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इंदिरा गांधी की जीवनी | Indira Gandhi Biography in Hindi

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Indira Gandhi
Indira Gandhi

 

भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Indira Gandhi Biography in Hindi) :

इंदिरा गांधी भारत की तीसरी और महिला के तौर पर भारत की प्रथम प्रधानमंत्री बनी थीं। वह एक ऐसी महिला थीं जिसने भारतीय राजनीति के उपरांत वैश्विक राजनीति में भी अपना बहोत प्रभाव बनाया था। प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने प्रबंधक से ज्यादा संस्था का केन्द्रीयकरण भी किया था। भारत में आजतक एकबार ही आपातकाल लागु किया गया है जो की यह इंदिरा गाँधी के शासनकाल में हुआ था और इसके साथ विरोध पक्ष के सारे राजनीतिक नेताओ को जेल में डाल दिया गया था। उनके शासनकाल में पंजाब से सारा आतंकवाद को खत्म करने के लिए इंदिरा ने पवित्र स्थल ‘स्वर्ण मंदिर’ में फौज और सुरक्षा बल के माध्यम से ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ चलाया था। Indira Gandhi First Female Prime Minister of India

 

प्रारंभिक जीवन (Indira Gandhi Early Life) :

इंदिराजी का जन्म 19th नवंबर 1917 को भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के इलाहाबाद शहर में हुआ था। इंदिरा के पिताजी का नाम पंडित जवाहरलाल नेहरू और उनके माता का नाम कमलादेवी नेहरु था। सबलोग जानते ही हे आजाद भारत का पहला प्रधानमंत्री उनके पिता जवाहरलाल नेहरू थे, और साथ ही जवाहरलाल और इंदिरा के दादाजी मोतीलाल नेहरू दोनों पेशे से वकील थे। साथ ही इन दोनों ने भारत की स्वतंत्रता के लिए अत्यधिक कार्य किया है।

इंदिराजी का परिवार पहले से ही आर्थिक तरह से बहुत बड़ा था। इंदिरा का नाम इनके दादाजी मोतीलाल ने रखा था। इंदिरा गांधी बाल्यावस्था से एक राजकीय ज्ञान मिला था क्योंकि उनके पिता और दादा भारतीय राजनीती से जुड़े हुए थे, और वो दोनों भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में हमेशा सक्रिय कारकर्ता के रूप में रहे है और जब इंदिरा 18 साल की थीं तब उनकी माता का क्षय रोग के कारण मृत्यु हो गई थी। Indira Gandhi Biography in Hindi

 

शिक्षा (Indira Gandhi Education) :

इंदिराजी ने शुरूआती शिक्षा अपने घर पर ही की थी। जवाहरलाल ने अपनी पुत्री की शिक्षा के लिए अपने घर पर ही शिक्षकों का पठाने का प्रबंध कर दिया था। इंदिरा ने शुरूआती शिक्षा खत्म करने के बाद उन्होंने साल 1934 में शान्ति निकेतन नामक जो रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा स्थापना हुई वहा ‘विश्व भारती विश्वविद्यालय’ में एडमिशन लिया। और वहीं रवीन्द्रनाथ टैगोर ने इंदिरा का नाम दिया ‘प्रियदर्शिनी’।

बाद में आगे पढ़ने के लिए इंदिराजी इंग्लैंड गईं और वहा ‘ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय’ में प्रवेश की परीक्षा में कामयाब नहीं हुई। जिसके चलते उन्होंने बैडमिंटन स्कूल, ब्रिस्टल में कुछ समय पसार किया और बाद में साल 1937 में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की परीक्षा में सफल हो गईं और सोमरविल महाविद्यालय में प्रवेश किया।

 

इंदिरा और फ़िरोज गांधी का विवाह (Marriage of Indira and Feroze Gandhi) :

इंदिराजी और फ़िरोज गांधी की पहली बार मुलाकात इलाहाबाद में हुयी थी। जब इंदिरा पढ़ने के लिए इंग्लैंड गई थी उस समय फ़िरोज भी लंदन स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स में पढाई कर रहे थे। वहा भी वो दोनों मिला करते थे। साल 1941 में इंदिरा भारत लौट आईं तब कुछ समय के बाद साल 1942 को मार्च महीने के 16 तारीख को इंदिराजी ने फ़िरोज गांधी से शादी कर ली। शादी के बाद इन दोनों को दो बच्चे हुए, बड़े बेटे का नाम राजीव गांधी रखा और दूसरे बेटे का नाम संजय गांधी रखा गया।

