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एनी बेसेन्ट की जीवनी | Annie Besant Biography in Hindi

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Annie Besant Biography In Hindi
Annie Besant
पूरा नाम एनी फ्रैंक बेसेन्ट
जन्म        1 अक्तुबर, 1847
जन्मस्थान  लंडन (इंग्लंड)
पिता       विलियम पेजवुड
माता        एमिली
पत्नीफ्रैंक बेसेन्ट
पुत्रमेबल बेसेन्ट-स्कॉट, आर्थर डिग्बी बेसेन्ट
व्यवसायसामाजिक कार्यकर्ता, लेखक
नागरिकताब्रिटिश

 

सामाजिक कार्यकर्ता एनी बेसेन्ट (Annie Besant Biography in Hindi) :

एनी बेसेन्ट एक प्रसिद्ध समाज सुधारक, राजनीतिक मार्गदर्शक, महिला कार्यकर्ता, लेखिका और प्रवक्ता थीं। लंदन में जन्मी एनी बेसेन्ट ने भारत को अपना दूसरा घर बना लिया था। वे एक थियोसोफिस्ट और भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थी, वह भारतियों के अधिकारों के लिए लड़ीं, और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की प्रथम महिला अध्यक्ष बनीं। Annie Besant As Social Worker

 

प्रारंभिक जीवन (Annie Besant Early Life) :

एनी बेसेन्ट का जन्म 1 अक्टूबर, 1847 में लंदन के एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था। वह भारतीय मूल की नहीं, बल्कि आयरिश मूल की थीं। उनके पिता डॉक्टर थे, वहीं जब वह 5 साल की थीं, तब उनके सिर से पिता का साया उठ गया था। जिसके बाद उनकी मां एमिली मोरिस ने उनकी परवरिश की थी। उनकी मां एक बेहद मेहनती महिला थी, जो कि अपने घर का खर्च चलाने के लिए स्कूल के बच्चों के लिए बोर्डिंग हाउस भी चलाती थीं। Annie Besant Biography in Hindi

 

शिक्षा (Annie Besant Education) :

उनकी शिक्षा के लिए उनकी माँ ने अपने एक दोस्त एलेन मर्रीएट का सहारा लिया। एलेन की छत्र छाया में रहते हुए एनी ने अच्छी शिक्षा प्राप्त की। अपनी शुरुआती दिनों के दौरान, उन्होंने यूरोप की यात्रा की, इस यात्रा के दौरान उन्हें उनके भविष्य के लिए अपनी सोच और अपने दृष्टिकोण का निश्चय करने में बहुत मदद मिली। एनी ने बिर्कबेक साहित्यिक और वैज्ञानिक संस्थान में पार्ट टाइम शिक्षा भी प्राप्त की थी। British writer Annie Besant

 

निजी जीवन (Annie Besant Married Life) :

1867 में एनी बेसेन्ट जी ने 20 वर्ष की उम्र में एक अंग्रेज पादरी फ्रैंक बेसेन्ट से शादी हुई थी, लेकिन उनकी यह शादी ज्यादा दिनों तक चल नहीं सकी। शादी के करीब 6 साल बाद ही कुछ धार्मिक मतभेदों के कारण उन्होंने अपने पति से तलाक ले लिया था। शादी के बाद उन दोनों को 2 बच्चे भी हुए थे। तलाक के बाद एनी बेसेन्ट को भयंकर आर्थिक संकट का समाना करना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने स्वतंत्र विचार संबंधी लेख लिखकर धन अर्जित करना पड़ा था। Annie Besant Biography in Hindi

 

शुरुआती करियर (Annie Besant Starting Career) :

एनी बेसेन्ट ने अपने स्वतंत्र विचारों को कविताओं, कहानियों, लेख और किताबें आदि द्धारा व्यक्त करना शुरु कर दिया था। इस दौरान उन्होंने अपने सबसे करीबी दोस्त चार्ल्स ब्रेडलॉफ के साथ मिलकर जन्म नियंत्रण पर एक खूबसूरत किताब भी प्रकाशित की थी। उनकी इस किताब की वजह से उनकी लोकप्रियता लोगों के बीच और अधिक बढ़ गई थी।

