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लार्ड माउंटबेटन की जीवनी | Lord Mountbatten Biography in Hindi

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Mountbatten Biography in Hindi
Lord Mountbatten
नाम लॉर्ड लुई माउंटबेटन
जन्म  25 जून 1900
जन्म स्थान विंडसर, बर्कशायर, इंग्लैंड
पिता प्रिंस लुईस की बैटनबर्ग
माता राजकुमारी विक्टोरिया और राइन एडविना
पत्नी एडविना माउंटबेटन
पुत्री पेट्रीसिया नेकबुल
व्यवसाय भारत के गवर्नर जनरल
नागरिकता ब्रिटिश

 

भारत के अंतिम वाइसराय और पहले गवर्नर जनरल लार्ड माउंटबेटन (Lord Mountbatten Biography in Hindi) :

लुईस फ्रांसिस एल्बर्ट विक्टर निकोलस माउंटबेटन ब्रिटिश नेवल ऑफिसर है। उन्हें जीवन में राईट ऑनरेबल दी विस्काउंट माउंटबेटन ऑफ़ बर्मा और दी अर्ल माउंटबेटन ऑफ़ बर्मा के टाइटल्स भी मिले थे, लेकिन अनौपचारिक रूप से उन्हें लार्ड माउंटबेटन के नाम से जाना जाता हैं। Indian Last Viceroy and The First Governor General Mountbatten

 

प्रारंभिक जीवन (Lord Mountbatten Early Life) :

जनरल माउंटबेटन का जन्म 25 जून 1900 को विंडसर, बर्कशायर, इंग्लैंड में हुआ था। माउंटबेटन अपने जन्म के समय से ही उनकी पहचान बेटनबर्ग के हाइनेस प्रिंस के तौर पर थी। उनकी परवरिश विंडसर में एक बहुत बड़े परिवार में हुयी थी, उनके जन्म के समय क्वीन विक्टोरिया का शासन था और वो सेंट पीटर्सबर्ग में रशिया के इम्पीरियल कोर्ट जाती रहती थी, इस कारण वो और उनका परिवार रशिया इम्पिरीयल परिवार के करीबी था।

 

शिक्षा (Lord Mountbatten Education) :

माउंटबेटन ने अपने जीवन के पहले 10 वर्षों की प्रारम्भिक शिक्षा घर पर ही ली थी, उसके बाद उन्हें हेर्टफोर्डशायर के लाकर्स पार्क स्कूल भेजा गया इसके बाद 1913 में उन्होंने रॉयल नेवी कॉलेज, ओस्बोर्न से आगे की पढ़ाई की। First Governor General of India

 

शादी (Lord Mountbatten Marriage) :

माउंटबेटन ने 18 जुलाई 1922 को एडविन से विवाह किया, 2 वर्ष बाद उनके पहली बेटी पेट्रीसिया का जन्म हुआ। और 7 वर्षों बाद पामेला का जन्म हुआ। किन एलिजाबेथ बायोग्राफी लिखने वाले ने अपनी किताब “दी रॉयल सिस्टर्स” में लिखा था कि माउंटबेटन को बच्चों का बेहद शौक था। वो एक समर्पित पिता थे।

 

करियर (Lord Mountbatten Career) :

माउंटबेटन ने 1916 में रॉयल नेवी जॉइन किया, उन्होंने एचएमएस-लायन और एचएमएस एलिजाबेथ नाम के बोर्ड पर सेवाएं दी। उस समय ही बेटनबर्ग की अपने कजिन डेविड से दोस्ती हुयी, जो कि भविष्य में किंग एडवर्ड बने।

1919 में प्रथम विश्व युद्ध समाप्त होने पर माउंटबेटन को सब-लेफ्टिनेंट बना दिया गया, और उन्होंने कैंब्रिज के क्राइस्ट कॉलेज से इंजीनियरिंग का कोर्स किया। 1920 में उनके कठोर परिश्रम और योग्यता को दखते हुए उन्हें प्रमोट करके लेफ्टिनेंट बना दिया गया, और एएचएमएस रीनाउन के युद्ध में भेजा गया, इसके अगले वर्ष उनका ट्रांसफर एएचएमएस रिपल्स में किया गया और प्रिंस एडवर्ड के साथ भारत और जापान की यात्रा पर भेजा गया।

