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अटल बिहारी वाजपेयी की जीवनी | Atal Bihari Vajpayee Biography in Hindi

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Atal Bihari Vajpayee
Atal Bihari Vajpayee
नामअटल बिहारी वाजपेयी
जन्म 25 दिसंबर 1924
जन्मस्थानग्वालियर, मध्यप्रदेश
पिताकृष्ण बिहारी वाजपेयी
माताकृष्णा देवी
शिक्षाग्रेजुएशन, एम.ए.
व्यवसायभारत के पूर्व प्रधानमंत्री
पुरस्कारभारत रत्न, पद्म विभूषण
नागरिकताभारतीय

 

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee Biography in Hindi) :

अटल बिहारी वाजपेयी भारत के 10वें प्रधानमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के लिए प्रथम प्रधानमंत्री बने। वाजपेयी भारत के सबसे लोकप्रिय और आदरणीय राजनीतिक नेताओ में से एक थे। वाजपेयीजी ने भारतीय जनता पार्टी से जुड़ने से पहले अन्य कई संगठनों से जुड़े हुए थे। अटल बिहारी वाजपेयी एक प्रेरणादायक कवि और तेजशैली के भाषण देनेवालो में से एक थे। वह राजनीतिक के पद पर अपनी साफ छवि और उदारचरित विचारों के लिये जाने जाते थे। उनकी यह सब प्रसिद्धि देखकर भारत सरकार ने उन्हें साल 2015 मे देश के सर्वोच्च पुरष्कार ‘भारत रत्न’ देकर सम्मानित किया गया था। Atal Bihari Vajpayee First BJP Prime Minister of India

 

प्रारंभिक जीवन (Atal Bihari Vajpayee Early Life) :

वाजपेयीजी का जन्म 25th दिसंबर साल 1924 को भारत के मध्यप्रदेश राज्य के ग्वालियर शहर में एक मध्यम वर्ग के घर में हुआ था। उनके पिता का नाम कृष्ण बिहारी वाजपेयी था और उनकी माता का नाम कृष्णा देवी था। उनके मातापिता के 7 बच्चों में से एक थे। अटलजी के पिताजी एक स्कूल में शिक्षक के पद पर कार्यरत थे। अटलजी के दादा का नाम श्यामलाल वाजपेयी था, और वह उत्तर प्रदेश का अपने गांव बटेश्वर से ग्वालियर आये थे। Atal Bihari Vajpayee Biography in Hindi

 

शिक्षा (Atal Bihari Vajpayee Education) :

अटलजी ने अपनी शुरुआती पठाई ग्वालियर के एक स्कूल से की। बाद में आगे की शिक्षा के लिए उन्होंने डीएवी कॉलेज, कानपुर में दाखिला लिया। और इस कॉलेज से उन्होंने अर्थशास्त्र में स्नातक की डिग्री हासिल की। बाद में स्नातक के बाद उन्होंने RSS की प्रकाशित एक पत्रिका में संपादक के तौर पर जुड़ गए। अटलजी ने विवाह नहीं किया था, लेकिन उन्होंने उनके साथी कौल की दो बेटियों को गोद लिया था जिसका नाम नमिता और नंदिता है।

 

राजनीतिक करियर (Atal Bihari Vajpayee Political Career) :

भारत में साल 1942 में स्वतंत्रता के लिए जब भारत छोड़ो आंदोलन चल रहा था तब से उनका राजनीतिक की शुरुआत हो गई थी। इस आंदोलन में अटलजी और उनके बड़े भाई को अंग्रेज सरकार ने गिरफ्तार करके 25 दिन के लिए जेल में दाल दिया था। 1951 में जब भारतीय जनता संघ नवगठित हुआ तब, उस पार्टी के नेता प्रसाद मुखर्जी ने अटलजी को प्रेरित किया। और बाद में अटलजी भारतीय जनता संघ से जुड़ गए।

