The Amazing Facts

रानी लक्ष्मीबाई की जीवनी | Rani Lakshmi Bai Biography in Hindi

SHARE
, / 211 0
Rani Lakshmi Bai Biography in Hindi
Rani Lakshmi Bai
नामरानी लक्ष्मीबाई, मणिकर्णिका
उपनाममनु बाई
जन्म 19 नवंबर 1828
जन्मस्थानवाराणसी, भारत
पितामोरोपंत तांबे
माताभागीरथी बाई
पतिझांसी नरेश महाराजा गंगाधर रावनेवालकर
संतानदामोदर राव, आनंद राव (दत्तक पुत्र)
कार्यक्रांतिकारी, झांसी साम्राज्य की रानी
राष्ट्रीयताभारतीय

 

क्रांतिकारी रानी लक्ष्मीबाई (Rani Lakshmi Bai Biography in Hindi) :

रानी लक्ष्मीबाई मराठा में स्थित झाँसी राज्य की रानी (Queen of Jhansi) थीं। 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में ब्रिटिश हुकुमत के खिलाफ बिगुल बजाने वाले वीरों में से एक थीं। रानी लक्ष्मीबाई ऐसी वीरांगना थीं जिन्होंने मात्र 23 वर्ष की आयु में ही हमारे देश और अपने राज्य झाँसी की स्वतंत्रता के लिए ब्रिटिश राज्य के खिलाफ लड़ने का साहस किया लेकिन उनके जीते जी अंग्रेजों को अपने राज्य झाँसी पर कब्जा नहीं करने दिया। Revolutionary Queen Laxmibai

 

लक्ष्मीबाई का प्रारंभिक जीवन (Early Life of Rani Lakshmi) :

लक्ष्मीबाई का जन्म 19 नवम्बर 1828 को वाराणसी जिले में एक मराठी ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उसके बचपन का नाम मणिकर्णिका था पर परिवारवाले उन्हें प्रेम से मनु बुलाते थे। लक्ष्मीबाई के पिता का नाम मोरोपंत ताम्बे और माता का नाम भागीरथी बाई था। उनके माता-पिता उस समय के महाराष्ट्र से सम्बन्ध रखते थे। लक्ष्मीबाई जब चार साल की थीं तभी उनकी माता की मृत्यु हो गई थी।

लक्ष्मीबाई के पिता मराठा बाजीराव के दरबार सेवा कार्य करता था। उनके माँ की मृत्यु के पश्चात उनके घर में मनु की देखभाल के लिये कोई नहीं था। इसलिए उनके पिता लक्ष्मीबाई को अपने साथ बाजीराव के दरबार में ले गये। वहां मनु के स्वभाव ने सबका मन मोह लिया और लोग उसे प्यार से “छबीली” कहने लगे। मराठा दरबार में शास्त्रों की शिक्षा के साथ साथ मनु को शस्त्रों की भी शिक्षा दी गयी थी।

 

लक्ष्मीबाई का विवाह (Marriage Life of Laxmibai) :

साल 1842 में मनु का विवाह उत्तर भारत में स्थित झाँसी राज्य के महाराज गंगाधर राव निम्बालकर के साथ किया गया। इस प्रकार वे झाँसी की रानी बन गयीं और तभी से उनका नाम बदलकर लक्ष्मीबाई कर दिया गया। साल 1851 में रानी लक्ष्मीबाई और गंगाधर राव को पुत्र रत्न की पारपत हुई पर चार महीने की आयु में ही उसकी मृत्यु हो गयी।

लेकिन राजा गंगाधर राव की तबीयत बिगड़ती जा रहा था। उनकी तबियत अधिक बिगड़ जाने पर उन्हें दत्तक पुत्र लेने की सलाह दी गयी। बाद में उन्होंने वैसा ही किया और पुत्र गोद लेने के बाद 21 नवम्बर 1853 को गंगाधर राव की मृत्यु हो गई। उनके दत्तक पुत्र का नाम दामोदर राव रखा गया।

 

झांसी पर अंग्रेजों का कब्जा (British occupy of Jhansi) :

रानी ने अपना धैर्य और सहस नहीं खोया और बालक दामोदर की आयु कम होने के कारण राज्य–काज का उत्तरदायित्व महारानी लक्ष्मीबाई ने स्वयं पर ले लिया। उस समय लार्ड डलहौजी गवर्नर था। उस समय यह नियम था कि शासन पर उत्तराधिकार तभी होगा, जब राजा का स्वयं का पुत्र हो, यदि पुत्र न हो तो उसका राज्य ईस्ट इंडिया कंपनी में मिल जाएगा।

ब्रिटिश इंडिया के गवर्नर जनरल लार्ड डलहौजी की राज्य हड़प नीति के अनुसार अंग्रेजों ने बालक दामोदर राव को झाँसी राज्य का उत्तराधिकारी मानने से इनकार कर दिया और ‘डॉक्ट्रिन ऑफ़ लैप्स’ नीति के तहत झाँसी राज्य का विलय अंग्रेजी साम्राज्य में करने का फैसला कर लिया।

हालाँकि रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेज़ वकील जान लैंग की सलाह ली और लंदन की अदालत में मुकदमा दायर कर दिया पर अंग्रेजी साम्राज्य के विरुद्ध कोई फैसला हो ही नहीं सकता था इसलिए बहुत बहस के बाद इसे खारिज कर दिया गया। Rani Lakshmi Bai Biography in Hindi