नेवी में अपने करियर के बावजूद भी माउंटबेटन ने अपनी पढाई में कोई समझौता नहीं किया। उन्होंने 1924 में पोर्ट्समाउथ सिग्नल स्कूल में टेक्नोलोजीकल डेवेलपमेंट और गैजेट की शिक्षा ली। उसके बाद उन्होंने रॉयल नेवी कॉलेज, ग्रीनविच इसके अलावा माउंटबेटन ने इंस्टीट्यूशन ऑफ़ इलेक्ट्रिकल इंजिनियर्स की सदस्यता भी ले ली। 2 वर्षों बाद उन्हें लेफ्टिनेंट-कमान्डर की पोस्ट पर प्रोमोशन मिल गया।

1932 में उन्हें कमांडर बनाया गया और एचएमएस रिजोल्यूशन के बेटलशिप में भी पोस्ट किया गया। 1934 में माउंटबेटन की पहली कमांडर की पोस्टिंग एचएमएस डेयरिंग को खत्म करने के लिए हुयी थी। 1937 में उन्हें कैप्टेन के पद पर प्रोमोशन मिल गया।

 

द्वितीय विश्व युद्ध में माउंटबेटन (Lord Mountbatten in World War 2) :

जून 1939 में माउंटबेटन को केली नाम के रणपोत की कमांड दी गयी थी। दुसरे विश्व युद्ध के दौरान एचएमएस केली के कमांडर रहते हुए उन्होंने कई साहसी और सफल ओपरेशन किये। वो नॉर्वेजियन कैंपेन का हिस्सा भी थे, युद्ध में केली ने काफी हमले सहे और 23 मई 1941 को क्रेट के कोस्ट पर जर्मन बमबारी में पूरी तरह से पानी में डूब गया।

1941 में माउंटबेटन को एयरक्राफ्ट करियर एचएमएस इल्यूस्ट्रियस का केप्टन नियुक्त किया गया। वो विंस्टन चर्चिल के पसंदीदा व्यक्ति थे इसलिए उन्हें जीवन में जल्दी सफलता मिली और कई महत्वपूर्ण पोस्ट और रैंक पर मियुक्ति भी मिली। Lord Mountbatten Biography in Hindi

अक्टूबर 1941 में माउंटबेटन ने कम्बाइनड ऑपरेशनस के चीफ रोगेर केएस को रिप्लेस कर दिया, और उन्हें कमान्डर के पद पर प्रोमोशन मिल गया। उनकी करियर प्रोफाइल में इंग्लिश चैनल में कमांडो के छापे की प्लानिंग और लैंडिंग के विरोध में नये तकनीकों के उपयोग भी शामिल हैं।

1942 में माउंटबेटन की डीएपी के छापे में महत्वपूर्ण भूमिका थी, जिसके कारण बहुत जनहानि हुयी थी और इस घटना ने माउंटबेटन को विवादो में फंसा दिया था। इस हार के अलावा माउंटबेटन ने कई तकनीकी सफलतायें हासिल की थी, जिसमें इंग्लिश कोस्ट से लेकर नोर्मंडी तक अंडरवाटर आयल पाईपलाइन का निर्माण, कंक्रीट, बारूद पेटी और डूबे हुए जहाजों से कृत्रिम बंदरगाह बनाया, एम्फीबियस टैंक-लैंडिंग शिप का विकास भी किया।

1943 में चर्चिल और रूजवेल्ट ने माउंटबेटन के नाम का प्रस्ताव सुप्रीम एलायड कमांडर फॉर साउथ एशिया के लिए दिया और उन्हें सुप्रीम एलायड कमांडर साउथ ईस्ट एशिया कमांड नियुक्त किया गया। जनरल विलियम स्लिम के साथ काम करते हुए माउंटबेटन ने बर्मा ऑर सिंगापुर को जापानीयों से वापिस लेने की कोशिश की।

1945 में माउंटबेटन ने सिंगापुर में जापानियों का आत्म-समपर्ण स्वीकार किया। 1946 में एसइएसी की सेना को भंग कर दिया गया। जिसके बाद माउंटबेटन रियर एडमायरल रैंक के साथ घर लौट आये। Lord Mountbatten Biography in Hindi

 

माउंटबेटन द्वारा भारत में किये गये कार्य (Lord Mountbatten Work in India) :

ब्रिटिश सरकार ने माउंटबेटन को भारत में अंग्रेजों की छवि को कम नुकसान के साथ सत्ता हस्तांतरित करने के लिए भेजा था। माउंटबेटन ने शुरू में ये कोशिश की थी कि भारत-पाकिस्तान का विभाजन न हो लेकिन मोहम्मद अली जिन्ना के इरादे अटल थे, इसलिए माउंटबेटन इस दिशा में ज्यादा कुछ कर नहीं सके। भारत और पाकिस्तान के विभाजन में माउंटबेटन ने मध्यस्थता निभाई थी।

