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माखनलाल चतुर्वेदी की जीवनी | Makhanlal Chaturvedi Biography in Hindi

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Makhanlal Chaturvedi Biography in Hindi
Makhanlal Chaturvedi
नाम माखनलाल चतुर्वेदी
जन्म4 अप्रैल 1889
जन्मस्थानहोशंगाबाद, मध्य प्रदेश
पितानंदलाल
मातासुंदरीबाई
पत्नी ग्यारसी बाई
व्यवसायपत्रकारिता, राष्ट्रीय कवि
पुरस्कारहिमकिरीटनी पर देव पुरस्कार
नागरिकताभारतीय

 

लेखक माखनलाल चतुर्वेदी (Makhanlal Chaturvedi Biography in Hindi) :

माखनलाल चतुर्वेदी भारत के राष्ट्रीय कवि, लेखक और पत्रकार थे जिनकी रचनाएँ अत्यंत लोकप्रिय हुईं। सरल भाषा और ओजपूर्ण भावनाओं के वे अनूठे हिंदी रचनाकार थे। प्रभा और कर्मवीर जैसे प्रतिष्ठत पत्रों के संपादक के रूप में उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ जोरदार प्रचार किया और नई पीढी का आह्वान किया कि वह गुलामी की जंज़ीरों को तोड़ कर बाहर आए। इसके लिये उन्हें अनेक बार ब्रिटिश साम्राज्य का कोपभाजन बनना पड़ा। वे सच्चे देशप्रमी थे और 1921-22 के असहयोग आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेते हुए जेल भी गए। Litterateur Makhanlal Chaturvedi

 

प्रारंभिक जीवन (Makhanlal Chaturvediji Early Life) :

माखनलाल चतुर्वेदी का जन्म 04 अप्रैल 1889 को मध्य प्रदेश के होशंगाबाद में हुआ था। उनके पिता का नाम नंद लाल चतुर्वेदी और उनकी माता का नाम सुंदरी बाई था। माखनलाल जब 16 वर्ष के हुए तब ही स्कूल में अध्यापक बन गए थे। उन्होंने 1906 से 1910 तक एक विद्यालय में अध्यापन का  कार्य किया। लेकिन जल्द ही माखनलाल ने अपने जीवन और लेखन कौशल का उपयोग  देश की स्वतंत्रता के लिए करने का निर्णय ले लिया। Makhanlal Chaturvedi Biography in Hindi

 

शिक्षा और शादी (Makhanlal Chaturvediji Education and Marriage) :

माखनलाल चतुर्वेदी ने अपने प्रारंभिक प्राथमिक शिक्षा गांव के स्कूल से ही प्राप्त की।  इसके बाद में उन्होंने संस्कृत, बंगला, अंग्रेजी, गुजराती आदि कई भाषाओं का ज्ञान घर से प्राप्त किया। नौकरी मिलने से पहले ही इनके पिता 14 साल के माखनलाल का विवाह 9 साल की उम्र में करवा दिया। उनकी पत्नी का नाम ग्यारसी बाई था। करीब 10-11 साल साथ निभाने के बाद उनकी मृत्यु हो गयी। उनकी एक बेटी भी हुई थी जो जन्म के कुछ ही साल बाद चल बसी थी। उस समय माखनलाल चतुर्वेदी सिर्फ 25 वर्ष के थे। इसके बाद सारी उम्र उन्होंनें अकेले सफर तय किया। शब्दों से रिश्ता बनाया और आजादी की लड़ाई में कूद पड़े।

 

स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान (Makhanlal Chaturvediji Contribution to Freedom Fight) :

लोकमान्य तिलक का नारा “स्वतंत्रता हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है” को माखनलाल चतुर्वेदी जी ने अपने जीवन का आदर्श बना लिया था। दक्षिण अफ्रीका में महात्मा गांधी ने सफलतापूर्वक सत्याग्रह किया था। गणेश शंकर विद्दार्थी कानपुर से “प्रताप” नामक समाचार पत्र निकालते थे जिसका सम्पादन का कार्य भी माखनलाल जी ने शुरू कर दिया। 

माखनलाल चतुर्वेदी ने 1986 से 1910 तक विद्यालय में अध्यापन का कार्य किया। लेकिन जल्द ही माखनलाल ने अपने जीवन और लेखन कौशल का उपयोग देश कीस्वतन्त्रता के लिए करने का निर्णय ले लिया। उन्होंने असहयोग आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन जैसी गतिविधियों में बढ़- चढ़ भाग लिया। जिसके चलते वे कई बार जेल गए और जेल में भी कई अत्याचारों को सहना पड़ा। लेकिन अंग्रेज उन्हे कभी भी अपने पथ से विचलित नहीं कर सके।

