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ज्ञानी जैल सिंह की जीवनी | Gyani Zail Singh Biography in Hindi

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Gyani Zail Singh Biography in Hindi
Gyani Zail Singh
नामज्ञानी जैल सिंह
जन्म5 मई 1916
जन्मस्थानफरीदकोट
पिताकिशन सिंह
माताइंद्र कौर
पत्नीप्रधान कौर
पुत्रजोगिंदर सिंह
व्यवसायभारतीय राजनीतिज्ञ
नागरिकताभारतीय

 

भारत के सातवे राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह (Gyani Zail Singh Biography in Hindi) :

ज्ञानी जैल सिंह भारत के सातवे राष्ट्रपति थे, जिनका कार्यकाल 1982 से 1987 के बीच था। राष्ट्रपति बनने से पहले वे भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस पार्टी के एक राजनेता थे और यूनियन कैबिनेट में वह बहुत से पदों पर विराजमान भी थे, इसमें गृहमंत्री का पद भी शामिल है। उनके राष्ट्रपति कार्यकाल में बहुत सी घटनाये घटी, जिनमे मुख्य रूप से ऑपरेशन ब्लू स्टार, इंदिरा गाँधी की हत्या और 1984 में सिक्ख विरोधी दंगा भी शामिल है। 1994 में एक कार एक्सीडेंट के बाद भारी चोट आने की वजह से उनकी मृत्यु हो गयी थी। The seventh President of India Giani Zail Singh

 

प्रारंभिक जीवन (Gyani Zail Singh Early Life) :

ज्ञानी जैल सिंह का जन्म 5 मई, 1916 को पंजाब के फरीदकोट जिले के संध्वान ग्राम में हुआ था। इनके पिता का नाम किशन सिंह था, जो एक किसान थे। बचपन में ही उनकी माता चल बसी थी, जिस वजह से इनका पालन पोषण इनकी मौसी ने किया था। Gyani Zail Singh Biography in Hindi

 

शिक्षा (Gyani Zail Singh Education) :

जेल सिंह जी को शुरू से ही पढाई से ज्यादा लगाव नहीं था। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा भी पूरी नहीं की। जेल सिंह जी को उर्दू भाषा सिखने का मन में हमेशा से काफी उत्साह रहा, तो अपनी इस इच्छा पूर्ती के लिए उन्होंने उर्दू का ज्ञान प्राप्त भी किया। थोड़े समय बाद उन्हें गाना-बजाना सीखने की धुन सवार हुई, पैसे की तंगी के कारण वे एक हारमोनियम  बजाने वाले के यहाँ उसके कपड़े धोकर, उसका खाना बनाकर हारमोनियम बजाना सीखने लगे।

पिता की राय मिलने पर वे गुरुद्वारा में भजन कीर्तन करने लगे। कुछ समय पश्चात उन्होंने अमृतसर के शहीद सिख मिशनरी कॉलेज से गुरु ग्रंथ का पाठ सिखा, जिससे वे गुरुग्रंथ साहब के ‘व्यावसायिक वाचक’ बन गए थे और उन्हें ज्ञानी की उपाधि से सम्मानित किया गया। Gyani Zail Singh Biography in Hindi

 

शादि (Gyani Zail Singh Marriage) :

किशन सिंह को तीन शादियां करनी पड़ी थी। इनकी प्रथम पत्नी का नाम दया कौर दूसरी पत्नी का नाम मारिया कौर और तीसरी पत्नी का नाम इंदी कौर था। उनका एक बेटा और तीन बेटियाँ थी। Gyani Zail Singh Biography in Hindi

 

स्वतंत्रता संग्राम में योगदान (Jail Singh’s Contribution in the Freedom Struggle) :

वह एक स्वतंत्रता सेनानी और सामाजिक सुधारक थे, जो हमेशा दलित लोगों के साथ देते थे और उन्होंने समाज के उत्थान के लिए सब कुछ किया। वह कम उम्र से राजनीति में दिलचस्पी रखते थे और भगत सिंह और उनके साथियों की शहादत से बहुत प्रभावित थे जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए उनकी अनमोल जीवन का दान  दिया। स्वतंत्रता से पूर्व जैल सिंह विभिन्न आंदोलनों का हिस्सा बने रहे।

 

राजनीतिक करियर (Gyani Zail Singh Political Career) :

जैल सिंह सक्रिय रूप से अपनी किशोरावस्था से राजनीति में शामिल थे और शिरोमणि अकाली दल में शामिल हुए, जब वह सिर्फ 15 वर्ष के थे। जब तक वह 1930 के दशक के अंत में अपने 20 वर्षों तक पहुंचे, तब तक उनकी राजनीतिक आकांक्षाओं को एक नए उत्साह के रूप में लेना प्रारम्भ हो गया था।

