The Amazing Facts

बाबा जयगुरु देव की जीवनी | Baba Jai Gurudev Biography in Hindi

SHARE
, / 4638 0
Baba Jai Gurudev
Baba Jai Gurudev
नाम तुलसीदास महाराज
जन्मस्थान इटावा ( उत्तर प्रदेश )
व्यवसाय गुरु
राष्ट्रीयता भारतीय

 

बाबा जयगुरु देव (Baba Jai Gurudev Biography in Hindi) :

वे वर्तमान में जय गुरूदेव बाबा के नाम से जाने जाते थे। उनका वास्तविक नाम तुलसीदास था, जिसे बहुत कम लोग ही जानते होंगे। अपने प्रत्येक कार्य में अपने गुरुदेव का स्मरण कर, गुरु के महत्व को सर्वोपरि रखने वाले और जय गुरुदेव का उद्घोष करने वाले बाबा जय गुरुदेव इसी नाम से प्रसिद्ध हो गए। Spiritual Guru Of Baba Jay Guru Dev

 

प्रारंभिक जीवन (Baba Jai Gurudev Early Life) :

जय गुरूदेव बाबा का जन्म उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव में हुआ था। उनके पिता एक प्रतिभाशाली व्यक्ति थे। जब वह छोटे थे तभी उन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया। सात साल की उम्र में बाबा जयगुरु देव ने अपना घर छोड़ा। मरते समय उनकी माता ने कहा था, की वह बिना शादी किये भगवान को ढूंड ले अपनी मां के शब्दों को याद करते हुए बाबा जी ने मंदिर, मस्जिदों और चर्चों का दौरा किया। Baba Jai Gurudev Biography in Hindi

 

बाबा जयगुरु देव का जीवन (Baba Jai Gurudev Life) :

युवावस्था में बाबा जी की अलीगढ़ जिले के चिरौली गांव के ब्राह्मण परिवार के एक पूर्ण आध्यात्मिक गुरु पंडित घरेलाल जी शर्मा से मुलाकात की। और उन्हें अपना गुरु बना लिया, और अपने गुरु के बताये रास्ते पर चल बाबा जी ने ध्यान शुरू किया। एक बार भोजन लेते हुए, उन्होंने ध्यान में एक दिन में बारह घंटे से अधिक समय बिताया। Baba Jai Gurudev Biography in Hindi

थोड़े समय बाद बाबा जी को अपने भीतर भगवान का एहसास हुआ बादमे उन्होंने 1952 में वाराणसी से प्रचार शुरू कर दिया। अपने आध्यात्मिक उपदेशों में बाबा जी कहते हैं, कि यह मानव शरीर एक किराए का घर है। एक बार लीज़ की अवधि खत्म होने पर इस शरीर को खाली करना होगा। रिश्तेदार, दोस्त, भूमि, संपत्ति यहाँ छोड़ दी जाएगी, और हमारे अच्छे या बुरे कार्यों के अनुसार आत्मा के साथ व्यवहार किया जाता हैं।

 

राजनीति (Baba Jai Gurudev Politics) :

24 मार्च, 1980 को जय गुरुदेव ने दूरदर्शी नामक एक पार्टी बनाते हुए, वर्ष 1989 के लोकसभा चुनावों में 12 राज्यों की 298 सीटों पर अपने उमीदवार को उतारा। उन्होंने खुद भी चुनाव लडा, पर हर क्षेत्र में उन्हें मुंह की खानी पड़ी। आलम यह था। कि वर्ष 1997 में इस पार्टी को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया गया। Baba Jai Gurudev Biography in Hindi

 

आश्रम और मंदिर का निर्माण : (Baba Jai Gurudev Ashram and Temple) :

