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रामास्वामी वेंकटरमण की जीवनी | Ramaswamy Venkataraman Biography in Hindi

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Ramaswamy Venkataraman
Ramaswamy Venkataraman
नाम रामास्वामी वेंकटरमण
जन्म 4 दिसम्बर 1910
जन्मस्थानपट्टुकोट्टय, तंजौर जिला, तमिलनाडु
पिता के. रामास्वामी अय्यर
पत्नी जानकी वेंकटरमण
पुत्रीपद्मा वेंकटरमन, विजया रामचंद्रन और लक्ष्मी वेंकटेशन
व्यवसायवकील, राजनीतिज्ञ
राजनैतिक पार्टीराष्ट्रीय कांग्रेस
नागरिकताभारतीय

 

राजनीतिज्ञ रामास्वामी वेंकटरमण (Ramaswamy Venkataraman Biography in Hindi) :

रामास्वामी वेंकटरमण एक भारतीय विधिवेत्ता, स्वाधीनता कर्मी, राजनेता थे। राष्ट्रपति बनने से पूर्व वे करीब चार साल तक भारत के उपराष्ट्रपति भी रहे। क़ानून की पढ़ाई के बाद उन्होंने मद्रास उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में वकालत की और युवावस्था में भारत के स्वाधीनता आन्दोलन से भी जुड़े। उन्होंने ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में हिस्सा लिया था और संविधान सभा के सदस्य भी चुने गए। वे चार बार लोक सभा के लिए चुने गए और केन्द्र सरकार में वित्त और रक्षा मंत्री रहे। उन्होंने केंद्रसरकार में राज्य मंत्री के तौर पर भी कार्य किया। Politician Ramaswamy Venkataraman

 

प्रारंभिक जीवन (Ramaswamy Venkataraman Early Life) :

आर. वेंकटरमण का जन्म 4 दिसंबर 1910 को तमिलनाडु  में तंजौर के पास पट्टुकोट्टय के छोटे से गाँव राजमदम में हुआ था। अब यह तमिलनाडु के नाम से जाना जाता हैं। इनके पिता का नाम रामास्वामी अय्यर था। इनके पिता तंजावुर जिले में वकालत का पेशा करते थे।

 

शिक्षा (Ramaswamy Venkataraman Education) :

आर. वेंकटरमण ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मद्रास (चेन्नई) में पूरी की। फिर मद्रास विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की परीक्षा उत्तीर्ण की। तत्पश्चात लॉ की परीक्षा के लिए उन्होंने मद्रास के डी लॉ कॉलेज में दाखिला लिया।

लॉ की शिक्षा पूरी करने के बाद आर. वेंकटरमण  के पास दो विकल्प थे ब्रिटिश हुकूमत की नौकरी करें या तो वे स्वतंत्र रूप से वकालत करें। वेंकटरमण अंग्रेजो के अधीन काम करना कभी मंजूर नहीं था, सो उन्होंने स्वतंत्र रूप से वकालत करने की ठान ली और सन 1935 में मद्रास उच्च न्यायालय से वकालत शुरू कर दी। 1951 के आते आते वे कानून के प्रकांड पंडित के रूप में पहचाने जाने लगे और फिर सुप्रीम कोर्ट में वकील के रूप में अपना कार्य शुरू कर दिया।

 

राजनीतिक करियर (Ramaswamy Venkataraman Political Career) :

वकालत के कार्य से जुड़े होने के कारण आर. वेंकटरमण का संपर्क राजनीति के क्षेत्र से भी बढ़ता गया और साथ साथ भारत देश की स्वतंत्रता की लड़ाई में हिस्सेदार रहे। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक्टिव मेम्बर बने। वकालत के दौरान आर. वेंकटरमण ने 1942 में भारत की स्वतंत्रता के लिए महात्मा गाँधी जी के साथ भारत छोड़ो आन्दोलन में हिस्सा लिया। अंग्रेज सरकार ने इन्हें गिरिफ्तार कर लिया और इन्हें दो वर्ष कारावास की सजा हो गई। Ramaswamy Venkataraman Biography in Hindi

1944 में अपनी रिहाई के बाद वे फिर से अंग्रेजो के विरुद्ध आन्दोलनों से जुड़ गए। देश के प्रति उनका स्नेह अपार था। 1944 में ही उन्होंने तमिलनाडु कांग्रेस समिति में श्रमिक प्रभाव का गठन किया और प्रभारी के रूप में कार्य संभाला। थोड़े समय बाद ही वे “ट्रेड यूनियन लीडर” के रूप में स्थापित हो गए। श्रमिक एवं मजदूरों के लिए वे हमेशा कम करते थे। 1949 में उन्होंने ‘श्रमिक कानून’ पत्रिका शुरू की। 1947 से 1950 तक वे ‘महाराष्ट्र बार एसोसिएशन’ के सचिव रहे।

1950 में वे मुक्त भारत प्रोविजनल संसद 1950-1952 बने और प्रथम संसद 1952-1957 में चुने गये और 1957 तक वे इसके सदस्य रहे। उनके वैधानिक कार्यकाल के समय वेंकटरमण 1952 के अंतर्राष्ट्रीय मजदूरो की मेटल ट्रेड कमिटी में मजदूरो के दूत बनकर उपस्थित थे। Ramaswamy Venkataraman Biography in Hindi