 

राजनीति में हुई शामिल (Indira Gandhi Involved in Politics) :

इंदिरा ने बाल्यावस्था से ही महात्मा गांधी को अपने घर में आते-जाते देखा था, जहा राजनितिक और देशहित की बातें होती थी, इस कारण इंदिरा की देश प्रेम और राजनीति में काफी रूचि रही थी। Indira Gandhi Politics Career

इंदिराजी अपनी शिक्षा पूर्ण करने के बाद जब वे भारत लौट आईं तब भारत में स्वतंत्रता आंदोलन काफी जोर पकड़ चूका था और इस आंदोलन में शामिल हो गयीं। बाद में वह उस आंदोलन में सक्रिय होने के कारण साल 1942 के सितम्बर महीने में इंदिरा को ब्रिटिश सरकार ने पकड़ लिया और जेल भेज दिया गया। बाद में साल 1943 के मई महीने के 13 तारीख को उन्हें जेल से मुक्त कर दिया।

भारत के स्वतंत्रता के बाद इंदिराजी और उनके पति फ़िरोज गांधी के साथ इलाहाबाद शहर में रहने लगी। 1952 में भारत के प्रथम आम चुनाव में फ़िरोज गांधी रायबरेली सीट के लिए निर्वाचित हुआ, उस समय फ़िरोज़ के लिए इंदिरा ने बहोत प्रचार किया। बाद आम चुनाव के नतीजे में फिरोज की जीत हुई। कुछ आतंरिक मामलो की वजह से इंदिरा ने फ़िरोज़ का घर छोड़ दिया और अपने पिता जवाहरलाल के कहने पर वो दिल्ली चली गयीं।

दिल्ली जाकर वह अपने पिता की राजनितिक सलाहकार बन गई और उनकी सलाह पर जवाहरलाल अमल भी किया करते थे। पिता की राजनितिक सलाहकार के तौर पर इंदिरा को राजनीति का बहोत ज्ञान प्राप्त हो गया। साल 1955 में कांग्रेस ने इंदिराजी को एग्जीक्यूटिव कमिटी में शामिल किया गया। इसके चलते उनके पति फिरोज से उनकी दूरी बढ़ गई। बाद में कांग्रेस कमिटी में इंदिराजी का कद बढ़ गया।

 

कांग्रेस प्रेसिडेंट के रूप में इंदिरा (Indira as Congress President) :

इंदिराजी को 42 साल की उम्र में 1959 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष बने गया। उनको कांग्रेस का अध्यक्ष बनने के बाद अनेक लोगों ने नेहरूजी पर परिवारवाद का आरोप भी लगाया। कुछ दिनों बाद साल 1960 के सितम्बर महीने में उनके पति फ़िरोज गांधी की मृत्यु हो गई, तब इंदिराजी जवाहरलाल के साथ विदेश यात्रा पर गई थीं।

भारत के प्रधानमंत्री और इंदिरा के पिताजी जवाहरलाल नेहरू की साल 1964 के मई महीने के 27 तारीख को मृत्यु हो गई, इसके बाद जब लाल बहादुर शास्त्री को प्रधानमंत्री बनाया गया तब इनके सरकार में इंदिराजी को सूचना और प्रसारण मिनिस्टर बनाया गया। साल 1965 में जब दोनों देश भारत-पाकिस्तान युद्ध हुआ तब उन्होंने सूचना और प्रसारण मंत्री होने के नाते आकाशवाणी का उपयोग करके लोगो को राष्ट्रिय के लिए सूचना प्रस्तुत की। Indira Gandhi After Death of Nehru

 

इंदिरा पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं (Indira First Female Prime Minister) :

1966 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के विराम के बाद दोनों देशो के प्रधानमंत्री ताशकंद में संधि के लिए इक्कठा हुए तब भारत के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की कोइक करणसर मृत्यु हो गई। बाद में उस समय के कांग्रेस के अध्यक्ष के. कामराज ने इंदिरा का नाम प्रधानमंत्री पद के लिए चुना, लेकिन अनुभवी कांग्रेसी नेता मोरारजी देसाई ने भी प्रधानमंत्री पद के लिए उनका नाम आगे बढ़ाया।

