The Amazing Facts

जयप्रकाश नारायण की जीवनी | Jayprakash Narayan Biography in Hindi

SHARE
, / 535 0
Jayprakash Narayan Biography In Hindi
Jayprakash Narayan
पूरा नाम जयप्रकाश नारायण
जन्म        11 अक्टूबर 1902
जन्मस्थान सिताबदियारा, सारण, बिहार
पिता        हरसू दयाल श्रीवास्तव
माता        फूल रानी देवी
पत्नीप्रभाती देवी
पुत्रसिद्दार्थ नारायण
व्यवसायसामाजिक कार्यकर्ता
पुरस्कारभारत रत्न
नागरिकताभारतीय

 

सामाजिक कार्यकर्ता जयप्रकाश नारायण (Jayprakash Narayan Biography in Hindi) :

जयप्रकाश नारायण एक क्रांतिकारी थे। उनका नाम भारत के इतिहास में सुनहरे अक्षरों से लिखा गया है। जिन्होंने देश की स्वतंत्रता से पहले स्वतंत्रता संग्राम में और स्वतंत्रता के बाद राजनीति में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। इसके अलावा आम-जन के हितों और न्याय के लिए किये गये उनके कार्यों के कारण ही उन्हें लोकनायक कहकर सम्बोधित किया जाता हैं।

महात्मा गाँधी के आदर्शों से प्रेरित जयप्रकाश नारायण एक ऐसे स्वतन्त्रता सग्राम सेनानी थे। जिन्होने अहिंसा के सिद्धान्त को नए विचारों के साथ अपनाया और भारत के निर्माण में कई अहम निर्णय लिए, जिन पर भारत सरकार को गहनता के साथ विचार करना पड़ा।

 

प्रारंभिक जीवन (Jayprakash Narayan Early Life) :

जयप्रकाश नारायण का जन्म 11 अक्टूबर 1902 को बिहार के सारण जिले के सिताबदियारा गाँव में हुआ था। उनके पिता का नाम हर्सुल दयाल श्रीवास्तव था। वो स्टेट गवर्नमेंट के कैनल विभाग में कार्यरत थे। और माता का नाम फूल रानी देवी था। वो अपनी माता-पिता की चौथी संतान थे। इनका घर लाला टोला के घाघरा नदी के किनारे पर स्थित था।

 

शिक्षा (Education) :

जय प्रकाश नारायण ने कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय से रसायन इंजीनियरिंग में डिग्री प्राप्त की। इसके बाद इन्होंने शिकागो स्थित विसकौंसिन विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र का अध्ययन किया और बी.ए की डिग्री प्राप्त की। इसी विश्वविद्यालय में इन्हें समाजशास्त्र का प्राध्यापक नियुक्त कर लिया गया। इसके बाद उन्होंने एम.ए की परीक्षा उत्तीर्ण की। के बाद इन्होंने पी.एच.डी करने के लिए विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया। 

 

निजी जीवन (Jayprakash Narayan Marriage Life) :

1920 में जयप्रकाश का विवाह मात्र 18 वर्ष की उम्र में 14 वर्ष की प्रभादेवी के साथ हुआ था। प्रभादेवी एक स्वतंत्र व्यक्तित्व वाली महिला थी। साथ ही वो क्रांतिकारी, उदारवादी और गांधीवादी महिला थी। और गांधीजी के कार्यों में उत्साह के साथ भाग लेती थी। जयप्रकाश जब यूएस पढने के लिए गए तब वो कस्तूरबा गांधी जी के साथगांधी आश्रम मे रहने लगी थी। Jayprakash Narayan Biography in Hindi

 

सामाजिक कार्य (Jayprakash Narayan Social Work) :

जयप्रकाश अपने मित्रों के साथ असहयोग आन्दोलन जिसे गांधीजी ने 1919 में आये रोलेट एक्ट के विरुद्ध शुरू किया था। उसके दौरान मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के भाषण को सुनने गये थे। और उस समय उन पर मौलाना अबुल के शब्दों का प्रभाव हुआ और उन्होने अपने एग्जाम से 20 दिन पहले ही उन्हों ने कॉलेज छोड़ दिया था।

8 अक्टूबर 1922 को वो कैलीफिर्निया पहुंचे. जयप्रकाश ने यूनाइटेड स्टेट्स में अपनी शिक्षा का खर्चा उठाने के लिए उन्होंने कई तरह की नौकरियां की, और इन अनुभवों ने ही उन्हें वर्किंग क्लास के सामने आने वाली समस्याओं के प्रति जागरूक कर दिया। बर्कले में उन्होंने अंगूर तोड़ने,जेम पैकर,वेटर,सेल्समेन और बर्तन धोने का काम भी किया था।

जयप्रकाश ने पहले बर्कले में प्रवेश लिया और फिर यूनिवर्सिटी ऑफ़ लोवा में स्थानांतरण लिया, इसके बाद भी उन्हें कई अन्य यूनिवर्सिटी में ट्रांसफर लेना पड़ा। इस तरह यूएस में कई तरह की समस्याओं का सामना करते हुए। भी जेपी ने अपने पसंदीदा विषय समाज-शास्त्र में पढाई की,और प्रोफेसर एडवर्ड रोस से इस विषय में मार्गदर्शन लिया।

