन्न विषयों पर निबंध संग्रह, इजिप्त कल्चर, लिटरेचर और डांसिंग इन कंबोडिया तथा एट लार्ज इन बर्मा शामिल किया हैं। अमिताव घोष को भारत सरकार के द्वारा पद्म श्रीअवार्ड से सन्मानित किया गया था। अमिताव घोष न्यूयॉर्क के क्वीन्स कॉलेज में तुलनात्मक साहित्य विभाग के प्रतिष्ठित प्रोफेसर के रूप में भी शामिल हुए थे।

1982 के साल में अमिताव घोष ने दिल्ली विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र विभाग में भी कार्य किया था। 1997 के साल में उन्हों ने आर्थर सी.क्लार्क पुरस्कार और 2001 के साल में फ़्रंकफ़र्ट बुक फेयर का इंटरनेशनल अवार्ड से नवाजा गया था। अमिताव घोष के द्वारा किये गए, कार्यो का 20 से भी ज्यादा भाषो में अनुवाद किया गया है। Amitav Ghosh Biography in Hindi

अमिताव घोष ने लोकार्नो फिल्म फेस्टिवल और वेनिस फिल्म फेस्टिवल में काम करते हुए भी बहुत सेवा की है। उन्हों ने अपने निबंधो को दी न्यूयॉर्कर, दी न्यू रिपब्लिक, दी न्यू यॉर्क टाइम्स, पेंगुइन इंडिया और हौगटन मिफ्फलिन में भी प्रकाशित किया था।

ग्रन्थसूची (Amitav Ghosh Biblio Graphy) :

सर्किल ऑफ़ रीज़न (1986)
शैडो लाइन्स (1988)
ग्लास पैलेस (2000) 
हंग्री टाइड (2004) 
रिवर ऑफ़ स्मोक (2011)
फ्लड ऑफ़ फायर (2015) 

 

पुरस्कार और सन्मान (Amitav Ghosh The Honors) :

  • 1990 के साल में उनकी किताब दी सर्किल ऑफ़ रीज़न ने फ्रांस के मुख्य साहित्यिक प्रिक्स मेडिसिस पुरस्कार जीता है।
  • 1997 के साल में दी आर्थर सी.क्लार्क पुरस्कार और दी ग्लास पैलेस में फ़्रंकफ़र्ट बुक फेयर का इंटरनेशनल पुरस्कार से भी सन्मानित किया गया।
  • 2005 के साल में उनकी किताब दी हंग्री टाइड को भारत पुरस्कार क्रॉसवर्ड बुक प्राइज से नवाजा गया।
  • 2007 के साल में भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया था।
  • 2008 के साल में उनको क्रॉसवर्ड बुक प्राइज और इंडिया प्लाजा गोल्डन पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।
  • 2010 के साल में मार्गरेट अट्वूड के साथ डैन डेविड पुरस्कार भी जीत चुके है।
  • 2011 के साल में उनकी प्रसिद्ध किताब रिवर ऑफ़ स्मोक को मैन एशियन प्राइज के लिए नाम निर्देशित किया गया था।
  • 2011 साल में उन्हें ब्लू मेट्रोपोलिस के इंटरनेशनल ग्रैंड प्रिक्स पुरस्कार से नवाजा गया था।
  • इसके बाद दी शैडो लाइन्स ने साहित्य अकादमी और अनंदा पुरस्कार भी दिया गया था ।
  • 2016 के साल में उनको मुंबई लिट्फेस्ट के टाटा लिटरेचर लाइव में लाइफटाइम अचीवमेंट के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

_

Leave A Reply