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कोचेरिल रमण नारायण की जीवनी | K R Narayanan Biography in Hindi

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K R Narayanan Biography in Hindi
K R Narayanan
नाम कोचेरिल रमण नारायण
जन्म 27 अक्टूबर 1920
जन्म स्थानपेरुमथॉनम उझावूर गाँव, जिला त्रावणकोर, केरल
पिताकोचेरिल रमण विद्यार
माता पुन्नाथठुरावीथी पप्पियाम्मा
पत्नीउषा नारायणन
पुत्रीचित्रा नारायणन; अमृता नारायणन
व्यवसायराजनीतिज्ञ
राजनैतिक पार्टी राष्ट्रीय कांग्रेस
नागरिकताभारतीय

 

राजनीतिज्ञ कोचेरिल रमण नारायण (K R Narayanan Biography in Hindi) :

कोचेरिल रमण नारायण भारत के दसवे राष्ट्रपति थे। 1992 में उनकी नियुक्ती देश के नौवे उपराष्ट्रपति के रूप में की गयी, फिर 1997 में नारायण देश के राष्ट्रपति बने थे। दलित समुदाय से राष्ट्रपति बनने वाले वे पहले और एकमात्र राजनेता थे। नारायण एक स्वतंत्र और मुखर राष्ट्रपति के नाम से प्रसिद्ध थे, जिन्होंने अपने कार्यो की बहुत सी मिसाल स्थापित कर रखी थी। Politician Kocheril Raman Narayan

 

प्रारंभिक जीवन (K R Narayanan Early Life) :

के आर नारायणन का जन्म 27 अक्टूबर 1920 को हुआ था। के आर नारायणन अपने पिता की सात संतानों में से चौथे थे। इनके पिता का नाम कॉचेरिल रामन वेद्यार था। यह भारतीय पद्धति के सिद्धहस्त आयुर्वेदाचार्य थे। इनका परिवार काफी ग़रीब था, लेकिन इनके पिता अपनी चिकित्सा इकाई प्रतिभा के कारण सम्मान के पात्र माने जाते थे। K R Narayanan Biography in Hindi

 

शिक्षा (K R Narayanan Education) :

कोचेरिल रमण नारायण ने कुरिचिथानाम की गवर्नमेंट लोअर प्राइमरी स्कूल से उन्होंने प्राथमिक शिक्षा ग्रहण की थी। कूथात्तुकुलम कुरविलंगद की सेंट जॉन हाई स्कूल से उन्होंने मेट्रिक की पढाई पूरी की। इसके बाद कोट्टायम के सी.एम.एस. कॉलेज से उन्होंने माध्यमिक पढाई पूरी की और त्रवंकोर शाही परिवार से उन्हें शिष्यवृत्ति भी मिली थी।

इसके बाद त्रवंकोर (वर्तमान केरला यूनिवर्सिटी) यूनिवर्सिटी से उन्होंने इंग्लिश साहित्य में बी.ए. और एम.ए. की उपाधि ग्रहण की, उस समय पूरी यूनिवर्सिटी से वे प्रथम स्थान पर आए थे। साथ ही त्रवंकोर में फर्स्ट क्लास में पास होकर इस डिग्री को हासिल करने वाले पहले दलित भी बने।

 

निजी जीवन (K R Narayanan Personal Life) :

बर्मा के रंगून में के.आर. नारायण मा टिंट टिंट से मिले, जिनसे उन्होंने दिल्ली में 8 जून 1951 को शादी कर ली। मा टिंट टिंट YWCA के सक्रीय सदस्य थे। भारतीय लॉ के अनुसार उनकी शादी को नेहरु से विशेष व्यवस्था चाहिए थी क्योकि नारायण उस समय आईएफएस में थे और वह फॉरेनर बनी। माँ टिंट टिंट ने इसके बाद उषा का नाम अपना लिया और भारतीय नागरिक बने।

उषा नारायण बहुत से सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों में महिलाओ और बच्चो के लिए काम करती थी और नयी फिल्ली की सामाजिक कार्य शाला से उन्होंने सोशल वर्क में मास्टरी भी कर रखी थी। उन्हें दो बेटियाँ भी है, चित्रा नारायण (स्विट्ज़रलैंड में भारतीय एम्बेसडर) और अमृता। K R Narayanan Biography in Hindi

 

व्यावसायिक करियर (K R Narayanan Professional Career) :

1944-45 में नारायण ने “The Hindu” and “The Times of India” में पत्रकार के रूप में कार्य किया। इस दौरान 10 अप्रैल 1945 में उन्होंने गांधीजी का इंटरव्यू भी लिया था। नारायण को हमेशा से विदेश जा कर पढाई करने का मन था उनकी आर्थिक स्थिति उसकी इजाजत नहीं देती थी। शिष्यवृत्ति का भी उस समय प्राबधान नहीं था, सो नारायण ने जेआरडी टाटा को एक चिठ्ठी लिख कर मदद मांगी।

नारायण इसके बाद इंग्लैंड चले गये और लन्दन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स में राजनीती विज्ञान का अभ्यास करने लगे। कार्ल पापर, लिओनेल रॉबिन्स और फ्राइडरिच हायेक के लेक्चर भी सुनते थे।

इसके बाद जे.आर.डी. टाटा द्वारा प्राप्त शिष्यवृत्ति से राजनीती विज्ञान में और अर्थशास्त्र में बीएससी की डिग्री हासिल की। लन्दन में बिताये हुए समय में, वे अपने सहयोगी के.एन. राज के साथ इंडियन लीग में सक्रीय थे। के.एम. मुंशी द्वारा प्रकाशित साप्ताहिक पत्रिका सामाजिक कल्याण में वे लन्दन के संवाददाता भी थे।