1952 में बाबा ने मथुरा में कृष्णा नगर में आश्रम बनाया था। जो अब भी पुराने आश्रम के रूप में विद्यमान है। 1964 मे जब इस आश्रम में भंडारा हुआ तो उसमें लोगों की इतनी उपस्थिति हुई, कि  गुरू महाराज ने देखा कि आश्रम ककी जगह छोटी पड़ गई। तब गुरु जी ने मथुरा आगरा रोड़ बाईपास पर आश्रम के लिए यह जगह ली, और यहां पर संस्था का मुख्य आश्रम बनाया, आश्रम के अतिरिक्त कुछ जगह स्कूल, अस्पताल, और मंदिर के लिए भी ली।

1973 में जय गुरुदेव ने अपने गुरु घूरेलाल की याद में एक मंदिर बनवाना शुरू किया। मंदिर का नाम ‘नामक योग साधना मंदिर’ है। जिसका अर्थ है, दिव्य ध्वनि संपर्क ध्यान मंदिर हैं। 160 फुट ऊंचे इस मंदिर के निर्माण में सफेद संगमरमर का इस्तेमाल किया गया जिसके चलते यह बिलकुल ताजमहल जैसा दिखता है। 29 साल की मेहनत के बाद वर्ष 2002 में यह मंदिर बनकर तैयार हुआ।

यह मंदिर देखने में मंदिर-मस्जिद का मिलाजुला रूप लगता है। मंदिर के लिए किसी से कोई दान नहीं लिया गया, और वहा न ही कोई प्रवेश शुल्क है। कोई मांग नहीं है, और अगर कोई व्यक्ति दान करना चाहता है, तो स्थिति यह है कि उसे शाकाहारी होना चाहिए। आगरा, दिल्ली रोड़ पर मोहली मथुरा मे यह बाबा जयगुरुदेव की योग स्थली है। जो आध्यात्मिक शिक्षा के साथ भौतिक, समाजिक, आर्थिक सभी पहलुओं पर देश की जनता को जागरूक करके एक अच्छे समाज का निर्माण कार्य कर रही है।

दुनिया भर को शाकाहारी‍ जीवन जीने का संदेश देने वाले बाबा जय गुरुदेव जीवन भर समाजसेवा में लगे रहे। उन्होंने गरीब तबके के लिए निशुल्क शिक्षण संस्थाएं अस्पताल शुरू किए। बाबा ने अपने जीवनकाल में निशुल्क शिक्षा-चिकित्सा, दहेज रहित सामूहिक विवाह, आध्यात्मिक साधना, मद्यपान निषेध, शाकाहारी भोजन तथा वृक्षारोपण पर विशेष बल दिया। सभी शाकाहारी जीवन अपनाएं यही बाबा जय गुरुदेव की अपील है। Baba Jai Gurudev Biography in Hindi

 

इमरजेंसी के दौरान जाना पड़ा जेल (Baba Jai Gurudev Had to Go Jail) :

29 जून 1975 को, आपातकाल के दौरान, उन्हें कैद किया गया था। वह पहली बार आगरा केंद्रीय जेल में रखा गया था। और बाद में बरेली केंद्रीय जेल में ले जाया गया। अनुयायियों की भीड़ के कारण वे आकर्षित हुए, उन्हें बेंगलूर सेंट्रल जेल में ले जाया गया। 23 मार्च, 1977 को उन्हें 3 बजे रिहा किया गया था। हर साल उनके अनुयायी इस दिन मुक्ति दिवस के रूप में मनाते हैं। 3 बजे तक उपवास करते हैं। 

 

मृत्यु (Baba Jai Gurudev Death) : 

बाबा जय गुरुदेव का 116 वर्ष की उम्र में शुक्रवार, 18 मई, 2012 की रात मथुरा में निधन हो गया। वे पिछले कई दिनों से बीमार चल रहे थे। आश्रम प्रबंधकों के अनुसार दस दिन गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में इलाज कराने के बाद उन्हें उनकी इच्छानुसार मथुरा स्थित आश्रम लाया गया था। जहां रात नौ बजकर 52 मिनट पर उन्होंने अंतिम सांस ली। बाबा जय गुरुदेव का निधन एक युग का अंत है।

_

कहानी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर ज्वॉइन करें…

Leave A Reply