बाद में कोंग्रेसिय संसदीय सदस्यों ने प्रधानमंत्री पद के लिए मतदान किया। और इसके साथ 24 जनवरी, 1966 को इंदिराजी ने प्रधानमंत्री की शपथ ग्रहण किया और भारत की तीसरी और महिला के तौर पर पहले प्रधानमंत्री बनीं। Prime Minister of India Indira Gandhi

 

कांग्रेस में विखवाद (Split in Congress in Indira Government) :

जब इंदिराजी प्रधानमंत्री बनी तब से कांग्रेस में थोड़ी सी नाराजगी को चलते कांग्रेस के कुछ सदस्यों और इंदिरा, ऐसे दो पक्ष बन गया। इससे चलते 1967 में हुए अगले आम चुनाव में कांग्रेस को अपने कई सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस की सीटों की संख्या में 60 से ज्यादा की कमी आई, लेकिन इससे कांग्रेस पार्टी को सरकार बनाने में कोई तकलीफ नहीं रही।

मोरारजी देसाई के मार्गदर्शन से कांग्रेस के कई सदस्यों इंदिरा का लगातार विरोध करता रहा, इस लगातार विरोध के चलते 1969 में कांग्रेस का बटवारा हो गया। लेकिन अन्य पक्षों के सहायता से कांग्रेस आगामी दो वर्ष तक सरकार चलाती रहीं। बाद में 1969 में 14 बड़े बैंकों का राष्ट्रीयकरण करना इंदिरा का एक बहोत बड़ा निर्णय था।

 

बांग्लादेश को आजाद किया (Indira Gandhi Independent to Bangladesh) :

साल 1971 में बांग्लादेश से भारत आने वाले लोगो की समस्या के लिए भारत-पाकिस्तान में जंग छिड़ा गया और 16 दिसंबर को पाकिस्तान के जनरल का हार स्वीकार करने से भारत की जित हुई और इसी के साथ बांग्लादेश हमेंशा के लिए आजाद हो गया। पाकिस्तान का इस जंग में पराजय के बाद ज़ुल्फिकार अली भुट्टो नए राष्ट्रपति बने और बाद में उन्होंने भारत के सामने अमन का प्रस्ताव रखा, जिससे चलते इंदिराजी ने यह प्रस्ताव का स्वीकार किया और इसके बाद भारत-पाकिस्तान के मध्य शिमला समझौता किया गया।

 

बीमा उद्योग का राष्ट्रीयकरण (Indira Gandhi on Nationalization of Insurance Industry) :

पाकिस्तान से साथ जंग के बाद इंदिराजी ने देश के विकास के लिए अपना पूरा ध्यान लगा दिया। और 1972 में संसद में बिमा उद्योग का राष्ट्रीयकरण एक्ट घोसित करने की दरखास्त की। बाद में 1 जनवरी 1973 से जनरल बीमा उद्योग का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया। Indira Gandhi Biography in Hindi

 

भ्रष्टाचार के आरोप (Charges of Corruption on Indira Government) :

इंदिरा गांधी का अलग अलग विस्तारो में विकास के लिए कसी सारे योजना चलाई। इसके साथ उनको कई परेशानीओ का सामना करना पड़ा जैसे की महँगाई, अकाल की स्थिति। साथ पेट्रोलियम की बढ़ती कीमतों से भारत में महँगाई बढ़ती जा रही थी. उधर अंतरराष्टीय पेट्रोलियम आयात के साथ विदेशी चलन के सामने भारत के चलन का रेट घटता जा रहा था।

इस सब परेशानी के साथ भारत में आर्थिक मंदी का दौर चल रहा था, साथ साथ भारत के उधोगो का कारभार भी चौपट हो रहे थे। बेकारी बहुत तेजी से बढ़ रही थी साथ में सरकारी अधिकारीओ ने भी महँगाई से प्रभावित होने के कारण पगार वृद्धि का मांग किया। इसके चलते प्रजा की सरकार के प्रति अविश्वास बढ़ने लगा और सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया।

 

इंदिरा के इस्तीफे की मांग (Demands for Indira Resignation) :