1948 में वे भारत लौट आए और उनके प्रोफेसर लास्की ने उन्हें जवाहर लाल नेहरू से मिलवाया। नेहरूजी ने उन्हें आईऍफ़एस की नौकरी दिलवाई, फिर के आर नारायण 1949 में बर्मा चले गए। इस दौरान 1954 में दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स में उन्होंने बच्चों को शिक्षा भी दी।

1978 में IFS के रूप में जब उनका कार्यकाल समाप्त हुआ, उसके बाद वे 1979 से 80 तक जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय में उपकुलपति रहे। इसके बाद 1980 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी जी ने उन्हें 1980 से 84 तक अमेरिका का भारतीय एम्बेसडर के लिए बना दिया।

 

राजनीतिक करियर (K R Narayanan Political Career) :

इंदिराजी जी के कहने पर 1984 में वे राजनीति में आ गए और 1984, 1989 और 1991 में केरला के पलक्कड़ की ओट्टापलम निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए कांग्रेस की सीट से लगातार तीन जनरल चुनाव जीते। साथ ही वे राजीव गाँधी की यूनियन कैबिनेट में राज्य के मिनिस्टर भी थे, जिन्होंने योजना (1985), एक्सटर्नल अफेयर (1985-86) और विज्ञान और तंत्रज्ञान (1986-89) जैसे विभाग में उन्होंने काम किया था।

संसद के सदस्य के रूप में, भारत में पेटेंट कण्ट्रोल पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव का उन्होंने विरोध किया था। लेकिन फिर 1991 में जब कांग्रेस के हातो में ताकत आयी थी तब नारायण को कैबिनेट में शामिल नही किया गया। केरला के कांग्रेस मुख्यमंत्री के. करुणाकरण उनके राजनीतिक सलाहकार ने उन्हें मिनिस्टर ना बनाने की वजह को बताते हुए उन्होंने नारायण को “कम्युनिस्ट साथी यात्री” बताया।

इसके बाद 21 अगस्त 1992 को शंकर दयाल शर्मा के राष्ट्रपति काल में उनकी नियुक्ती भारत के उप-राष्ट्रपति के रूप में की गयी। उनके नाम की सिफारिश भूतपूर्व प्रधानमंत्री और जनता दल ले लीडर वी.पी. सिंह ने की थी।

बाद में पी.वी नरसिम्हा राव की सहायता से बिना कीसी विरोध के उन्हें चुना गया था। लेकिन फिर बाद में नारायण और नरसिम्हा राव के रिश्तो की बाद करते हुए यह पता चला की उनमे कोई कम्युनिस्ट अंतर नही बल्कि वैचारिक अंतर था। लेकिन फिर भी नरसिम्हा उन्हें उपराष्ट्रपति बनने के लिए सहायता करते रहे। और बाद में राष्ट्रपति पद के लिए भी नरसिम्हा ने नारायण की काफी सहायता की थी। नरसिम्हा की सहायता से नारायण को काफी फायदा हुआ था, और बाद में सभी राजनेताओ ने उपराष्ट्रपति के रूप में उन्हें स्वीकारा था।

 

राष्ट्रपति बने (K R Narayanan as a President of India) :

17 जुलाई 1997 को के.आर. नारायण की नियुक्ती भारत के राष्ट्रपति के रूप में की गयी। देश का यह एकमात्र राष्ट्रपति चुनाव था जिसमे माइनॉरिटी सरकार को भी मत डालने का अधिकार था। टी.एन. सेशन एकमात्र उनके विरोधी उम्मेदवार थे और बाकी सभी पार्टियों ने उनके नाम का समर्थन किया था। राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान उन्होंने दलित, अल्पसंख्य एवं गरीबों के लिए बहुत कार्य किया। 2002 में के आर नारायण जी का कार्यकाल समाप्त हो गया।

 

पुस्तक (K R Narayanan Books) :

के. आर. नारायणन ने कुछ पुस्तकें भी लिखीं जिनमें,

  • ‘इण्डिया एण्ड अमेरिका एस्सेस इन अंडरस्टैडिंग’ (‘India and America Essays in Understanding’) 
  • ‘इमेजेस एण्ड इनसाइट्स‘ (‘Images and insights’) 
  • ‘नॉन अलाइमेंट इन कन्टैम्परेरी इंटरनेशनल निलेशंस‘ (‘Non allocation in Contemporary International elections’) 

 

पुरस्कार (K R Narayanan Awards) :

  • 1998 में इन्हें ‘द अपील ऑफ़ कॉनसाइंस फ़ाउंडेशन’, न्यूयार्क द्वारा ‘वर्ल्ड स्टेट्समैन अवार्ड’ दिया गया।
  • ‘टोलेडो विश्वविद्यालय’, अमेरिका ने इन्हें ‘डॉक्टर ऑफ़ साइंस’ की तथा ‘आस्ट्रेलिया विश्वविद्यालय’ ने ‘डॉक्टर ऑफ़ लॉस’ की उपाधि दी।
  • इसी प्रकार से राजनीति विज्ञान में इन्हें डॉक्टरेट की उपाधि तुर्की और सेन कार्लोस विश्वविद्यालय द्वारा प्रदान की गई।

 

मृत्यु (K R Narayanan Death) : 

9 नवम्बर, 2005 को आर्मी रिसर्च एण्ड रैफरल हॉस्पिटल, नई दिल्ली में उनका निधन निमोनिया बीमारी के कारण हो गया। दिल्ली में जवाहर लाल नेहरु के शांति वन के बाजु में इनका समाधी स्थल बनाया गया, जिसे एकता स्थल कहते है।

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