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बासप्पा दनप्पा जत्ती की जीवनी | Basappa Danappa Jatti Biography in Hindi

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Basappa Danappa Jatti
Basappa Danappa Jatti
नाम बासप्पा दनप्पा जत्ती 
जन्म 10 सितम्बर, 1912
जन्मस्थानबीजापुर, कर्नाटक
पिता  श्री दनप्पा जत्ती
पत्नी संगम्मा
पुत्रअरविंद जट्टी
शिक्षा एल.एल. बी.
व्यवसायराजनीतिज्ञ
नागरिकताभारतीय

 

राजनीतिज्ञ बासप्पा दनप्पा जत्ती (Basappa Danappa Jatti Biography in Hindi) :

बासप्पा दनप्पा जत्ती जिसे दुनिया बी.डी. जत्ती के नाम से भी जाने जाते हैं, जो फखरुद्दीन अली अहमद की मृत्यु के बाद कार्यकारी राष्ट्रपति के रूप में नियुक्त किया गया था। बासप्पा दनप्पा भारत के पाँचवे उपराष्ट्रपति थे, जिनका कार्यकाल 1974 से 1979 के बीच था। इसके साथ 11 फरवरी 1977 से 25 जुलाई 1977 तक वे भारत के राष्ट्रपति भी रह चुके है। वे भारत के उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति और मैसूर के मुख्यमंत्री रहे। Politician Basappa Danappa Jatti

 

प्रारंभिक जीवन (Basappa Danappa Jatti Early Life) :

बासप्पा का जन्म 10 सितंबर 1912 को कर्नाटक शहर के बीजापुर जिले में हुआ था। बसप्पा के दादाजी ने सवालगी ग्राम में एक छोटा घर तथा जमीन का एक टुकड़ा खरीद लिया था। लेकिन आर्थिक परेशानी के कारण घर और जमीन को गिरवी रखना पड़ा ताकि परिवार का जीवन निर्वाह किया जा सके। इनके पिता का नाम श्री दनप्पा जत्ती था। जब बासप्पा के दादा जी का निधन हुआ तो इनके पिता श्री दनप्पा की उम्र ज्यादा नहीं थी।

बासप्पा अपने माता-पिता की छह संतानों में से बड़ी संतान के क्रम में दूसरे थे। इनकी बड़ी बहन का नाम निलबबा था। इनसे छोटे दो भाई वीरप्पा और मालप्पा थे। उनसे छोटी दो बहनें काशीबाई और सुशील थी। छोटे भाइयों ने बीजापुर हाई स्कूल में अध्ययन किया और छोटी बहनों ने मूल के स्तर की पढ़ाई की।

 

शिक्षा (Basappa Danappa Jatti Education) :

उस समय सवालगी गाँव में दो स्कूल थे। जो प्राथमिक स्तर के थे एक लड़कों का स्कूल और दूसरा लड़कियों का स्कूल। ए.वी स्कूल की पढ़ाई समाप्त करने के बाद बसप्पा सिद्धेश्वर हाई स्कूल बीजापुर गए ताकि मैट्रिक स्तर की परीक्षा दे सके। 1929 में उन्होंने मैट्रिक परीक्षा पास कर ली।

तब यह स्कूल के छात्रावास में ही रहा करते थे। वह खेल कूद में भी रुचि रखते थे। इन्हे फूटबाल, तैराकी अलावा कुछ भारतीय के परंपरागत खेलों में भी रुचि थी। खो-खो कुश्ती, सिंगल बार और डबल बार पर कसरत करने का भी इन्हे शौक था। उन्होने लगातार दो वर्ष तक लाइट वेट वाली कुश्ती चैंपियनशिप भी जीती थी।

 

राजनीतिक करियर (Basappa Danappa Jatti Political Career) :

