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मदर टेरेसा की जीवनी | Mother Teresa Biography in Hindi

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Mother Teresa Biography in Hindi
Mother Teresa
पूरा नाम अग्नेसे गोंकशी बोंजशियु
जन्म  27 अगस्त, 1910
जन्मस्थान युगोस्लाविया
पितानिकोले बोजाक्सिउ
माताड्रैनाफिले बोजाक्सिहु
पुरस्कारनोबेल शांति पुरस्कार, भारत रत्न
राष्ट्रीयताओटोमन, भारतीय, यूगोस्लाविया

 

महान आत्मा मदर टेरेसा (Mother Teresa Biography in Hindi) :

मदर टेरेसा ऐसा नाम है, जिसका स्मरण होते ही हमारा ह्रदय श्रध्धा से भर उठता है, और चेहरे पर एक ख़ास आभा उमड़ जाती है। मदर टेरेसा एक ऐसी महान आत्मा थीं, जिनका ह्रदय संसार के तमाम दीन-दरिद्र, बीमार, असहाय और गरीबों के लिए धड़कता था। और इसी कारण उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन उनके सेवा और भलाई में लगा दिया। जिन्होंने छोटी सी उम्र में ही गरीबों, दरिद्रों और असहायों की जिन्दगी में प्यार की खुशबू भर दी थी। Great Saint Mother Teresa

 

प्रारंभिक जीवन  (Mother Teresa Early Life ) :

मदर टेरेसा का जन्म 26 अगस्त, 1910 को स्कॉप्जे (मसेदोनिया) में हुआ। उनके पिता निकोला बोयाजू एक साधारण व्यवसायी थे। मदर टेरेसा का वास्तविक नाम ‘अगनेस गोंझा बोयाजिजू’ था। जब वह मात्र 8 साल की थीं, तभी उनके पिता परलोक सिधार गए, जिसके बाद उनके लालन-पालन की सारी जिम्मेदारी उनकी माता द्राना बोयाजू के ऊपर आ गयी। वह 5 भाई-बहनों में सबसे छोटी थीं। उनके जन्म के समय उनकी बड़ी बहन की उम्र 7 साल और भाई की उम्र 2 साल थी, बाकी दो बच्चे बचपन में ही गुजर गए थे।

 

शिक्षा (Mother Teresa Education) :

मदर टेरेसा एक सुन्दर अध्ययनशील और परिश्रमी लड़की थीं। पढ़ाई के साथ-साथ, उन्हे गाना बेहद पसंद था। टेरेसा और उनकी बहन पास के गिरजाघर में मुख्य गायिकाएँ थीं। ऐसा माना जाता है, कि जब वे 12 साल की थीं, तभी उन्हे ये अनुभव हो गया था, कि वो अपना सारा जीवन मानव सेवा में लगायेंगी, और 18 साल की उम्र में उन्होने ‘सिस्टर्स ऑफ़ लोरेटो’ में शामिल होने का फैसला ले लिया। इसके बाद में वे आयरलैंड गयीं, जहाँ उन्होने अंग्रेजी भाषा सीखी। Mother Teresa Biography in Hindi

 

करियर (Mother Teresa Starting Career) :

मदर टेरेसा अपने इंस्टीट्यूट की अन्य नन के साथ 1929 में भारत के दार्जलिंग शहर आयी, जहां उन्होंने नन के रुप में अपनी पहली धार्मिक प्रतिज्ञा ली। इसके बाद उन्हें कलकत्ता में एक शिक्षिका के तौर पर भेजा गया। कलकत्ता में डबलिन की सिस्टर लोरेंटो ने संत मैरी स्कूल की स्थापना की थी, जहां मदर टेरेसा गरीब और असहाय बच्चों को पढ़ाती थी, दरअसल मदर टेरेसा की हिन्दी और बंगाली दोनों भाषा में अच्छी पकड़ थी।

वहीं वे शुरुआत से ही बेहद परिश्रमी थी। इसलिए उन्होंने अपना यह काम भी पूरी ईमानदारी और निष्ठा पूर्वक किया, और वे बच्चों की प्रिय शिक्षिका भी बन गईं थी। इसी दौरान उनका ध्यान उनके-आस-पास फैली गरीबी, बीमारी, लाचारी, अशिक्षा और अज्ञानता पर गया, जिसे देखकर वे बेहद दुखी हुईं।