माउंटबेटन के लिए दोनों देशों के स्वतंत्रता दिवस के सम्मेलन में शामिल होना जरुरी था। इसलिए उसने पाकिस्तान और भारत के लिए क्रमश: 14 और 15 अगस्त की तिथियाँ स्वतंत्रता दिवस के लिए निश्चित की। जबकि दोनों देशों को स्वतंत्रता मध्य रात्रि में मिली थी। जहां बहुत से ब्रिटिश ऑफिसर्स भारत छोड़कर चले गए वही माउंटबेटन यही नई दिल्ली में रुके रहे, इसके बाद माउंटबेटन ने अगले 10 महीनों तक जून 1948 तक भारत के गवर्नर जनरल का पद संभाला।

 

भारत की स्वतंत्रता के बाद माउंटबेटन (Lord Mountbatten After Independence of India) :

1949 में माउंटबेटन ने वापिस नेवी की सर्विस जॉइन कर ली, उन्होंने मेडीटेरेनियन फ्लीट में कमांडर ऑफ़ दी फर्स्ट क्रूजर स्क्वेड्रन के तौर पर सेवाएं दी, इसके बाद अप्रैल 1950 में ही मेडीटेरेनियन फ्लीट में वो सेकंड-इन-कमांड पर प्रोमोट हो गये। 1952 में उन्हें मेडीटेरेनियन फ्लीट का कमांडर इन-चीफ बनाया गया और बाद में उन्हें एडमाईरल के पद पर प्रोमोट किया गया। Last Viceroy of India

1955 से 1959 तक माउंटबेटन ने प्रथम सी लार्ड और एदमाईरेलिटी के नेवल स्टाफ के चीफ के तौर पर काम किया। 1959 से 1965 तक यूनाइटेड किंगडम डिफेन्स स्टाफ के चीफ और स्टाफ कमिटी के सभी चीफ के चेयरमेन का कार्य किया, माउंटबेटन मिलिट्री के तीन ब्रांच को एक ही रक्षा विभाग से सम्भालने के लिए सक्षम थे। Lord Mountbatten Biography in Hindi

1965 में माउंटबेटन इज्ले ऑफ़ वाईट के गवर्नर जनरल बने और 1974 में लार्ड लेफ्टिनेंट पद पर रहे। इसके अलावा 1967 से 1978 तक माउंटबेटन ने यूनाइटेड वर्ल्ड कॉलेज आर्गेनाईजेशन के प्रेजीडेंट के तौर पर भी काम किया।

 

क्यों माउंटबेटन को भारत से लगाव था (Why Mountbatten Loves to India?) :

भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के साथ माउंटबेटन के दोस्ताना संबंध हमेशा याद किए जाते रहे। नेहरू ने उनसे भारत के गवर्नर जनरल के पद पर बने रहने के लिए भी आग्रह किया था। माउंटबेटन महात्मा गांधी से हमेशा प्रेरित हुआ करते थे। सरदार पटेल की राजनीतिक विचार से वो बहुत प्रभावित हुए थे।

इंदिरा गांधी ने कहा था : गवर्नर जनरल रहते हुए उन्होंने उस समय की पेचीदा परिस्थितियों को लेकर पूरी संवेदना और समझ दिखाई थी। उनकी यही खूबी मेरे पिता के साथ, हमारे परिवार के साथ और कई भारतीय नेताओं के साथ उनकी दोस्ती की वजह थी।

तत्कालीन राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी ने माउंटबेटन की मौत पर शोक व्यक्त किया था। वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने कहा था ‘मेरा सौभाग्य रहा कि मैंने उन्हें व्यक्तिगत तौर पर जाना और मैं उनके साहस और बुद्धिमत्ता का हमेशा कायल रहा। 

 

मृत्यु (Lord Mountbatten Death) :

1979 में माउंटबेटन जब स्लीगो देश के मुल्लागमोर में गर्मियों की छुट्टियां मना रहे थे। 27 अगस्त की रात को आयरलैंड के नार्थवेस्ट कोस्ट पर उनके फिशिंग बोट में रेडियो कंट्रोल्ड में बम लगा दिया गया, जिससे जब माउंटबेटन, उनकी बेटी, बेटी का पति और उसकी माँ और जुड़वाँ दोहिते जब बोट पर बैठे तो बोट को उड़ा दिया गया, जिससे माउंटबेटन और उनके दोहिते की तुरंत मृत्यु हो गयी।

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