कुछ समय बाद प्रसाद मुखर्जी की स्वास्थ्य समस्याओं के चलते मृत्यु के बाद और भारतीय जनता संघ का नेतृत्व अटलजी ने संभाला और इस संगठन को अपने विचार तरीके से आगे बढ़ाया। अटलजी साल 1954 में बलरामपुर सीट के चुनाव में संसद सभ्य से खड़ा हुआ और विजय भी हुए। छोटी उम्र के बावजूद उनके राजनीतिक एजंडा और कार्यो से सभी को प्रभावित किया और सभी राजनीतिक व्यक्तियों में सम्मान बढ़ाया। इस के बाद…

  • साल 1962 के आम चुनाव में वह राज्यसभा के सदस्य चुने गए।
  • इसके बाद साल 1966 से 1967 तक, वह सरकारी आश्वासन बोर्ड के प्रेसिडेंट बने।
  • साल 1967 में उन्हें चौथी लोकसभा के सभ्य के रूप में चुना गया।

भारत में इंदिरा गांधी के सरकार में इमर्जेन्सी लगाने के बाद साल 1977 में जब जनता पार्टी के मोरारजी देसाई की सरकार आयी, तब अटलजी को इस सरकार में विदेश मंत्रालय सौंपा गया। अटलजी चीन के साथ संबंधों सुधारने के लिए चीन का दौरा भी किया। साल 1971 में हुए भारत पाकिस्तान के युद्ध के बाद इन दोनों देशो के बिच व्यापारिक संबंधो फिर से शरु करने के लिए अटलजी ने पाकिस्तान का दौरा करके एक नई पहल की थी।

इसके बाद जब जनता पार्टी और RSS के बिगड़ते रिश्ते के कारण अटलजी ने साल 1979 में मंत्री पद से त्यागपत्र भी दे दिया। 1980 में अटलजी ने लालकृष्ण आडवाणी, भैरोसिंह शेखावत तथा भारतीय जनता संघ के सदस्यों के साथ मिलकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नीव रखी। बीजेपी की स्थापना के बाद अटलजी 5 साल के लिए पार्टी के अध्यक्ष भी रहे थे। Atal Bihari Vajpayee Biography in Hindi

  • साल 1980, 1986 और 1993 में अटलजी भारतीय जनता पार्टी के लिए संसद में नेता थे।
  • साल 1986 में अटलजी राज्यसभा के सदस्य बने। साथ में वह सामान्य प्रयोजन समिति का सदस्य भी बने।
  • साल 1988 से साल 1990 तक, अटलजी व्यवसाय सलाहकार कमेटी के सदस्य निर्वाचित हुआ था।
  • साल 1990 से साल 1991 तक, अटल जी याचिकाओं की कमेटी के प्रमुख रहे थे।
  • साल 1991 में वह 10वीं लोकसभा का सदस्य बने।
  • साल 1993 से 1996 तक, वह विदेश बाबतो की कमेटी का प्रमुख बने। और साथ में लोकसभा में विपक्ष के नेता भी बने।
  • साल 1996 में वह 11वी लोकसभा का सदस्य बने।
 

भारत के प्रधानमंत्री के रूप में (Atal Bihari Vajpayee As a Prime Minister of India) :

भारत में साल 1996 में लोकसभा चुनाव हुआ। इस चुनाव में अटलजी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी को अन्य पार्टी से ज्यादा सीटों मिली और देश में पहली बार सत्ता पर आयी। इसके साथ अटल बिहारी वाजपेयी को प्रधानमंत्री बनाया गया। लेकिन बहुमत नहीं होने के कारण सरकार गिर गई और सिर्फ 13 सत्ता पर रहकर अटलजी को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना गया।

बाद में साल 1998 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी फिर से अन्य पार्टियों के सहयोग के कारण सरकार बनाने में सफल हुई और अटलजी भारत के प्रधानमंत्री बने। परंतु इस बार भी कुछ पार्टीयो ने अपना समर्थन वापस ले लिया और भारतीय जनता पार्टी की सरकार सीर्फ 13 महीनों में गिर गई।

इसके बाद साल 1999 के आम चुनाव में फिर से भारतीय जनता पार्टी सरकार बनाने में सफल रही और फिर अटल बिहारी वाजपेयी भारत के प्रधानमंत्री चुने गए। इसी के साथ बीजेपी सरकार पूरी टर्म (पांच साल) के लिए लोकसभा में रही। और पांच साल के लिए प्रथम बार बिन-कांग्रेसी सरकार चलाने में सफल रही।

