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चाणक्य की जीवनी | Chanakya Biography in Hindi

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Chanakya Biography in Hindi
Chanakya
नामचाणक्य
जन्म375 BC
जन्मस्थानतक्षशिला, पाकिस्तान
माताकान्स वारि
व्यवसायराजनीतिज्ञ, अर्थशास्त्री
नागरिकताभारतीय

 

भारतीय अर्थशास्त्री चाणक्य (Chanakya Biography in Hindi) :

भारत के नीतिशास्त्र के मार्गदर्शक आचार्य चाणक्य जो कि कौटिल्य और विष्णुगुप्त के नाम से भी प्रख्यात हैं। चाणक्य की नीतियों को अनुसरके भारत के अनेक साम्राज्य स्थापित हुए थे। कौटिल्य भारत देश के एक महान अर्थशास्त्री, दार्शनिक और राजनीतिज्ञ थे। उन्होंने ‘द अर्थशास्त्र’ ग्रंथ भी लिखा था, जो की आज भी यह ग्रंथ भारतीय राजनीति में बहोत एहमियत रखता है। इस ग्रंथ में उन्होंने भारत के उस काल के हरेक आकृति को वर्णित किया था जो अर्थशास्त्र, भौतिक सफलता और संपत्ति के बारे में था। अर्थशास्त्र के ज्ञान और राजनीतिक विचार के उन्नति के लिए उन्होंने जो मुख्य कार्य किया था इस वजह से उनको इस दोनों क्षेत्र का महाज्ञाता और प्रमुख नेता कहा जाता है। Indian Economist Chanakya

 

प्रारंभिक जीवन (Chanakya Early Life) :

चाणक्य के जन्मतिथि के बारे में इतिहासकारो ने भिन्न भिन्न वर्णन किया गया है, फिर भी बौद्ध धर्म के पुस्तक अनुसार उनका जन्म ईसा पूर्व 350 में मगध की राजधानी तक्षशिला में नामक एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम कुटिल थे। और उनके माता का नाम कान्स वरी था। लोग उनको भारत के मैक्यावली भी कहते है।

बचपन के समय चाणक्य बहोत जिद्दी और क्रोधी स्वभाव के थे। चाणक्य के जन्म के उनका परिवार बहोत गरीब हुआ करता था। इसी के साथ उन्होनें अपने बालयवस्था बहोत गरीबी में गुजारी थी। काफी गरीबी के चलते चाणक्य को कभी कभी भोजन भी नहीं मिलता था और कई बार वह भूखे पेट भी सो गए थे।

 

शिक्षा (Chanakya Education) :

चाणक्य की परिस्थिति बहोत गरीब होने के बावजूद भी उनकी पढाई उस समय के प्रख्यात विश्वविद्यालय नालंदा में हुई थी। कुछ किताब के अनुसार कहा गया है की चाणक्य ने तक्षशिला विश्वविद्यालय में भी पढाई की थी। वे बालपन से ही एक होशियार और अनोखा कौशल के संपन्न विद्यार्थी थे। उनकी शिक्षा ग्रहण करने की लगन बहोत गाढ़ थी। Chanakya Biography in Hindi

उस समय में तक्षशिला भारत के उत्तर से पश्चिम दिशा में स्थित शिक्षण का मुख्य केंद्रबिंदु था। एक गरीब ब्राह्मण वंश में जन्मे चाणक्य को राजनीतिक, ज्योतिषिय, अर्थशास्त्र, औषधि और युद्ध में रणनीति जैसे कई विषय पर उनको बहोत गहरा ज्ञान था। और इन्ही सब विषयों के महान विद्धान कहा जाता था। The Great Teacher Chanakya

 

चाणक्य का जीवन परिवर्तन (Chanakya Life Changes) :

चाणक्य एक महान चरित्र वाले कुशल राजनीतिज्ञ व्यक्ति थे, और साथ साथ वे एक बहोत बड़ा अध्यापक भी थे। उस समय चाणक्य अपनी महँ नीतियों और विचारो से बहोत प्रसिद्ध हो गए थे। उनकी प्रतिष्ठा भी आसमान छू गई थी, लेकिन इस समय उनके साथ ऐसी दो घटना हुई की चाणक्यजी का पूरा जीवनचक्र बदल गया।