इस दौरान वे लंदन डॉक हड़ताल में भी शामिल हुई थीं। मैच गर्ल्स की हड़ताल की तरह इसे भी बहुत अधिक सार्वजनिक समर्थन प्राप्त हुआ। एक सार्वजनिक वक्ता बनने के बाद एनी ने अलग अलग जगह की यात्रा करते हुए, लेक्चर देना शुरू कर दिए, और वे दिन प्रतिदिन के मुद्दों पर बोलने लगीं, अपने सार्वजनिक भाषणों के माध्यम से उन्होंने सरकार से विकास, सुधार और स्वतंत्रता की मांग की।

एनी बेसेन्ट ने अपने लेखन और सार्वजनिक भाषणों के माध्यम से एक लोकप्रिय दर्जा प्राप्त किया था। इसके बाद वे एक नेशनल सेक्युलर सोसायटी की एक विख्यात लेखिका और वक्ता बन गयी। और फिर करीब 1870 के दशक में एनी बेसेन्ट ने नेशनल रिफॉर्मर NSS समाचार पत्र में एक छोटे सप्ताहिक कॉलम के लिए एक धर्म निरपेक्ष राज्य बनाने और ईसाई धर्म द्धारा प्राप्त विशेष अधिकारों को समाप्त करने के उद्देश्य को  लेकर लिखना शुरु कर दिया। Annie Besant Biography in Hindi

1887 में वह लंदन के बेरोजगार समूह द्वारा आयोजित ट्राफलगार स्क्वायर में आयोजित विरोध प्रदर्शन में एक सार्वजनिक वक्ता के रूप में दिखाई दी, इसके बाद 1888 में एनी लंदन की मैच गर्ल्स की हड़ताल में सक्रिय रूप से शामिल हुईं, उन्होंने उनके बेहतर वेतन और शर्तों के लिए हड़ताल के उद्देश्य से महिलाओं की एक समिति बनाई, इस हड़ताल में उन्हें बहुत लोगों का समर्थन प्राप्त हुआ, और स्थिति में सुधार हुआ, और वेतन बढ़ गया। और 1888 में ही एनी मार्क्सवाद में शामिल हो गई, और इसकी सर्वश्रेष्ठ वक्ता बन गई।

 

राजनीतिक करियर (Annie Besant Political Career) :

1913 में एनी बेसेन्ट राजनीतिक क्षेत्र मे उतर पड़ीं। इन्होंने ‘कॉमनवील’ नाम का एक साप्ताहिक पत्र निकाला और कुछ महीने बाद प्रसिद्ध दैनिक पत्र ‘मद्रास स्टैण्डर्ड’ भी ले लिया। वे ‘इण्डियन नेशनल कांग्रेस’ मे सम्मिलित हुई और उसकी अध्यक्ष बनने का सम्मान प्राप्त किया। 1907 में भारत में ‘इण्डियन नेशनल कांग्रेस’ दो पार्टियों में विभक्त हो गई थी। Annie Besant As President of Indian National Congress

उस समय दो प्रमुख नेता थे, बाल गंगाधर तिलक और गोपाल कृष्ण गोखलेबेसेन्ट ने इन दोनों पार्टियों में एकता कराई और ‘ऑल इण्डिया होम रूल लीग’ की स्थापना की। 1921 में उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता के लिए दूसरा आन्दोलन किया, जो कि ‘नेशनल कन्वेन्शन’ कहलाया। इसके परिणामस्वरूप 1925 में ‘कॉमनवेल्थ ऑफ इण्डिया बिल’ का प्रस्ताव हुआ और ब्रिटिश संसद में रखा गया। इस बिल का उद्देश्य था सेना और विदेशी मामलों को छोड़ कर भारत को समस्त अधिकार सौंपना। पार्लियामेंट में यह बिल विचारार्थ रखा गया और ‘हाउस ऑफ कॉमन्स’ में पास भी हो गया, किन्तु कोई सफल परिणाम नहीं निकला।

इसके बाद एनी राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने लगी। उस समय वे कुछ समाजवादी संगठनों से प्रभावित हुई थी। जिससे उनकी राजनीतिक सोच में तेजी आई, उन्होंने इरिश में देखा कि कुछ लोग किसानों की जमीनों को हड़प रहे हैं, इसलिए उन्होंने इरिश के किसान के पक्ष में बोलना शुरू कर दिया, और साथ ही इसके लिए उन्होंने इरिश होम रुलर्स के साथ अपना संपर्क मजबूत किया। 1906 में बनारस में थियोसोफिकल सोसाइटी के अध्यक्ष के लिए नामांकित किया गया था। Annie Besant As President of Theosophical Society

