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नीलम संजीव रेड्डी की जीवनी | Neelam Sanjiva Reddy Biography in Hindi

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Neelam Sanjiva Reddy Biography in Hindi
Neelam Sanjiva Reddy
नाम नीलम संजीवा रेड्डी
जन्म 19 मई 1913
जन्मस्थानअनंतपुर, आंध्रप्रदेश
पिता नीलम चिनप्पा रेड्डी 
पत्नी नीलम नागरत्नम्मा
व्यवसायराजनीतिज्ञ
राजनैतिक पार्टीजनता पार्टी
नागरिकताभारतीय

 

भारतीय राजनीतिज्ञ नीलम संजीव रेड्डी (Neelam Sanjiva Reddy Biography in Hindi) :

नीलम संजीव रेड्डी एक भारतीय राजनेता और देश के छठे राष्ट्रपति थे। राष्ट्रपति बनने से पहले उन्होंने कई महत्वपूर्ण राजनैतिक पदों पर कार्य किया। इनमें प्रमुख हैं। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री, दो बार लोक सभा के अध्यक्ष और केन्द्रीय मंत्रिमंडल में मंत्री। स्वाधीनता आन्दोलन के दौरान भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस से अपना कैरियर प्रारंभ करने वाले नीलम संजीव रेड्डी सबसे कम उम्र में भारत का राष्ट्रपति बनने वाले व्यक्ति बन गए। Indian Politician Neelam Sanjeeva Reddy

 

प्रारंभिक जीवन (Neelam Sanjeeva Reddy Early Life) :

रेड्डी का जन्म 19 मई 1913 को मद्रास प्रेसीडेंसी के इल्लूर ग्राम में तेलगु परिवार में हुआ था।

 

शिक्षा (Neelam Sanjeeva Reddy Education) :

रेड्डी ने अपनी प्राथमिक शिक्षा अदायर में पूरी की और फिर अनंतपुर के सरकारी आर्ट कॉलेज में वे दाखिल हुए। यह कॉलेज मद्रास यूनिवर्सिटी से ही जुड़ा हुआ था। 1958 में तिरुपति की श्री वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी से उन्होंने डॉक्टर ऑफ़ लॉ की उपाधि हासिल की थी।

 

शादी (Neelam Sanjeeva Reddy Marriage) :

रेड्डी ने अपनी शादी नीलम नगरत्नाम्मा से कर ली। उनका एक बेटा और तीन बेटियाँ भी है। 

 

स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका (Neelam Sanjeeva Reddy Role in Freedom Struggle) :

1929 में उनके जीवन में एक नया मोड़ आया जब स्वाधीनता आन्दोलन के दौरान महात्मा गाँधी ने अनंतपुर का दौरा किया और स्वतंत्रता अभियान में शामिल हो गये। महात्मा गाँधी की बातों से प्रभावित होकर उन्होंने अपनी पढाई सन 1931 में छोड़ दिया और स्वतंत्रता आन्दोलन में कूद पड़े। यूथ लीग से वे करीबी रूप से जुड़े हुए थे और विद्यार्थी सत्याग्रह में भी उन्होंने भाग ले रखा था।

1938 में 25 वर्ष की एक छोटी उम्र में उनको आंध्र प्रदेश प्रांतीय कांग्रेस समिति का सचिव चुना गया। इस पद पर नीलम संजीव रेड्डी दस साल तक बने रहे। भारत छोडो अभियान के समय उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। मार्च 1942 में जेल से रिहा होने के बाद दोबारा अगस्त में उन्हें गिरफ्तार किया गया और अमरावती जेल में भेजा गया, जहाँ क्रांतिकारी टी. प्रकाशम्, एस. सत्यमूर्ति, के. कामराज और वी.वी. गिरी के साथ वे 1945 तक रहे।

 

राजनीतिक करियर (Neelam Sanjeeva Reddy Political Career) :