बाद में सरकार की दिककत बढ़ने लगी और इसके साथ राज नारायण ने उच्च न्यायालय, इलाहाबाद में सरकार के विरुद्ध एक मुकदमे पेश कर दिया। इसके चलते आने वाले अगले लोक चुनाव में उच्च न्यायालय ने इंदिरा गांधी का चुनाव ही रद्द कर दिया और साथ 6 साल के लिए इंदिरा के चुनाव लड़ने पर भी रोक लगा दी गई।

इस परिस्थिति में इंदिराजी को प्रधानमंत्री पद के लिए इस्तीफा देना पड़ता। लेकिन इंदिराजी ने उच्च न्यायालय का इस फैसले का सर्वोच्च न्यायालय में दारीज कर दिया और सर्वोच्च न्यायालय ने इस फैसले सुनवाई के लिए जुलाई महीने के 14 तारीख के दिन तय किया। परंतु जे पी नारायण के साथ विपक्ष ने इंदिरा गांधी का प्रधानमंत्री पद का इस्तीफे की मांग के लिए आंदोलन बहोत उग्र कर दिया। Indira Gandhi Biography in Hindi

 

आपातकाल (Emergency in Indira Government) :

इन सब परिस्थितिओ के बाद इंदिराजी ने राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद से अपील की, की उच्च न्यायालय के फैसले के तुरंत बाद बढती अशांति और अव्यवस्था को ठीक करने के लिए देश में आपातकालीन की घोषणा की जाए। सभी मंत्रिमंडल के सदस्यों की सलाह के बाद 26 जून 1975 को देश के संविधान की कलम-352 के देखते राष्ट्रपतिजी ने आपातकाल की घोषणा की।

आपातकाल की घोसणा के साथ जे पी नारायण, मोरारजीभाई देसाई और हजारों विरोधीय नेताओं को जेल में बंध कर दिया। साथ में इस स्थिति में अखबार, रेडियो और टेलीविज़न को सरकार ने अपने हाथ ले लिया। इसके साथ लोगों के सारे अधिकार की समाप्ती हो गए। बाद में बहोत विरोध भी हुआ। इस स्थिति में लोगों की मज़बूरी देखते हुए सरकार ने जबरदस्ती नसबंदी भी करवाई गई। इससे चलते इंदिरा के विरुद्ध लोगों में बहोत नाराजगी हो गया। आखिरकार साल 1977 के मार्च महीने की 21 के दिन आपातकाल समाप्त कर दिया गया।

 

कांग्रेस की हार (Congress Defeat After Emergency) :

इसके कुछ समय बाद इंदिरा गांधी ने 1977 के जनवरी महीने में लोकसभा चुनाव करने की घोषणा की। उनको बताया गया की अगर इस समय चुनाव किया गया तो कांग्रेस पार्टी बहोत बड़ी जित होगी। लेकिन जब चुनाव की घोषणा की तब से राजनीतिक सदस्यों को जेल से रिहा कर दिया। मीडिया, राजनीतिक सभाओं और चुनाव प्रचार की आज़ादी दे दी गई।

आपातकाल के बाद विपक्ष के नेताओ ने आपातकाल के दौरान नसबंदी और तानाशाही मुख्य मसला बना कर सरकार पद तूट पड़े। साथ ही जनता का विपक्ष को ज्यादा सहयोग मिला और विपक्ष के मुख्या नेता जे पी नारायण के संचालन में ‘जनता पार्टी’ नामक एक पार्टी बनाई गई और सारे विपक्ष संगठित हो गए।

इंदिरा गांधी से नाराज जनता ने चुनाव में जनता पार्टी के गठबंधन को 330 बैठके मिली, और इंदिरा गांधी की कांग्रेस पार्टी को सिर्फ 154 बैठकों मिली। जनता ने आपातकाल का बदला कांग्रेस सरकार से लिए था। बाद में जनता पार्टी के गठबंधन में 23 मार्च 1977 को मोरारजी देसाई भारत के चौथे प्रधानमंत्री बना।

जनता पार्टी के सरकार में इंदिराजी पर बहुत इलजाम लगाए गए और साथ ही उनकी तपास के लिए एक समिति बिठाए गए। साथ ही देश की कई अदालतों में इंदिरा के खिलाफ मुक़दमे भी पेश किए गए और सरकारी भ्रष्टाचार के इलजाम में उन्हें थोड़ा समय के लिए जेल में भी बिताना पड़ा।

