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राम मनोहर लोहीया की जीवनी | Ram Manohar Lohia Biography in Hindi

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Ram Manohar Lohia Biography In Hindi
Ram Manohar Lohia
पूरा नाम राम मनोहर लोहिया
जन्म 23 मार्च 1910
जन्मस्थान अकबरपुर, उत्तरप्रदेश
शिक्षाबी.ए. में स्नातक
पिता        हीरा लाल
माता      चंदा
कार्यस्वतंत्रता सेनानी, राजनीतिज्ञ
नागरिकता/राष्ट्रीयता भारतीय

 

राजनीतिज्ञ राम मनोहर लोहिया (Ram Manohar Lohia Biography in Hindi) :

राम मनोहर लोहिया एक स्वतंत्रता सेनानी, प्रखर समाजवादी और राजनीतिज्ञ थे। राम मनोहर ने हमेशा सत्य का अनुकरण किया, और आजादी की लड़ाई में अद्भुत काम किया। भारत की राजनीति में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान और उसके बाद ऐसे कई नेता आये जिन्होंने अपने दम पर राजनीति का रुख़ बदल दिया, उन्ही नेताओं में एक थे राममनोहर लोहिया। वे अपनी प्रखर देशभक्ति और तेजस्‍वी समाजवादी विचारों के लिए जाने जाते है। Politician Ram Manohar Lohia

 

प्रारंभिक जीवन (Ram Manohar Lohia Early Life) : 

राम मनोहर लोहिया का जन्म 23 मार्च, 1910 को उत्तर प्रदेश के अकबरपुर में हुआ था। उनकी मां एक शिक्षिका थीं, जब वे बहुत छोटे थे तभी उनकी मां का निधन हो गया था, अपने पिता जो एक राष्ट्रभक्त थे। पिता से उन्हें युवा अवस्था में ही विभिन्न रैलियों और विरोध सभाओं के माध्यम से भारत के स्वतंत्रता आंदोलनों में भाग लेने की प्रेरणा मिली। जब एक बार उनके पिता महात्मा गांधी से मिलाने के लिए राम मनोहर को अपने साथ लेकर गए, तब राम मनोहर गांधी के व्यक्तित्व और सोच से बहुत प्रेरित हुए, तथा जीवन पर्यन्त गांधीजी के आदर्शों का समर्थन किया।

 

शिक्षा (Ram Manohar Lohia Education) :

राम मनोहर लोहिया ने अपनी मैट्रिक परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास करने के बाद इंटरमीडिएट में दाखिला बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में कराया। उसके बाद उन्होंने 1929 में कलकत्ता विश्वविद्यालय से अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी की, और पी.एच.डी. करने के लिए बर्लिन विश्वविद्यालय, जर्मनी चले गए, जहाँ से उन्होंने 1932 में इसे पूरा किया। Ram Manohar Lohia Biography in Hindi

 

साइमन कमीशन के खिलाफ (Ram Manohar Lohia Against the Simon Commission) :

राम मनोहर लोहिया की मुलाकात 1921 में पंडित जवाहरलाल नेहरू हुई, और उसके बाद राम मनोहर लोहिया कुछ सालों तक पंडित जवाहरलाल नेहरू की देख-रेख में कार्य करते रहे। बाद मे उन दोनों के बीच राजनीति से सम्बंधित अलग-अलग बातों को लेकर विवाद होने लगा। 1928 में 18 साल के राम मनोहर लोहिया ने ब्रिटिश सरकार द्वारा बनाई गई। ‘साइमन कमीशन’ के खिलाफ खड़े रहकर उनका विरोध करने के लिए प्रदर्शन भी आयोजित किया।

 

कांग्रेस पार्टी से जुड़ (Ram Manohar Lohia Joined Congress Party) :

जब राम मनोहर लोहिया यूरोप गए थे, तब उन्होंने वहाँ एक क्लब बनाया जिसका नाम ‘एसोसिएशन ऑफ़ यूरोपियन इंडियंस’ रखा। उस क्लब का पहला मकसद यूरोपीय भारतीयों के अंदर भारतीय राष्ट्रवाद के लिए जागरूकता पैदा करना था। कुछ समय बाद वे वापस आ गए, और कांग्रेस पार्टी से जुड़ गए। Ram Manohar Lohia Biography in Hindi

1934 में राम मनोहर लोहिया ने ‘कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी’ की आधारशिला रखी। राम मनोहर लोहिया को पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा ‘अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी’ के पहले सचिव के तौर पर नियुक्त किया गया था। Freedom Fighter Ram Manohar Lohia

उन्होंने सरकारी संस्थाओं के खिलाफ उत्तेजक बयान दिया था, और देशवासियों को सरकारी संस्थाओं का बहिष्कार करने के लिए राजी कर लिया था। इसी वजह से 24 मई, 1939 में पहली बार राम मनोहर लोहिया को गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, युवाओं के विद्रोह के डर की वजह से राम मनोहर लोहिया को अगले ही दिन छोड़ दिया गया था।