1957 में जब लोकसभा चुनाव हुए तो एक बार फिर से आर। वेंकटरमण जी  को सांसद के रूप में चुना गया किन्तु पद की लालसा न दिखाते हुए उन्होंने इस पद को त्याग दिया और मद्रास राज्य के मंत्रीपरिषद का पद ग्रहण किया। उस समय वहां के मुख्यमंत्री के कामराज ने उनकी राजनैतिक प्रतिभा को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1957 से 1967 तक आर. वेंकटरमण जी ने मद्रास राज्य में सहकारिता, वाणिज्यिक कर, श्रम, उद्योग, यातायात तथा ऊर्जा जैसे कार्यो को सफलतापूर्वक संभाला। न्यूज़ीलैण्ड में आयोजित कामनवेल्थ पार्लिमेंटरी कांफ्रेंस में वे भारतीय संसद दूतो के सदस्य भी थे।

1967 में तमिलनाडु में सत्ता कांग्रेस के हाथों से चली गई। तत्पश्चात आर. वेंकटरमण जी दिल्ली आ गए और उन्हें योजना आयोग का सदस्य चुन लिया गया। इस दौरान वे उद्योगों, समाज, यातायात, अर्थव्यस्था से जुड़े कार्य संभालते थे। 1971 तक उन्होंने इस पद की गरिमा बढाई। 1980 में वे पुनः लोकसभा चुनाव जीते और सांसद बन गए। लीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी जी ने वेंकटरमण जी को वित्त मंत्री बना दिया। 1982 से 1984 तक वेंकटरमण जी को रक्षा मंत्री का भार सौंपा गया। रक्षा मंत्री के तौर पर उन्होंने भारत के मिसाइल विकास कार्क्रम को आगे बढ़ाया। वे ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को अंतरिक्ष कार्यक्रम से मिसाइल कार्यक्रम में लेकर आये। 22 अगस्त 1984 में उन्होंने उपराष्ट्रपति का कार्य संभाला। उसी दौरान वे राज्यसभा के अध्यक्ष भी रहे।

 

राष्ट्रपति का कार्यभार (Ramaswamy Venkataraman President of India) :

24 जुलाई 1987 को इन्होंने उपराष्ट्रपति पद से त्यागपत्र दे दिया और 25 जुलाई 1987 को आठवें राष्ट्रपति के रूप में शपत्र ली। 1992 तक सेवा प्रदान की। अपने कार्यकाल के दौरान वेंकटरमण के चार प्रधान मंत्रियों के साथ काम करने का गौरव प्राप्त किया था, जिसमें से उन्होंने खुद तीनों को नियुक्त किया था। यह उनके कार्यकाल के दौरान भी था जो कि गठबंधन राजनीति के आगमन को देखा गया।

 

सम्मान और उपलब्धियां (Ramaswamy Venkataraman Honors and Achievements) :

  • वेंकटरमण को मद्रास यूनिवर्सिटी ने डॉक्टरेट ऑफ़ लॉ की उपाधि से सम्मानित किया। 
  • नागार्जुन यूनिवर्सिटी ने भी उन्हें डॉक्टरेट ऑफ़ लॉ की उपाधि से सम्मानित किया था।
  • मद्रास मेडिकल कॉलेज के वे भूतपूर्व सम्माननीय सदस्य है और यूनिवर्सिटी ऑफ़ रूरकी में वे सामाजिक विज्ञान के डॉक्टर भी थे।
  • बुर्द्वान यूनिवर्सिटी में उन्हें डॉक्टर ऑफ़ लॉ की उपाधि से सम्मानित किया गया था।
  • स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने की वजह से उन्हें ताम्र पत्र से भी सम्मानित किया गया था।
  • UN एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल में प्रेसिडेंट के रूप में काम करने की वजह से यूनाइटेड नेशन के सेक्रेटरी जनरल ने उन्हें यादगार पुरस्कारों से सम्मानित भी किया था।
  • कांचीपुरम के शंकराचार्य ने उन्हें “सत सेवा रत्न” के नाम का शीर्षक भी दिया था। वे कांची के परमाचार्य के भक्त थे।

 

मृत्यु (Ramaswamy Venkataraman Death) :

12 जनवरी 2009 को वेंकटरमण को आर्मी रिसर्च एंड रेफरल हॉस्पिटल में उरोसेप्सिस की वजह से भर्ती किया गया था। 20 जनवरी को उनकी अवस्था और भी ज्यादा गंभीर होने लगी थी, इसकी वजन उनके शरीर में ब्लड प्रेशर की कमी होना था, और 27 जनवरी 2009 को नयी दिल्ली के आर्मी रिसर्च एंड रेफरल हॉस्पिटल में ऑर्गन फेलियर की वजह से 98 साल की आयु में उनका देहांत हो गया। अंत में पुरे सम्मान के साथ राज घाट के पास एकता स्थल में पुरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।

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