1946 में वे मद्रास विधान सभा के लिए चुने गए और कांग्रेस विधायक दल के सचिव बनाये गए। बाद में उन्हें मद्रास से ‘भारतीय संविधान सभा’ का सदस्य बनाया गया। 1949 से 1951 तक वो मद्रास राज्य में आवास, वन और निषेध मंत्री रहे। सन 1951 में वो मद्रास विधान सभा का चुनाव हार गए। 1951 में एन. जी. रंगा को हराकर वो आंध्र प्रदेश कांग्रेस समिति का अध्यक्ष बन गए।

1953 में आंध्र प्रदेश की स्थापना हुई तब टी. प्रकाशम् मुख्यमंत्री और नीलम संजीव रेड्डी उप-मुख्यमंत्री बने। Neelam Sanjiva Reddy Biography in Hindi

1956 में आंध्र प्रदेश के एक नए राज्य की घोषणा पर, रेड्डी उसी वर्ष अक्टूबर में पहले मुख्यमंत्री बने। बाद में जब तेलेंगाना को आंध्र प्रदेश में शामिल किया गया तब रेड्डी मुख्यमंत्री बनाये गए और 1 नवम्बर 1956 से 11 जनवरी 1960 तक इस पद पर बने रहे। हालांकि, उन्होंने 1959 में अपने पद से इस्तीफा देकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्षता में पदभार संभाल लिया, जिसकी उन्होंने 1959 से 1962 तक सेवा की थी।

1960 और 1962 के मध्य नीलम संजीव रेड्डी तीन बार भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए। वो तीन बार राज्य सभा के सदस्य भी रहे।

प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और इंदिरा गांधी की सरकार में 1964 से 1967 के बीच वे यूनियन कैबिनेट मिनिस्टर बने और 1967 से 1969 तक लोक सभा स्पीकर भी बने।

इसके बाद वे सक्रीय राजनीती से सेवानिर्वृत्त हो गये थे लेकिन फिर 1975 में उन्होंने, जयप्रकाश नारायण द्वारा इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ क्रांति करने के साथ वापसी की थी।

 

भारत के राष्ट्रपति (Neelam Sanjiva Reddy As a President of India) :

1977 में जनता पार्टी के सदस्य के रूप में उनकी नियुक्ती संसद में की गयी और सर्वसम्मति से रेड्डी को लोकसभा के छठे स्पीकर के रूप में चुना गया और इसके तीन महीने बाद 1977 के राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के मृत्यु के बाद राष्ट्रपति चुनाव कराए गए जिसमें नीलम संजीव रेड्डी को  भारत के राष्ट्रपति के रूप में चुना गया। इसके साथ वो सबसे कम उम्र में राष्ट्रपति बनने वाले व्यक्ति हो गए। उस समय उनकी उम्र 65 साल थी। रेड्डी ने तीन सरकारों के साथ काम किया था, प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई, चरण सिंह और इंदिरा गांधी

भारत की आज़ादी की 20 वी एनिवर्सरी पर रेड्डी ने घोषणा की थी वे राष्ट्रपति भवन को छोड़कर एक छोटे आवास में रहने के लिए जा रहे है और उन्होंने उन्हें मिलने वाले पैसो में 70% की कटौती देश के विकास के लिए भी की थी।

25 जुलाई, 1982 को अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद नीलम संजीव रेड्डी अनंतापुर चले गए और अपने आप को कृषि कार्यों में व्यस्त कर दिया। कर्नाटक के तत्कालीन मुख्यमंत्री रामकृष्ण हेगड़े ने उन्हें बैंगलोर में बसने का न्योता दिया था पर उन्होंने अपने जीवन का बाकी समय बिताने के लिए अपने प्रिय नगर अनंतपुर को ही चुना।

 

मृत्यु (Neelam Sanjiva Reddy Death) :

1, जून 1966, 83 वर्ष की आयु में रेड्डी जी का मृत्यु उनके पैतृक स्थान में हुआ। उनका दूरदर्शी नेतृत्व, मिलनसारिता और उपलब्धता ने उन्हें जीवन के सभी क्षेत्रों के लोगों का परम प्रिय बना दिया था। 

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