कुछ समय बाद जून 1940 में राम मनोहर लोहिया को ‘सत्याग्रह नाउ’ नाम का एक लेख लिखने की वजह से फिर से गिरफ्तार कर लिया गया था। और इस बार उन्हें 2 साल के लिए जेल में भी डाल दिया गया था। दिसम्बर 1941 को राम मनोहर लोहिया को छोड़ दिया गया था।

 

भारत छोड़ो आंदोलन में योगदान (Ram Manohar Lohia Contribution in Quit India Movement) :

1942 में जब ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ चल रहा था, तब राम मनोहर लोहिया एक स्वतंत्रता सेनानी, प्रखर समाजवादी और सम्मानित राजनीतिज्ञ थे। राम मनोहर ने हमेशा सत्य का अनुकरण किया, और आजादी की लड़ाई में अद्भुत काम किया। पंडित जवाहर लाल नेहरू, मौलाना आजाद और वल्लभभाई पटेल जैसे कई बड़े नेताओं के साथ राम मनोहर लोहिया को भी गिरफ्तार कर लिया गया था। Ram Manohar Lohia Biography in Hindi

जब भारत आजाद होने के काफी करीब था, उस समय उन्होंने अपने लेखों और भाषणों के प्रयोग से देश के बंटवारे का विरोध किया। राम मनोहर लोहिया नहीं चाहते थे कि देश का बंटवारा हिंसा से हो। भारत की आजादी के दिन जब सभी नेता 15 अगस्त, 1947 को दिल्ली में इकट्ठे हुए थे, तब राम मनोहर लोहिया और महात्मा गांधी देश के बहार थे। क्योंकि उन्हें भारत के अवांछित विभाजन का शोक था। राम मनोहर लोहिया देश के पुनर्निर्माण के लिए एक स्वतंत्रता सेनानी के तौर पर ही भारत के प्रति अपना योगदान देते रहे।

 

स्वतंत्रता के बाद की गतिविधियाँ (Ram Manohar Lohia Work After Independence of India) :

भारत की अधिकांश जनता की एक दिन की आमदनी मात्र 3 आना थी, जबकि भारत के योजना आयोग के आंकड़े के अनुसार प्रति व्यक्ति औसत आय 15 पन्द्रह आना था. लोहिया ने उन मुद्दों को उठाया जो लंबे समय से राष्ट्र की सफलता में बाधा उत्पन्न कर रहे थे। राम मनोहर लोहिया ने अपने भाषण और लेखन के माध्यम से जागरूकता पैदा करने, अमीर-गरीब की खाई, जातिगत असमानताओं और स्त्री-पुरुष असमानताओं को दूर करने का प्रयास किया। Ram Manohar Lohia Biography in Hindi

उन्होंने कृषि से सम्बंधित समस्याओं के आपसी निपटारे के लिए ‘हिन्द किसान पंचायत’ का गठन किया। वे सरकार की केंद्रीकृत योजनों को जनता के हाथों में देकर अधिक शक्ति प्रदान करने के पक्षधर थे। अपने अंतिम कुछ वर्षों के दौरान उन्होंने देश की युवा पीढ़ी के साथ राजनीति, भारतीय साहित्य और कला जैसे विषयों पर चर्चा किया, लोहिया ने अंग्रेजी को एक विदेशी भाषा के रूप में देखा, और इस देश में अंग्रेजी शिक्षा को हटाने के लिए एक आंदोलन चलाया था।

 

प्रकाशित पुस्तके (Ram Manohar Lohia Books List) :

  • अंग्रेजी हटाओ
  • इतिहास चक्र
  • देश, विदेश नीति-कुछ पहलू
  • धर्म पर एक दृष्टि
  • भारतीय शिल्प
  • भारत विभाजन के गुनहगार
  • मार्क्सवाद और समाजवाद
  • समलक्ष्य, समबोध
  • समदृष्टि
  • सच, कर्म, प्रतिकार और चरित्र निर्माण आह्‌वान
  • समाजवादी चिंतन
  • संसदीय आचरण
  • संपूर्ण और संभव बराबरी और दूसरे भाषण
  • हिंदू बनाम हिंदू

 

म्रुत्यु (Ram Manohar Lohia Death) :

जीवनभर देश की सेवा करने वाले राम मनोहर लोहिया की मृत्यु 57 साल की उम्र में 12 अक्टूबर, 1967 को नई दिल्ली में हुई थी। उन्हे नयी दिल्ली के विलिंग्डन अस्पताल में 30 सितंबर, 1967 के दिन दाखिल कराया गया था। यह अस्पताल वर्तमान समय में डॉक्टर राम मनोहर लोहिया अस्पताल नाम से जाना जाता है।

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