1938 में ज्ञानी ज़ैल सिंह प्रजा मंडल की स्थापना की, जो कि एक राजनीतिक संगठन था जो कि फरीदकोट में कांग्रेस पार्टी के साथ संबद्ध था। यह फरीदकोट के महाराजा के लिए अच्छा नहीं था, उन्होंने  शहर में कांग्रेस की एक शाखा खोलने को उनकी शक्ति के लिए खतरे के रूप में देखा। जेल सिंह पर कब्जा कर लिया गया और कैद किया गया। 

5 साल के लिए उन्हें एकान्त कारावास में रखा गया था और उनके राजनीतिक गतिविधियों के लिए भी यातनाएं दी गई। फिर भी  इस  जवान ने कभी दिल छोटा नहीं किया और अपने आदर्शों पर दृढ़ता से कायम रहा। Gyani Zail Singh Biography in Hindi

1946 में फरीदकोट जिले में एक कार्यक्रम के दौरान उन्हें अंग्रजो द्वारा तिरंगा झंडा फहराने से रोक दिया गया। इस बात से परेशान होकर उन्होंने नेहरूजी को चिट्ठी लिख कर फरीदकोट आने का निमंत्रण दिया। फरीदकोट आने के बाद नेहरूजी ने देखा कैसे पूरा फरीदकोट जैल सिंह की बातों का अनुसरण कर रहा है। ये देख कर नेहरु जी ने उनकी योग्यता पहचान ली और अपनी पार्टी से जोड़ लिया।

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद जैल सिंह को पटियाला और पूर्वी पंजाब राज्यों के संघ का राजस्व मंत्री बना दिया गया। 1951 में वे कृषि मंत्री बने। इसके अलावा वह 1956 से लेकर 1962 तक राज्यसभा के भी सदस्य रहे। 1969 में उनके राजनैतिक संबध इंदिरा गांधी से काफी अच्छे हो गए थे। 1972 में वे पंजाब के मुख्यमंत्री नियुक्त हुए। 1977 तक वे इस पद पर कार्यरत रहे।

1980 में लोकसभा सीट मिल गई और इंदिरा से मित्रता के चलते उनके कार्यकाल में उनको देश का गृह मंत्री बना दिया गया। 1980 में वह इंदिरा गांधी के गृह मंत्री के रूप में कैबिनेट में शामिल हुए और 1982 में राष्ट्रपति बने। Gyani Zail Singh Biography in Hindi

 

भारत के राष्ट्रपति (Gyani Zail Singh as a President of India) :

1982 में बिना किसी विरोध के उनका नामनिर्देशन भारत के राष्ट्रपति के रूप में किया गया। हालांकि उनके विरोधियों का मानना ​​था कि उन्हें अपनी क्षमताओं के बजाय इंदिरा गाँधी का वफादार होने के लिए राष्ट्रपति के रूप में चुना गया था। 25 जुलाई 1982 को राष्ट्रपति कार्यालय में उन्होंने शपथ ली थी। राष्ट्रपति बनने वाले वे पहले सिक्ख थे। जून 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार होने पर उन्हें मूक दर्शक बनने का आरोप था।

वह गांधी के बगल में खड़े रहकर देश की सेवा करते थे और हर हफ्ते वे उन्हें तय किये गये प्रोटोकॉल की जानकारी देते थे। इसके बाद 31 अक्टूबर को उसी साल इंदिरा गाँधी की हत्या कर दी गयी और उन्होंने अपने बड़े बेटे राजीव गांधी को प्रधानमंत्री के पद पर नियुक्त किया। 

जब सरकारी सैनिकों ने हरमंदिर साहिब, अमृतसर में सिखों की सबसे पवित्र तीर्थ पर हमला किया और बहुत खून हो गए, जैल सिंह कुछ भी नहीं कर सके। उन्हें अक्टूबर 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद एक बहुत ही कठिन समय का सामना करना पड़ा था जिसके बाद उनके बेटे राजीव गांधी को प्रधान मंत्री नियुक्त किया गया था। वह कभी भी राजीव गांधी के साथ नहीं मिले, हालांकि उन्होंने 1987 तक राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया। Gyani Zail Singh Biography in Hindi

 

मृत्यु (Gyani Zail Singh Death) :

29 नवम्बर 1994 को रोपर जिले के कितारपुर के पास से यात्रा करते समय एक ट्रक गलत साइड से आ रहा था और कार में यात्रा कर रहे जैल की कार ट्रक से टकरा गयी और उनका एक्सीडेंट हो गया, इस हादसे के बाद जैल बहुत सी बीमारियों से जूझ रहे थे और उन्हें बहुत चोट भी लगी थी।

25 दिसम्बर को 1994 में चंडीगढ़ में उपचार के दौरान की उनकी मृत्यु हो गयी थी। उनकी मृत्यु के बाद भारत सरकार ने सात दिन का राष्ट्रिय शोक भी घोषित किया था। दिल्ली के राज घाट मेमोरियल में उनका अंतिम संस्कार किया गया था। Gyani Zail Singh Biography in Hindi

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