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सरबजीत सिंह की जीवनी | Sarabjit Singh Biography in Hindi

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Sarabjit Singh Biography In Hindi
Sarabjit Singh
नाम सरबजीत सिंह
जन्म1963
जन्मस्थानभिखीविंड
पत्नी सुखबीर कौर
पुत्रस्वप्नदीप कौर
पुत्रीपूनम कौर
शिक्षाएम.एस.सी
नागरिकताभारतीय

 

भारत के रत्न सरबजीत सिंह (Sarabjit Singh Biography in Hindi) :

सरबजीत सिंह भारतीय मूल का ही व्यक्ति है जिसे पाकिस्तानी कोर्ट ने आतंकवादी हमलो में दोषी और जासूस करार दिया है। पाकिस्तानी कोर्ट के अनुसार 1990 में लाहौर और फैसलाबाद में हुए बम हमलो में वह भी सहभागी था। लेकिन सरबजीत का कहना है की वह एक किसान है और बम हमले के तीन महीने बाद भटकते हुए अपने गाव की बॉर्डर से होकर पाकिस्तान आया था। Gems of India Sarabjit Singh

 

सरबजीत सिंह का प्रारंभिक जीवन (Sarabjit Singh Early Life) :

सरबजीत सिंह का जन्म 1963 में भारत के पंजाब के गांव भीखीविंड, जिला तरनतारन में हुवा था। सरबजीत के पिता यूपी मे नौकरी करते थे। सरबजीत कब्बडी के अच्छे खिलाड़ी थे और अपने परिवार का पालन पोषण करने के लिए वे खेतो मे टेक्टर चलाते थे। सरबजीत सिंह ने सन 1984 मे सुखबीर कौर से शादी भी की। सरबजीत तथा सुखबीर कौर की 2 बेटियाँ पूनमदीप और स्वपनदीप है। उनकी बहन दलबीर कौर, 1991 से उन्होंने छुड़ाने की कोशिश कर रही थी।

 

पाकिस्तानी द्वारा गिरफ्तार (Sarabjit Arrested by Pakistani) :

उनके दोस्तों और करिबियों के अनुसार खुशमिजाज के सरबजीत 1990 मे जब सीमा पर तार की फेंसिंग नहीं होती थी, तब सरबजीत शराब के नशे मे सीमा के पार पाकिस्तान पहुच गए। उनके पाकिस्तान मे प्रवेश करते ही उन्हे एक पाकिस्तानी कर्नल द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया।

उनकी गिरफ्तारी के सात दिनो बाद उन्हे पाकिस्तानी कोर्ट मे हाजिर किया गया। परंतु दिक्कत की बात यह थी, कि सरबजीत सिंह को पाकिस्तानी कोर्ट मे एक भारतीय जासूस के रूप मे हाजिर किया गया। कोर्ट मे सरबजीत सिंह की पहचान मंजीत सिंह के नाम से कराई गयी।

 

पाकिस्तानी कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई (Pakistani Court Sentenced Death to Sarabjit) :

सरबजीत सिंह को पाकिस्तानी कोर्ट ने रॉ का एजेंट बताया, और उन्हे लाहौर, मूलतान तथा फैसलाबाद बम धमाको का भी दोषी बताया गया। इनहि सब आरोपो की बिनाह 1991 मे सरबजीत को पाकिस्तानी कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई। Sarabjit Singh Biography in Hindi

सरबजीत सिंह के पक्ष में उनके परिवार के साथ साथ मानवाधिकार संगठन भी सामने आए तब पता चला कि सरबजीत के मामले में पाकिस्तान सरकार ने कई फर्जीवाड़े किए हैं। फिर कुछ प्रयासो के चलते पाकिस्तानी कोर्ट ने अपना फांसी का फैसला अनिश्चित काल तक टाल दिया।

 

एक दर्दनाक कहानी की शुरुआत (Beginning of a Painful Story of Sarabjit) :

पाकिस्तान की अदालत में जो पासपोर्ट पेश किया गया था उस पर नाम लिखा था खुशी मोहम्मद का लेकिन तस्वीर सरबजीत सिंह की लगाई गई थी। इसी तरह 2005 में पाकिस्तानी ने एक वीडियो जारी करके दावा किया कि सरबजीत सिंह ने अपना जुर्म कबूल लिया है, लेकिन 2005 तक पाकिस्तान सरबजीत सिंह को मंजीत सिंह कहता था।

2005 में ही वो गवाह मीडिया के सामने आया जिसने सरबजीत की पहचान की थी, उसने मीडिया से साफ कहा कि उस पर दबाव डालकर सरबजीत के खिलाफ बयान दिलवाया गया था। लेकिन इन फर्जीवाड़े के बावजूद 1 अप्रैल 2008 को सरबजीत को फांसी दिए जाने की तारीख तय कर दी गई थी, हालांकि कूटनीतिक प्रयासों के बाद उनकी फांसी अनिश्चितकाल के लिए टल गई।