1920 में महात्मा गांधी ने “असहयोग आंदोलन” शुरू किया जिसमे पहली गिरफ्तारी माखनलाल चतुर्वेदी ने दी। 1930 में “सविनय अवज्ञा आंदोलन” में पहली गिरफ्तारी दी।

 

संपादन कार्य (Makhanlal Chaturvediji As a Journalism) :

1910 में अध्यापन कार्य छोड़ने के बाद माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रिकाओं में संपादक का रूप के रूप में काम करने लगे और उन्होंने “प्रभा” और “कर्मवीर” नाम के राष्ट्रीय पत्रिकाओं में संपादन का कार्य किया। Makhanlal Chaturvedi Biography in Hindi

पंडित जी ने अपने लेखन शैली से देश के एक बहुत बड़े हिस्से में देश प्रेम की भावना को जागृत किया उनके भाषण भी उनके लेखों की तरह ही शक्ति पूर्ण और देश प्रेम से ओत-प्रोत होते थे। माखनलाल चतुर्वेदी 1943 में ‘अखिल भारतीय साहित्य सम्मेलन’ की अध्यक्षता की। उनकी कई रचनाएं देश के युवाओं में जोश भरने जागृत करने के लिए सहायक है।

 

हिंदी साहित्य में योगदान (Makhanlal Chaturvediji Contribution to Hindi Literature) :

  • कृष्णार्जुन युद्ध (1918)
  • हिमकिरीटिनी (1941)
  • साहित्य देवता (1942)
  • हिमतरंगिनी
  • माता (1952)
  • युगचरण

 

कविताएं (Makhanlal Chaturvediji Poems) :

  •  अमर राष्ट्र
  • अंजलि के फूल गिर जाते हैं
  • आज नयन के बंगले में
  • इस तरह ढक्कन लगाया रात ने
  • उस प्रभात तू बात ना माने
  • किरणों की शाला बंद हो गई छुप-छुप
  • कुंज कुटीरे यमुना तीरे
  • गाली में गरिमा  घोल-घोल
  • भाई-छेड़ो नहीं मुझे मधुर मधुर कुछ गां दो मालिक
  • संध्या के बस दो बोल सुहाने लगते हैं

 

उपलब्धियां (Makhanlal Chaturvediji Achievements) :

  • अध्यापन कार्य प्रारंभ (1996)
  • शिक्षण पद का त्याग
  • तिलक का अनुसरण (1910)
  • शक्ति पूजा लेकर राजद्रोह का आरोप (1912)
  • प्रभा मासिक का संपादन (1913)
  • कर्मवीर से सम्बद्ध (1920)
  • प्रताप का सम्पादन कार्य प्रारंभ (1923)
  • पत्रकार परिषद के अध्यक्ष(1929)
  • भारत छोड़ो आंदोलन के सक्रिय कार्यकर्ता (1942)

 

पुरस्कार और सम्मान (Makhanlal Chaturvediji Awards) :

  • 1943 में उस समय का हिंदी साहित्य का सबसे बड़ा ‘देव पुरस्कार माखनलालजी  ‘हिम किरीटिनी’ पर दिया गया था
  • 1954 में साहित्य अकादमी पुरस्कारों की स्थापना होने पर हिन्दी साहित्य के लिए प्रथम पुरस्कार पंडित जी को ‘हिमतरंगिनी’ के लिए प्रदान किया गया।
  • 1959 मे पुष्प की अभिलाषा’ और ‘अमर राष्ट्र’ जैसी ओजस्वी रचनाओं के रचयिता इस महाकवि के कृतित्व को सागर विश्वविद्यालय ने विभूषित किया।
  • 1963 में भारत सरकार ने ‘पद्मभूषण’ से अलंकृत किया।
  • भोपाल का ‘माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय’ उन्हीं के नाम पर स्थापित किया गया है।
  • 1955 में उनके काव्य संग्रह ‘हिमतरंगिणी’ के लिये उन्हें हिन्दी के ‘साहित्य अकादमी पुरस्कार’ से सम्मानित किया।

 

मृत्यु (Makhanlal Chaturvediji Death) :

माखनलाल चतुर्वेदी की 79 वर्ष की उम्र में 30 जनवरी 1968 को मृत्यु हो गई। Makhanlal Chaturvedi Biography in Hindi

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