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अज़ीम प्रेमजी की जीवनी | Azim Premji Biography in Hindi

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Azim Premji Biography in Hindi
Azim Premji
नामअज़ीम प्रेमजी
जन्म 24 जुलाई 1945
जन्मस्थानमुंबई
पिताएम.एच. हशम प्रेमजी
पत्नीयासमीन प्रेमजी
पुत्ररिशद, तारिक
शिक्षाकला स्नातक / विज्ञान
व्यवसायभारतीय उद्योगपति, विप्रो के अध्यक्ष
पुरस्कारसीएनएन-आईबीएन इंडियन ऑफ द ईयर
नागरिकताभारतीय

 

भारतीय उद्योगपति अज़ीम प्रेमजी (Azim Premji Biography in Hindi) :

अज़ीम हाशिम प्रेमजी Azeem Hashim Premji एक भारतीय उद्योगपति, निवेशक और भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनी विप्रो (Wipro) के अध्यक्ष हैं। वे भारत के सबसे धनी व्यक्तियों में से एक हैं और 1999 से लेकर 2005 तक भारत के सबसे धनि व्यक्ति भी थे। एशियावीक ने उन्हें दुनिया के टॉप 20 प्रभावशाली व्यक्तियों में शामिल किया। अजीम प्रेमजी ने अपने नेतृत्व में विप्रो को नई ऊंचाइयां दी और आज विप्रो दुनिया की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर आईटी कंपनियों में से एक मानी जाती है। Azim Premji Biography in Hindi

 

प्रारंभिक जीवन (Azim Premji Early Life) :

अजीम प्रेमजी का जन्म 24 जुलाई 1945 को मुंबई के एक निज़ारी इस्माइली शिया मुस्लिम परिवार में हुआ। उनके पिता एक प्रसिद्ध व्यवसायी थे और ‘राइस किंग ऑफ़ बर्मा’ के नाम से जाने जाते थे। विभाजन के बाद मोहम्मद अली जिन्नाह ने उनके पिता को पाकिस्तान आने का न्योता दिया था पर उन्होंने उसे ठुकराकर भारत में ही रहने का फैसला किया।

1945 में अजीम प्रेमजी के पिता मुहम्मद हाशिम प्रेमजी ने महाराष्ट्र के जलगाँव जिले में ‘वेस्टर्न इंडियन वेजिटेबल प्रोडक्ट्स लिमिटेड’ की स्थापना की। यह कंपनी ‘सनफ्लावर वनस्पति’ और कपड़े धोने के साबुन ’787’ का निर्माण करती थी।

 

शिक्षा और शादी (Azim Premji Education and Marriage) :

उनके पिता ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए उन्हें अमेरिका के स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय भेजा पर दुर्भाग्यवश इसी बीच उनके पिता की मौत हो गयी और अजीम प्रेमजी को इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच में ही छोड़कर भारत वापस आना पड़ा। उस समय उनकी उम्र मात्र 21 साल थी। अजीम प्रेम जी की शादी यास्मिन से हुई और उनके दो बच्चे है। उसका नाम रिषाद और तारिक हैं।

 

बिजनेस करियर (Azim Premji Business Career) :

भारत वापस आकर उन्होंने कंपनी का कारोबार संभाला और इसका विस्तार दूसरे क्षेत्रों में भी किया। 1980 के दशक में युवा व्यवसायी अजीम प्रेमजी ने उभरते हुए इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी के महत्त्व और अवसर को पहचाना और कंपनी का नाम बदलकर विप्रो कर दिया। आई.बी.एम. के निष्कासन से देश के आई.टी. क्षेत्र में एक खालीपन आ गया था, जिसका फायदा प्रेमजी ने भरपूर उठाया।

उन्होंने अमेरिका के सेंटिनल कंप्यूटर कारपोरेशन के साथ मिलकर मिनी-कंप्यूटर बनाना प्रारंभ कर दिया। इस प्रकार उन्होंने साबुन के स्थान पर आई.टी. क्षेत्र पर ध्यान केन्द्रित किया और इस क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित कंपनी बनकर उभरे। जल्द ही विप्रो ने स्वयं को सबसे बड़ी कम्प्यूटर निर्माता कम्पनियों में स्थापित कर लिया। बाद में प्रेमजी सॉफ़्टवेयर विकास की ओर मुड़े और इस उद्यम में उन्हें काफी फायदा हुआ। Azim Premji Chairman of Wipro

 

अजीम प्रेमजी फाउंडेशन (Azim Premji Foundation):

अजीम प्रेमजी एक लोकोपकारी इंसान है। इसलिए उन्होंने 2001 में एक फॉउंडेशन की स्थापना की। जिसका नाम “अजीम प्रेमजी फाउंडेशन” रखा गया। यह एक गैर लाभकारी संगठन है जिसका लक्ष्य, गुणवत्तायुक्त सार्वभौमिक शिक्षा जो एक न्यायसंगत, निष्पक्ष, मानवीय और संवहनीय समाज की स्थापना में मददगार हो।

यह फाउंडेशन भारत के लगभग 13 लाख सरकारी स्कूलों में प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में प्रगति के लिए काम करता है। यह संगठन वर्तमान में कर्नाटक, उत्तराखंड, राजस्थान, छत्तीसगढ़, पांडिचेरी, आंध्र प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश की सरकारों के साथ मिलकर कार्य कर रहा है। Azim Premji Biography in Hindi

 

द गिविंग प्लेज संगठन में योगदान (Azim Premji Contribution of The Giving Pledge Organization) :

वॉरेन बफेट और बिल गेट्स द्वारा प्रारंभ किया गया ‘द गिविंग प्लेज’ एक ऐसा अभियान है जो दुनिया के सबसे धनि व्यक्तियों को अपनी अकूत संपत्ति का ज्यादातर भाग समाज के हित और परोपकार के लिए दान करने के लिए प्रोत्साहित करता है। अजीम प्रेमजी इसमें शामिल होने वाले पहले भारतीय हैं।

2013 में उन्होंने इस बात का खुलासा किया कि उन्होंने अपनी कुल संपत्ति का लगभग 25 प्रतिशत दान में दे दिया है और 25 प्रतिशत अगले 5 सालों में करेंगे। 2015 में मैसोर विश्वविद्यालय ने उन्हें डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया। Azim Premji Biography in Hindi

 

पुरस्कार और सम्मान (Azim Premji Awards) :

  • 2000 में मणिपाल अकादमी ने उन्हें डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया। 
  • 2005 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया। 
  • 2006 में राष्ट्रीय औद्योगिक इंजीनियरिंग संस्थान द्वारा उन्हें लक्ष्य बिज़नेस विजनरी से सम्मानित किया गया। 
  • 2009 में उन्हें कनेक्टिकट स्थित मिडलटाउन के वेस्लेयान विश्वविद्यलाय द्वारा उनके उत्कृष्ट लोकोपकारी कार्यों के लिए डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। 
  • 2011 में उन्हें भारत सरकार द्वारा देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया गया। 
  • 2013 में उन्हें ‘इकनोमिक टाइम्स अचीवमेंट अवार्ड’ दिया गया। 
  • 2015 में मैसोर विश्वविद्यालय ने उन्हें डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया। 

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