जून 2012 में पाकिस्तानी मीडिया में खबर आय़ी कि सरबजीत को रिहा किया जा रहा है लेकिन यह खबर अफवाह साबित हुई। दरअसल पाकिस्तान सरकार ने सरबजीत के बदले सुरजीत सिंह की रिहाई का आदेश दिया था। तब से भारत के लोगों में यह उम्मीद जागी कि सरबजीत सिंह रिहा होकर एक दिन अवश्य वापस आएंगे लेकिन आखिर में आयी उनकी मौत की खबर। 26 अप्रैल को लाहौर के कोट लखपत जेल में उनपर जो हमला हुआ वो जानलेवा साबित हुआ।

 

सरबजीत की शिकायत (Sarabjit Complaint to Pakistan Government) :

पाकिस्तानी सरकार द्वारा सरबजीत के नाम तथा पहचान की गलत शिनाख्त करने के साथ साथ उसकी शिकायतों को भी नजर अंदाज किया गया। 2010 मे सरबजीत के द्वारा जेल मे उनके साथ किए गये बुरे व्यवहार की शिकायत सरकार को की गयी थी, परंतु पाकिस्तानी सरकार ने इसपर कोई ध्यान नहीं दिया। इसका परिणाम यह हुआ कि उन पर किए गये हमलों ने उनकी जान ही ले ली।

 

सरबजीत की मौत का कारण (Reason for Sarabjit Singh Death)

26 अप्रैल 2013 को तक़रीबन दोपहर के सेंट्रल जेल, लाहौर में कुछ कैदियों ने ईंटो, लोहे की सलाखों और रॉड से सरबजीत सिंह पर हमला कर दिया था। बाद में नाजुक हालत में उन्हें जिन्नाह हॉस्पिटल, लाहौर में भर्ती करवाया गया, उस समय वे कोमा में भी चले गये थे और उनकी रीड की हड्डी भी टूट चुकी थी।

1 मई 2013 को जिन्नाह हॉस्पिटल के डॉक्टरो ने सरबजीत सिंह को ब्रेनडेड घोषित किया लेकिन पाकिस्तानी अधिकारियो ने इसे मानने से इंकार कर दिया। और यह हमला उनके लिए जानलेवा साबित हुआ। आखिरकार ज़िंदगी से लड़ते हुये मौत की जीत हुई और 2 मई 2013 को रात 12.45 बजे लाहौर में वे शरणागति को प्राप्त हुये।

जब सरबजीत की मृत्यु के बाद उसका शव भारत भेजा गया, तो उनकी अंतिम बिदाई मे काँग्रेस प्रमुख राहुल गांधी सहित कई राजनैतिक शामिल हुये। उनका अंतिम संस्कार उनकी बहन दलबीर कौर के द्वारा पैत्रक गाव मे किया गया।

लेकिन भारत आने के बाद उनकी बहन ने दावा किया की डॉक्टर इमानदारी से उनके भाई का इलाज नही करते थे। उनकी बहन का ऐसा कहना है की उन्होंने उनके भाई के अंगूठे पर स्याही का निशान देखा था और जब उन्होंने डॉक्टरो से इस विषय में पूछा था तो उन्होंने इसका जवाब देने से इंकार कर दिया था।

सरबजीत सिंह की मृत्यु पर पंजाब सरकार ने राज्य में तीन दिन के शोक की घोषणा की। और उनके परिवार को 10,000,000 का अनुदान देने को घोषणा भी की। 2016 में उनके जीवन पर आधारित एक फिल्म भी बनाई गई थी जिसमे ऐश्वर्या राय और रणदीप हुड्डा मुख्य भूमिका निभा रहे है। Sarabjit Singh Biography in Hindi

 

हकीकत क्या थी? (What Was the Reality for Sarabjit Case)

सरबजीत के पाकिस्तानी वकील ओवैस शेख़ ने असली आरोपी मनजीत सिंह के खिलाफ जुटाए तमाम सबूत पेश कर मामला फिर से खोलने की अपील की। वकील ने कोर्ट में दावा किया कि उनका मुवक्किल सरबजीत बेगुनाह है और वो मनजीत सिंह के किए की सजा काट रहा है। ओवैस शेख़ का कहना था सरबजीत को 1990 में मई जून में कराची बम धमाकों का अभियुक्त बनाया गया है, जबकि वास्तविकता में 27 जुलाई, 1990 को दर्ज एफआईआर में मनजीत सिंह को इन धमाकों का अभियुक्त बताया गया है।

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