अपनी अध्यक्षता के दौरान उन्होंने सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक, राजनीतिक जैसे विभिन्न क्षेत्रों पर ध्यान दिया। इन क्षेत्रों में दर्शनशास्त्र के अपने सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने 1908 में ‘थियोसोफिकल ऑर्डर ऑफ सर्विस एंड संस ऑफ इंडिया’ की स्थापना की थी। उन्होंने थियोसोफिकल शिक्षा के लिए भारत के लोगों को बढ़ावा देना शुरू किया। Annie Besant Biography in Hindi

 

सामाजिक कार्य (Annie Besant Social Work) :

एनी बेसेन्ट एक प्रसिद्ध समाज सुधारक थीं। जिन्होंने इंग्लैंड और भारत दोनों देशों के लिए एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में काम किया था। भारत में महिलाओं के अधिकारों के बारे में बोलते हुए, उन्होंने अपने महान और निरंतर सामाजिक कार्यों के माध्यम से खुद को सर्वश्रेष्ठ सामाजिक कार्यकर्ताओं में से एक के रूप में साबित किया।

वह हमेशा पारम्परिक हिन्दू रीती रिवाजों के पक्ष में महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ी, क्योकि वे प्राचीन हिन्दू विचारों का बहुत सम्मान करती थी। एक समाजिक कार्यकर्ता के रूप में अपने जीवन के दौरान, उन्होंने कई समाजिक कार्य किये, और साथ ही उन्होंने कई बार सामाजिक विषयों पर लेक्चर भी दिए।  

 

एनी बेसेन्ट की उपलब्धियां (Annie Besant Achivements) :

  • एनी को लंदन स्कूल बोर्ड में टावर हैमलेट्स के लिए चुना गया था।
  • 1922 में भारत में ‘हैदराबाद नेशनल कॉलेजिएट बोर्ड’ की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।
  • 1923 में एक थियोसोफिस्ट के रूप में उनकी निरंतरता के चलते वे भारत के राष्ट्रीय अधिवेशन की महासचिव बनीं।
  • 1926 में थियोसोफी पर उनके लेक्चर देने के बाद उन्हें विश्व शिक्षक घोषित किया गया था।
  • 1907 में थियोसोफिकल सोसाइटी की अध्यक्ष बनी थी, तब उसका मुख्यालय मद्रास के अडयार में बनाया गया जो वर्तमान में चेन्नई में है।

 

एनी बेसेन्ट की कृतियाँ (Annie Besant Creations) :

लेखिका और स्वतंत्र विचारक होने के नाते एनी बेसेन्ट ने थियोसॉफी पर लगभग 220 पुस्तकें और लेख लिखे। ‘अजैक्स’ उपनाम से भी उनकी लेखनी काफी चली थी। पूर्व-थियोसॉफिकल पुस्तकों और लेखों की संख्या लगभग 205 है। उन्होंने अपनी ‘आत्मकथा’ प्रकाशित की, उनकी जीवनी परक कृतियों की संख्या 6 है। उन्होंने केवल एक साल के भीतर सोलह पुस्तकें और अनेक पैम्प्लेट प्रकाशित किये जो 900 पृष्ठों से भी ज्यादा थे।

एनी बेसेन्ट ने भगवद्गीता का अंग्रेजी अनुवाद किया, तथा अन्य कृतियों के लिए प्रस्तावनाएँ भी लिखीं। भारतीय संस्कृति, शिक्षा सामाजिक सुधारों पर 48 ग्रंथों और पैम्प्लेटों की उन्होंने रचना की। भारतीय राजनीति पर करीबन 77 पुष्प खिले। उनकी मौलिक कृतियों से चयनित लगभग 28 ग्रंथों का प्रणयन हुआ। समय-समय पर ‘लूसिफेर’, ‘द कामनवील’ व ‘न्यू इंडिया’ में भी एनी बेसेन्ट ने संपादन किये।

 

पुरस्कार और सम्मान (Annie Besant The Honors) :

देशवासियों ने उन्हें माँ वसंत कहकर सम्मानित किया, तो महात्मा गांधी ने उन्हें वसंत देवी की उपाधि से विभूषित किया था।

 

मृत्यु (Annie Besant Death) :

1931 में वह गंभीर रूप से बीमार हो गई, 2 साल तक बीमार रहने के बाद, 20 सितंबर, 1933 को ब्रिटिश भारत के मद्रास प्रेसीडेंसी के अडयार में उनकी मृत्यु हुई। Annie Besant Biography in Hindi

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