( 1 ) पहली घटना भारत देश पर एलेक्जेंडर सिकंदर ने आक्रमण किया

( 2 ) दूसरी घटना – मगध के राजा घनानंद द्वारा चाणक्य का किया गया अपमान

चाणक्य के जीवन में यह दो घटना ऐसी घटी जिनके कारण उन्होंने भारत देश की एकता और साथ में अखंदितता का बचाव करने का द्रढ़ प्रण ले लिया। उन्होनें अध्यापक बनके बच्चों को शिखाने के बदले भारत देश के अयोग्य शासकों को पढ़ाने और यथार्थ नीतियों सिखाने का निर्णय किया। अपने इसी अटल प्रण के साथ चाणक्य अपने घर से निकल पड़े।

जब भारत पर सिकन्दर ने आक्रमण किया था उस समय चाणक्य तक्षशिला में प्रिंसिपल थे। ये उस समय की बात है जब तक्षशिला और गान्धार के सम्राट आम्भि ने सिकन्दर से समझौता कर लिया था। चाणक्य ने भारत की संस्कृति को बचाने के लिए सभी राजाओं से आग्रह किया लेकिन उस समय सिकन्दर से लड़ने कोई नहीं आया। जिसके बाद पोरस ने सिकन्दर से युद्ध किया लेकिन वे हार गए।

उस समय मगध अच्छा खासा शक्तिशाली राज्य था और उसके पड़ोसी राज्यों की इस राज्य पर ही नजर थी। जिसको देखते हुए देशहित की रक्षा के लिए विष्णुगुप्त, मग्ध के तत्कालीन सम्राट धनानन्द से सिकंदर के प्रभाव को रोकने के लिए सहायता मांगने गए। लेकिन शक्ति के घमंड में चूर धनानंद ने चाणक्य के इस प्रस्ताव ठुकरा दिया। और उनसे  कहा कि  –

“पंडित हो तो अपनी चोटी का ध्यान रखो,

युद्ध करना राजा का काम है तुम पंडित हो सिर्फ पंडिताई करो।”

 

चाणक्य और चन्द्रगुप्त (Chanakya and Chandragupta) :

चाणक्य और चंद्रगुप्त का गहरा संबंध है। चाणक्य चंद्रगुप्त के सम्राज्य के महामंत्री थे और उन्होनें ही चंद्रगुप्त का सम्राज्य स्थापित करने में उनकी मद्द की थी। इस अपमान के बाद चाणक्य ने नंद साम्राज्य का विनाश करने की प्रतिज्ञा ली, और नंद सम्राज्य के शासक द्धारा अपमान के बाद चाणक्य अपनी प्रतिज्ञा को सार्थक करने के निकल पड़े।

इसके लिए उन्होनें चंद्रगुप्त को अपना शिष्य बनाया। चाणक्य उस समय चंद्रगुप्त की प्रतिभा को समझ गए थे इसलिए उन्होनें चंद्रगुप्त को नंद सम्राज्य के शासक से बदला लेने के लिए चुना। जब चाणक्य की चंद्रगुप्त मौर्य से मुलाकात हुई तब चंद्रगुप्त महज 9 साल के थे। इसके बाद चाणक्य ने अपने विलक्षण ज्ञान से चंद्रगुप्त को अप्राविधिक विषयों और व्यावहारिक तथा प्राविधिक कलाओं की शिक्षा दी। 

चाणक्य ने चंद्रगुप्त को चुनने का फैसला इसलिए भी लिया क्योंकि उस समय कुछ मुख्य शासक जातियां ही थी जिसमे शाक्य, मौर्य का प्रभाव ज्यादा था। वहीं चन्द्रगुप्त उसी गण के प्रमुख का पुत्र था। जिसके बाद चाणक्य ने उसे अपना शिष्य बना लिया, और उनके साथ एक नए सम्राज्य की स्थापना की। Chanakya Biography in Hindi

 

नंद साम्राज्य का पतन (Chanakya Fall of Nanda Empire) :

शक्तिशाली और घमंड में चूर नंद वंश का राजा धनानंद जो कि अपनी शक्ति का गलत इस्तेमाल करता था और जिसने यशस्वी और महान दार्शनिक चाणक्य का अपमान किया था जिसके बाद चाणक्य ने चंद्रगुप्त के साथ मिलकर अपनी नीतियों से नंद वंश के पतन किया था। आचार्य चाणक्य और चंद्रगुप्त मौर्य ने नंद सम्राज्य के पतन के मकसद को लेकर कुछ अन्य शक्तिशाली शासकों के साथ गठबंधन बनाए थे।