1940 में जामखंडी में म्युनिसिपेलिटी सदस्य के रूप में उन्होंने राजनीती में प्रवेश किया और फिर बाद में 1945 में जामखंडी गाँव म्युनिसिपेलिटी के अध्यक्ष बने। बाद में उनकी नियुक्ती जामखंडी राज्य विधान मण्डल के सदस्य और जामखंडी राज्य सरकार के मिनिस्टर के रूप में की गयी थी।

इसके बाद 1948 में जामखंडी राज्य के देवान बने। देवान के रूप में उन्होंने महाराजा शंकर राव पटवर्धन के साथ अच्छे संबंध बनाकर रखे थे। इसके बाद जामखंडी को बॉम्बे राज्य में मिला लिया गया, और वे क़ानूनी अभ्यास करने के लिए वापिस आए और लगातार 20 महीनो तक वकिली का ही अभ्यास करते रहे। 

बाद में जत्ती का नामनिर्देशन बॉम्बे राज्य वैधानिक असेंबली के सदस्य के लिए किया गया और नामनिर्देशन के एक हफ्ते के भीतर ही उनकी नियुक्ती संसदीय सदस्य के रूप में किया गया। वहाँ तक़रीबन 2 साल तक उन्होंने काम किया।

1952 के जनरल चुनाव के बाद उनकी नियुक्ती बॉम्बे के मुख्यमंत्री बी.जी. खेर के निजी सचिव के पद पर दो साल तक सेवा करने के बाद बी.डी. जत्ती को स्वास्थ्य और श्रम के उपमंत्री के पद पर नियुक्त किया गया।

1958 में मैसूर के मुख्यमंत्री बने और 1962 तक इस पद पर रहे। 1962 के तीसरे आम चुनावमें, वह जमखंडी निर्वाचन क्षेत्र से दोबारा नियुक्त हुए और मुख्यमंत्री एस. निजलिंगप्पा के मंत्रालय में इन्हें वित्त मंत्री के पद पर नियुक्त किया गया।

1968 में उसकी नियुक्ति पांडिचेरी के लेफ्टिनेंट गवर्नर के रूप में की गयी। इसके बाद बी.डी. जत्ती को मैसूर विधान सभा में भूमि सुधार समिति का अध्यक्ष चुना गया। बाद में 1972 में वे ओडिशा के गवर्नर बने।

1974 में भारत के पाँचवे उपराष्ट्रपति बने। भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति फकरूद्दीन अली अहमद की अचानक मौत हो जाने पर इन्हें 11 फरवरी 1977 से 25 जुलाई 1977 तक 5 महीने की अवधि के लिए भारत के कार्यकारी राष्ट्रपति का कार्यकाल सौपा गया। 1979 तक वह राज्यसभा के चैयरमेन भी रहे।

जबकि उनका कार्यकारी राष्ट्रपति बनना किसी विवाद से कम नही था। अप्रैल 1977 में जब यूनियन ग्रह मंत्री चरण सिंह ने जब नौ राज्यों की असेंबली को भंग करने का निर्णय लिया, तब जत्ती ने राष्ट्रपति द्वारा कैबिनेट की सलाह को मानने की परंपरा को तोड़ दिया और उनके आदेशो पर हस्ताक्षर करने से भी मना कर दिया था।

लेकिन बाद में उन्होंने आदेश पत्र पर अपने हस्ताक्षर कर ही दिए थे। 1979 में उपराष्ट्रपति के पद का कार्यालय छोड़ते समय, जत्ती देश के मुख्य राजनेताओ में गिने जाते थे। Basappa Danappa Jatti Biography in Hindi

 

मृत्यु (Basappa Danappa Jatti Death) :

7 जून 2002 को बी.डी जत्ती का मृत्यु हो गया। जीवन के अंतिम समय में वे बंगलौर में थे। इस प्रकार एक परम्परावादी युग का अंत हो गया। उन्हें गांधीवादी विचारों के लिए आज भी याद किया जाता है। भले ही वे देश के निर्वाचित राष्ट्रपति नहीं रहे हो लेकिन कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में अपने छोटे से कार्यकाल में उन्होंने संवैधानिक जिम्मेदारी को बखूबी निभाया।

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