यह वह दौर था, जब अकाल की वजह से कलकत्ता शहर में बड़ी संख्या में मौते हो रही थीं, और गरीबी के कारण लोगों की हालत बेहद खऱाब हो गई थी। जिसे देखकर मदर टेरेसा ने गरीब, असहाय, बीमार और जरुरतमंदों की सेवा करने का प्रण लिया। Mother Teresa Biography in Hindi

 

सामाजिक कार्य (Mother Teresa Social Work) :

उन्होंने गरीबों, असहायों, बीमारों और लाचारों की जीवनपर्यांत मदद करने का मन बना लिया। इसके बाद मदर टेरेसा ने पटना के होली फॅमिली हॉस्पिटल से आवश्यक नर्सिग ट्रेनिंग पूरी की और वापस कोलकाता आ गईं, और वहां से पहली बार तालतला गई, जहां वह गरीब बुजुर्गो की देखभाल करने वाली संस्था के साथ रहीं। उन्होंने मरीजों के घावों को धोया, उनकी मरहमपट्टी की और उनको दवाइयां दीं।

उन्होंने अपने कार्य से लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। इन लोगों में देश के उच्च अधिकारी और भारत के प्रधानमंत्री भी शामिल थे, जिन्होंने उनके कार्यों की सराहना की। उन्होंने यहाँ बेसहारा और विकलांग बच्चों तथा सड़क के किनारे पड़े, असहाय रोगियों की दयनीय स्थिति को अपनी आँखों से देखा और फिर वे भारत से मुँह मोड़ने का साहस नहीं कर सकीं। वे यहीं पर रुक गईं, और जनसेवा का व्रत ले लिया, जिसका वे अनवरत पालन करती रहीं। Mother Teresa Biography in Hindi

मदर टेरेसा ने भ्रूण हत्या के विरोध में सारे विश्व में अपना रोष दर्शाते हुए, अनाथ और अवैध संतानों को अपनाकर मातृत्व-सुख प्रदान किया। उन्होंने फुटपाथों पर पड़े हुए रोत-सिसकते रोगी अथवा मरणासन्न असहाय व्यक्तियों को उठाया और अपने सेवा केन्द्रों में उनका उपचार कर स्वस्थ बनाया, या कम से कम उनके अन्तिम समय को शान्तिपूर्ण बना दिया। दुखी मानवता की सेवा ही उनके जीवन का व्रत है।

 

विवाद (Mother Teresa Controversy) :

कहते है, सफलता जहाँ होती है, विवाद उसके पीछे पीछे चले आते है, मदर टेरेसा के जीवन और काम को विवादों के घेरे में ला खड़ा किया। मदर टेरेसा के इस निस्वार्थ भाव की दया प्रेम को भी लोग गलत समझने लगे और उन पर आरोप लगाया गया, कि वे भारत में लोगों का धर्म परिवर्तन करने की नियत से सेवा करती है। लोग उन्हें अच्छा इन्सान न समझकर, इसाई धर्म का प्रचारक समझते थे। इस सब बातों से उपर मदर टेरेसा अपने कामों की ओर ही ध्यान लगाती थी। लोगों की बातों में न ध्यान देते हुए उन्होंने अपने काम को ज्यादा तवच्चो दी।

 

पुरस्कार और सम्मान (Mother Teresa The Honors) :

  • 1962 में मदर टेरेसा को भारत सरकार द्वारा ‘पद्म श्री’ से सम्मानित किया गया।
  • 1969 में मदर टेरेसा को अंतर्राष्ट्रीय समझ के लिए जवाहरलाल नेहरू पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
  • 1979 में ‘नोबेल शांति पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।
  • 1980 में भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया था।

 

मृत्यु (Mother Teresa Death) :

मदर टेरेसा को कई सालों से किडनी की परेशानी थी, 1989 में दिल का दौरा आया, और उनकी हालात बिगड़ती चली गई। 5 सितम्बर, 1997 को मदर टेरेसा की कलकत्ता में उनकी मृत्यु हुई थी।

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