यही पर कार्ल मार्क्स के दास केपिटल ने उन्हें काफी प्रभावित किया, जिसे पढकर उन्हें ये समझ आया कि मार्क्सिज्म में बहुत सी समस्याओं का समाधान मिल सकता हैं। इस तरह इस विचारधारा से प्रभावित होकर वो मार्क्सिस्ट बन गए। जेपी ने भारतीय विद्वान और कम्युनिस्ट एम.एन रॉय की किताबो को भी पढ़ा, उन्होंने लेनिन, ट्रोटस्काई के किये गये कामों का भी अध्ययन किया।

 

राजनीतिक करियर (Jayprakash Narayan Political Carrier) :

1929 उनकी शिक्षा खत्म करके विदेश से भारत आया। माता जी के देहांत के बाद उन्होंने राजनीति में सक्रिय भाग लेना आरम्भ किया। 1932 में असहयोग आन्दोलन के दौरान गिरफ्तार करके नासिक जेल में डाल दिया गया। जेल में ही यह राम मनोहर लोहिया, अशोक मेहता तथा मीनू मसानी से मिले। जेल से निकलने के बाद वह बम्बई चले गए। 1934 में कांग्रेस समाजवादी दल की स्थापना की थी। 

1936 में ‘समाजवाद क्यों नामक पुस्तक की रचना की। इस पुस्तक के माध्यम से वह प्रसिद्ध हो गए। अंग्रेज सरकार ने ‘षड़यन्त्री नम्बर एक’ घोषित करके 18 अक्टूबर, 1941 को इन्हें हजारीबाग जेल में डाल दिया। 1942 वह जेल से भाग गए इसके बाद उन्होंने गांधीजी के ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ में सक्रिय भाग लिया। Jayprakash Narayan Biography in Hindi

1943 में युवा समाजवादियों के द्वारा गोरिल्ला कार्यवाही से ब्रिटिश सम्पत्ति को हानि पहुंचाई। गांधी जी उन्हें कांग्रेस का अध्यक्ष बनाने का निर्णय लिया लेकिन पूर्ण बहुमत न मिलने के कारण वह कांग्रेस के अध्यक्ष नहीं बन सके। गांधी जी की मृत्यु के पश्चात राष्ट्रीय कांग्रेस और कांग्रेस समाजवादी दल में आपसी मतभेदों के कारण कांग्रेस समाजवादी दल के सभी नेताओं को बहार निकाल दिया गया।

1950 में जय प्रकाश नारायण ने ‘भारतीय समाजवादी दल’ की स्थापना की। 1952 में उन्होंने राजनीति छोड़कर बिनोबा जी के सर्वोदय तथा भू-दान आन्दोलन में भाग लिया। और अपना सम्पूर्ण जीवन सर्वोदय समाज की स्थापना में लगाने की शपथ ली। Jayprakash Narayan Biography in Hindi

 

आजादी के बाद (Jayprakash Narayan After Independence) :

आजादी के बाद कई सरकारों ने घोटाले और षड़यंत्र किए जिनसे देश और समाज का बहुत नुकसान हुआ। देश में महंगाई, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी व्याप्त थी। ऐसे समय में जय प्रकाश नारायण ने आगे आकर युवाओं के माध्यम से जनता को एकत्रित किया। उन्होंने कहा ये सारी समस्याएं तभी दूर हो सकती हैं। ‘जब सम्पूर्ण व्यवस्था बदल दी जाए और सम्पूर्ण व्यवस्था के परिवर्तन के लिए सम्पूर्ण क्रान्ति’ आवश्यक है।

उनके अहिंसावादी आंदोलन की सूरत को देखकर कुछ लोगों ने उन्हें आजाद भारत के गांधी की उपाधि दी थी। जयप्रकाश नारायण कांग्रेस के सहयोगी थे। लेकिन आजादी के लगभग दो दशक बाद आई इंदिरा गांधी सरकार के भ्रष्टव अलोकतांत्रिक तरीकों ने उन्हें कांग्रेस और इंदिरा के विरोध में खड़ा कर दिया। 

1975 में अदालत में इंदिरा गांधी पर चुनावों में भ्रष्टाचार का आरोप साबित हो गया। और जयप्रकाश ने विपक्ष को एकजुट कर उनके इस्तीफे की मांग की। इसके परिणामस्वरूप प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने राष्ट्रीय आपातकाल लागू कर दिया। और जयप्रकाश नारायण समेत हजारों विपक्षी नेताओं को गिरफ़्तार कर लिया।

1977 को इंदिरा गाँधी सरकार ने आपातकाल हटाने का फैसला किया। मार्च 1977 में चुनाव हुए और लोकनायक के “संपूर्ण क्रांति आदोलन” के चलते भारत में पहली बार गैर कांग्रेसी मोरारजी देसाई की सरकार बनी।

 

सम्मान (Jayprakash Narayan Get The Honor) :

  • 1965 में जन-कार्यों के लिए रमन मेग्नेसे पुरूस्कार से सम्मानित किया गया।
  • 1999 में सामजिक कार्यों के लिए उनको भारत का सर्वोच्च समान भारत रत्न भी दिया गया।

 

म्रुत्यु (Jayprakash Narayan Death) :

जयप्रकाश नारायण को मुंबई के जसलोक अस्पताल में जांच के बाद पता चला की उनकी किडनी ख़राब हो गयी थी। जिसके बाद वो डायलिसिस पर ही रहे। उनका निधन 8 अक्टूबर, 1979 को पटना में मधुमेह और ह्रदय रोग के कारण हो गया। Jayprakash Narayan Biography in Hindi

_

कहानी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर ज्वॉइन करें…

Leave A Reply