आचार्य चाणक्य विलक्षण प्रतिभा से भरे एक बेहद बुद्धिमान और चतुर व्यक्ति थे। उन्होंनें अपनी चालाकी से कुछ मनोरंजक युद्ध रणनीतियों को तैयार किया और वे बाद में उन्होनें मगध क्षेत्र के पाटलिपुत्र में नंदा वंश का पतन किया और जीत हासिल की थी। Chanakya As Politicain 

 

मौर्य साम्राज्य की स्थापना (Chanakya Establishment of Maurya Empire) :

नंदा सम्राज्य के आखिरी शासक की हार के बाद नंदा सम्राज्य का पतन हो गया इसके बाद उन्होनें चंदगुप्त मौर्य के साथ मिलकर एक नए सम्राज्य मौर्य सम्राज्य‘ की स्थापना की। चंद्र गुप्त मौर्य के दरबार में उन्होनें राजनीतिक सलाहकार बनकर अपनी सेवाएं दी।

 

मौर्य साम्राज्य में चाणक्य की भूमिका (Role of Chanakya in Maurya Empire) :

चंद्रगुप्त के मौर्य साम्राज्य को उस समय के सबसे शक्तिशाली साम्राज्यों में से बदलने में अपनी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चाणक्य की नीतियों से मौर्य सम्राज्य का विस्तार पश्चिम में सिंधु नदी से, पूर्व में बंगाल की खाड़ी तक किया गया बाद में मौर्य साम्राज्य ने पंजाब पर भी अपना नियंत्रण कर लिया था, इस तरह मौर्य सम्राज्य का विस्तार पूरे भारत में किया गया।

महान विद्धान चाणक्य ने भारतीय राजनैतक ग्रंथ ‘अर्थशास्त्र’ लिखा जिसमें भारत की उस समय तक की आर्थिक, राजनीतिक और समाजिक नीतियों की व्याख्या समेत अन्य महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी गई है। ये ग्रंथ चाणक्य ने इसलिए लिखा था ताकि राज्य के शासकों को इस बात की जानकारी हो सके कि युद्ध, अकाल और महामारी के समय राज्य का प्रबंधन कैसे किया जाए।

जैन ग्रंथों में वर्णित एक लोकप्रिय किंवदंती के अनुसार, चाणक्य सम्राट चंद्रगुप्त के भोजन में जहर की छोटी खुराक को मिलाते थे जिससे मौर्य वंश के सम्राट की दुश्मनों द्वारा संभावित जहरीले प्रयासों के खिलाफ मजबूती बन सके और वे अपने प्राणों की रक्षा कर सकें।

वहीं इस बात की जानकारी सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य को नहीं थी इसलिए उन्होनें अपना खाना अपनी गर्भवती रानी दुध्रा को खिला दीया। आपको बता दें कि उस समय रानी के गर्भ के आखिरी दिन चल रहे थे। वे कुछ दिन बाद ही बच्चे को जन्म देने के योग्य थी।

लेकिन रानी द्धारा खाए गए भोजन में जहर ने जैसे ही काम करना शुरु किया वैसे ही रानी बेहोश हो गई और थोडे़ समय बाद ही उनकी मौत हो गई। जब इस बात की जानकारी चाणक्य को हुई तो उन्होनें रानी के गर्भ में पल रहे नवजात बच्चे को बचाने के लिए अपनी बुद्धिमान नीति का इस्तेमाल कर अपना पेट खोल दिया और बच्चे को निकाला।

इस बच्चे का नाम बिंदुसार रखा गया जिसे बड़ा होने पर मौर्य सम्राज्य का उत्तराधिकारी भी बनाया गया। वहीं चाणक्य ने कुछ सालों बाद बिंदुसारा के राजनैतिक सलाहकार के रूप में भी काम किया। Chanakya Biography in Hindi

 

मृत्यु (Chanakya Death) :

275 ईसा पूर्व में चाणक्य की मृत्यु हो गई। चाणक्य की मौत भी उनके जन्म की तरह कई रहस्यों से घिरी हुई है। ये तो स्पष्ट है कि महान दार्शनिक और विद्धान में अपना लंबा जीवन व्यतीत किया था लेकिन इस बारे में कुछ भी स्पष्ट नहीं कहा जा सकता है कि उनकी मौत आखिर कैसे हुई। Chanakya Biography in Hindi

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