 

आपातकाल के बाद प्रधानमंत्री बनीं (Indira Became Prime Minister again after Emergency) :

जनता पार्टी के सरकार में इंदिराजी के खिलाफ हो रहे आचरण के बाद लोगो में इंदिरा के प्रति संवेदना बढ़ गई। साल 1979 में जब जनता पार्टी सरकार गिर गई उसके बाद फिर से मध्यमवर्ती आम चुनाव हुए। इस चुनाव के पहले इंदिराजी ने अगल अगल राज्यों में बहोत सभाओ की और जनता से आपातकाल के लिए और उसमे हुए अत्याचार के लिए माफी मांगी और इसके चलते चुनाव में 353 बैठके प्राप्त कर फिर से प्रधानमंत्री बन गई। Indira Gandhi Biography in Hindi

 

इंदिरा गांधी 4 बार भारत की प्रधानमंत्री रहीं (Indira Gandhi was Become 4 times Prime Minister of India) :

( 1 ) पहली बार 1966 में जब भारत के प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री की मृत्यु हो गई बाद में इंदिराजी को भारत की प्रधानमंत्री बनाई गई।

( 2 ) दूसरी बार जब 1967 के आम चुनाव में कांग्रेस पार्टी की जित के साथ प्रधानमंत्री बनीं।

( 3 ) साल 1971 के आम चुनाव में फिर से कांग्रेस पार्टी के जित के साथ भारी बहुमत से लगातार तीसरी बार भारत की प्रधामंत्री बनी।

( 4 ) आपातकाल के बाद 1980 में चौथी बार कांग्रेस की जित के साथ फिर से प्रधानमंत्री बनाई गई।

 

पुरस्कार और सन्मान (Indira Gandhi Awards and Honors) :

  • 1953 में ‘मदर्स अवार्ड’ से सम्मानित किया गया।
  • 1971 में पोल के अनुसार इंदिराजी दुनिया की सबसे ज्यादा सम्मानीय महिला बन गई।
  • 1971 में उन्हें ‘डिप्लोमा ऑफ़ ऑनर’ से सम्मानित किया गया।
  • 1971 में भारत सरकार द्वारा देश के सबसे बड़े सम्मान ‘भारत रत्न’ दिया गया।
  • 1972 में बांग्लादेश को आज़ादी दिलाने के लिए ‘मेक्सिकन अवार्ड’ से सम्मानित किया गया।

ऑपरेशन ब्लू स्टार (Indira Gandhi on Operation Blue Star) :

साल 1981 में भिंडरावाले के संचालन में पंजाब में एक अलगतवादी संगठन आगे बढ़ रहा था। इंदिरा को लगा की वहा की स्थिति बहुत बिगड़ती जा रही है और उनको लगा कि उनका अंकुश सरकार के हाथ से नहीं होगा। साथ ही भिंडरावाले को लगा की वह हथियारों के प्रभाव से अलग अस्तित्व बना सकते था।

साल 1981 के सितम्बर महीने में भिंडरावाले का आतंकवादी संगठन हरिमंदिर साहिब परिसर के अंदर इकठ्ठा हो गया। बाद में इंदिरा ने इस संगठन का खात्मा करने के लिए भारतीय सेना को स्वर्ण मंदिर में प्रवेशने के लिए आज्ञा दी गई। इस ऑपेरशन का नाम ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ दिया गया। साथ में इस वक्त सुवर्ण मंदिर में कई सारे आम लोको भी थे। इस ऑपेरशन के वक्त बहोत आम लोको भी मारे गए और इससे चलते सिख संप्रदाय में इंदिराजी के विपरीत बहोत निंदा पैदा हो गयी।

 

इंदिरा गांधी की हत्या (Assassination of Indira Gandhi) :

इंदिरा के खिलाफ शिखो का रोष के चलते ऑपरेशन ब्लू स्टार के कुछ महीने के बाद बदला लेने के लिए इंदिरा के शिख संप्रदाय के दो अंगरक्षक सतवंत सिंह और बेअंत सिंह ने 31 अक्टूबर 1984 को गोली मारकर इंदिरा की हत्या कर दी। Indira Gandhi Biography in Hindi

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