 

प्रधानमंत्री के रूप में मुख्य कार्य (Atal Bihari Vajpayee Work As a Prime Minister) :

( 1 ) साल 1998 के मई महीने में अटलजी के नेतृत्व में राजस्थान के पोखरण में परमाणु परीक्षण करके पूरी दुनिया को चौका दिया।

( 2 ) साल 2001 में वाजपेयी ने सर्वशिक्षा अभियान के नामसे शिक्षा की नई रीत की शुरुवात की। इसके साथ अपने गठबंधन पार्टियों के समर्थन से अटलजी ने आर्थिक सुधार किया और निजी क्षेत्र के लिए अन्य कई योजना की शुरुआत की।

( 3 ) वाजपेयीजी ने औद्योगिक अधिकारों में राज्यों की दखलगिरी को संकुचित किया और अन्य देशो के निवेश की दिशा के लिए तकनीकी क्षेत्र में बदलाव किया। अटलजी की यह नीति से उद्योगों और निवेश के विचारों के बाद अर्थव्यवस्था ने विकास की गति बढ़ाई।

( 4 ) अटलजी के कार्यकाल में साल 2000 के मार्च महीने में अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन भारत आया और यह पिछले 22 सालो में अमेरिकी राष्ट्रपति भारत आने की पहली सफर थी। इससे भारत – अमेरिका के संबंध में काफी सुधार हुआ और व्यापार भी बढ़ा।

( 5 ) अटलजी ने विदेश नीतियां को बढ़ावा देने के लिए पाकिस्तान से भी संबंध बढ़ाए। पाकिस्तान और अमेरिका के साथ दोस्ताना संबंध अच्छे करके वाजपेयी सरकार ने द्विपक्षीय देशो का संबंधों को काफी मजबूत कर दिया था। और अटलजी की इस विदेशी नीतियों को बहुत लोगो ने भी सराहा गया था।

( 6 ) इसके बाद साल 2004 के लोकसभा चुनाव में अटलजी के नेतृत्व में NDA गठबंधन के साथ फिर उतरे। लेकिन इस बार कांग्रेस के नेतृत्व के UPA सरकार ने सफलता हासिल की और मनमोहन सिंह भारत के नए प्रधानमंत्री चुने गए। इसके साल 2005 में अटलजी ने राजनीति से सन्यास ले लिया।

 

पुरस्कार (Atal Bihari Vajpayee Awards) :

  • साल 1992 में भारत सरकार उन्हें ‘पद्म विभूषण’ पुरस्कार से सम्मानित किया।
  • साल 1993 में कानपुर विश्वविद्यालय ने उन्हें ‘डी.लिट’ की उपाधि देकर सम्मानित किया।
  • साल 1994 में उन्हें ‘गोविंद बल्लभ पंत’ अवार्ड दिया गया।
  • साल 1994 में उन्हें ‘सर्वश्रेष्ठ संसदीय’ अवार्ड मिला।
  • साल 1994 में उन्हें ‘लोकमान्य तिलक’ अवार्ड से सम्मानित किया गया।
  • साल 2015 में भारत सरकार के श्रेष्ठ पुरस्कार ‘भारत रत्न’ दिया गया।
  • साल 2015 में उन्हें बांग्लादेश सरकार द्वारा ‘बांग्लादेश के लिबरेशन वार’ से सम्मानित किया।

मृत्यु (Atal Bihari Vajpayee Death) :

साल 2009 में अटलजी को दिल का दौरा पड़ा था। जिसके बाद वह ठीक तो हो गए लेकिन उनका आरोग्य उम्र के साथ सतत बिगड़ता ही रहा। बाद में 93 वर्ष की आयु में 16 अगस्त 2018 को दिल्ली के AIIMS में भारत की इस महान आत्मा की मृत्यु हो गयी। लोगो आज भी इस महान आत्मा को भारत के श्रेष्ठ प्रधानमंत्री में से एक गिनते है। Atal Bihari Vajpayee Biography in Hindi

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