बाद में अंग्रेजों ने झाँसी राज्य का खजाना ज़ब्त कर लिया। अंग्रेजों ने लक्ष्मीबाई को झाँसी का किला छोड़ने को कहा जिसके बाद उन्हें रानीमहल में जाना पड़ा। 7 मार्च 1854 को झांसी पर अंग्रेजो ने अधिकार कर लिया। रानी लक्ष्मीबाई ने हिम्मत नहीं हारी और हर हाल में झाँसी की रक्षा करने का निश्चय किया और कहा “मेरी झांसी नहीं दूंगी”

 

ब्रिटिश साम्राज्य से लक्ष्मीबाई का संघर्ष (Laxmibai Struggle with British Empire) :

ब्रिटिश साम्राज्य से संघर्ष के लिए रानी लक्ष्मीबाई ने एक स्वयंसेवक सेना का गठन प्रारम्भ किया। इस सेना में महिलाओं की भी भर्ती की गयी और उन्हें युद्ध का प्रशिक्षण दिया गया। झाँसी की आम जनता ने भी इस संग्राम में रानी का साथ दिया। लक्ष्मीबाई की हमशक्ल झलकारी बाई को सेना में प्रमुख स्थान दिया गया।

अंग्रेजों के खिलाफ रानी लक्ष्मीबाई की जंग में कई और अपदस्थ और अंग्रेजी हड़प नीति के शिकार राजाओं जैसे बेगम हजरत महल, अंतिम मुगल सम्राट की बेगम जीनत महल, स्वयं मुगल सम्राट बहादुर शाह, नाना साहब के वकील अजीमुल्ला शाहगढ़ के राजा, वानपुर के राजा मर्दनसिंह और तात्या टोपे आदि सभी महारानी के इस कार्य में सहयोग देने का प्रयत्न करने लगे।

झांसी 1857 के विद्रोह का एक प्रमुख केन्द्र बन गया था। साल 1858 के जनवरी महीने में अंग्रेजी सेना ने झाँसी की ओर बढ़ना शुरू कर दिया और मार्च में शहर को घेर लिया। लगभग दो हफ़्तों के संघर्ष के बाद अंग्रेजों ने शहर पर कब्जा कर लिया पर रानी लक्ष्मीबाई अपने पुत्र दामोदर राव के साथ अंग्रेजी सेना से बच कर भाग निकली। झाँसी से भागकर रानी लक्ष्मीबाई कालपी पहुँची और तात्या टोपे से मिलीं।

तात्या टोपे और लक्ष्मीबाई की संयुक्त सेना ने ग्वालियर के विद्रोही सैनिकों की मदद से ग्वालियर के एक किले पर कब्जा कर लिया। रानी लक्ष्मीबाई ने जी-जान से अंग्रेजी सेना का मुकाबला किया पर 17 जून 1858 को ग्वालियर के पास कोटा की सराय में ब्रिटिश सेना से लड़ते-लड़ते वीरगति को प्राप्त हो गयीं।

 

वीरगति (Death Of Rani Laxmibai) :

ग्वालियर जाकर रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों के खिलाफ अपना युद्ध जारी रखा। वहीं जब अंग्रेजों को लक्ष्मीबाई के ग्वालियर में होने का पता चला तो ब्रिटिश सेना ने ग्वालियर में हमला कर दिया। लक्ष्मीबाई ने हिम्मत के साथ ब्रिटिश सेना का सामना किया। Rani Lakshmi Bai Biography in Hindi

17 जून 1858 को अंग्रेजों के साथ युद्ध करते हुए रानी मणिकर्णिका वीर गति को प्राप्त हो गई। लक्ष्मीबाई ने खुद को अंग्रेजों के हाथ नहीं लगने दिया और वो अपने बेटे और घोड़े के साथ आग में कूद गई और इस तरह से लक्ष्मीबाई की कहानी सदा के लिए अमर हो गई। इस प्रकार देश को स्वतंत्रता दिलाने के लिए उन्होंने अपनी जान तक न्यौछावर कर दी।

 

“मणिकर्णिका : द क्वीन ऑफ झांसी” फिल्म (Manikarnika: The Queen of Jhansi Movie) :

रानी लक्ष्मीबाई जी के जीवन पर आधारित एक फिल्म बनाई गई है, जिसका नाम है “मणिकर्णिका : द क्वीन ऑफ झाँसी”। इस फिल्म में उनके प्रेरणादायी जीवन को दर्शाया गया है, इस फिल्म में 1857 के विद्रोह के दौरान ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ उनके युद्ध में प्रदर्शन को बहादुरी, वीरता और नारी शक्ति की एक प्रेरणादायी कहानी बताई गई है।

इस फिल्म में रानी लक्ष्मीबाई का किरदार अभिनेत्री कंगना रानौत ने निभाया है। इस फिल्म का निर्देशन कंगना रानौत और राधा कृष्ण जगर्लामुदी द्वारा किया गया है। इस फिल्म में अतुल कुलकर्णी ने तात्या टोपे का किरदार निभाया है, साथ में गंगाधर राव का किरदार जिस्शु सेनगुप्ता, झलकारी बाई का किरदार टीवी और फिल्म अभिनेत्री अंकिता लोखंडे ने निभाया है।

_

कहानी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें  Facebook पर ज्वॉइन  करें…