The Amazing Facts

सावित्रीबाई फुले की जीवनी | Savitribai Phule Biography in Hindi

SHARE
, / 513 0
Savitribai Phule
Savitribai Phule
नाम  सावित्रीबाई ज्योतिराव फुले
जन्म  3 जनवरी 1831
जन्मस्थान नायगांव, महाराष्ट
पिता         खंडोजी नावसे पाटिल
माता         लक्ष्मीबाई
पति ज्योतिराव फुले
पुत्र यशवंत फुले
व्यवसाय कवि, शिक्षक, समाजसुधारक
नागरिकता भारतीय

 

समाजसुधारक सावित्रीबाई फुले (Savitribai Phule Biography in Hindi) : 

सावित्रीबाई ज्योतिराव फुले Savitribai Jyotirao Phule देश की पहली शिक्षिका, सामाजिक कार्यकर्ता और बालिका विद्यालय की पहली प्रधानाचार्य थीं। जिन्होंने 19वीं शताब्दी के दौरान महिला शिक्षा और सशक्तिकरण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्हें उस समय की कुछ साक्षर महिलाओं में गिना जाता है। सावित्रीबाई को पुणे में अपने पति ज्योतिराव फुले के साथ भिडवाडा में स्कूल स्थापित करने के लिए श्रेय दिया जाता है। उन्होंने बाल विवाह के प्रति शिक्षित करने और उन्मूलन करने, सती प्रथा के खिलाफ प्रचार करने और विधवा पुनर्विवाह के लिए वकालात करने के लिए बहुत मेहनत की।

 

प्रारंभिक जीवन और शादी (Savitribai Phule Early Life and Marriage) :

सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र में एक किसान परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम खण्डोजी नेवसे और माता का नाम लक्ष्मीबाई था। सावित्रीबाई फुले का विवाह 1840 में मात्र 9 वर्ष की उम्र में 12 वर्षीय ज्योतिराव फुले के साथ हुआ। ज्योतिबा बहुत बुद्धिमान थे, उन्होंने मराठी में अध्ययन किया। वे महान क्रांतिकारी, भारतीय विचारक, समाजसेवी, लेखक और दार्शनिक थे। 

 

भारत की प्रथम महिला शिक्षिका (India First Female Teacher) :

महात्मा जोतिबा फुले ने 1 जनवरी 1848 में पुणे के भिड़े के बाडे से पहली लडकियों की पाठशाला की सुरुवात की उस स्कुल पर पहली महिला शिक्षिका व पहली मुख्याध्यापिका सावित्रीबाई फुले की नियुक्ति हुई। भारत की ‘प्रथम महिला शिक्षिका’ के रूप में जाने जाते है। इस पाठशाला में पहले दिन ही 6 विद्यार्थिनी ने प्रवेश ली।

पुणे के लोगोने फुलेजी के इस कार्यकर्म में मदत करने के बजाय उनकी बहुत निंदा व आलोचना की लेकिन सावित्रीबाई इस कठीन समय में भी हिम्मत से काम लेकर जोतिबा के इस समाजकार्य में बराबर का साथ दिए इसी कारण से जोतिबा को अपने जीवन के निश्चित धेय तक पहुचने में सफलता मिली।

 

सावित्रीबाई द्वारा सामाजिक कार्य (Savitribai Phule as a Social Servant) :

महिला अधिकार के लिए संघर्ष करने वाली सावित्रीबाई ने विधवाओं के लिए एक केंद्र की स्थापना की और उनको पुनर्विवाह के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने अछूतों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। 1897 में प्लेग फैलने के दौरान उन्होंने पुणे में अपने पुत्र के साथ मिलकर एक अस्पताल खोला और अस्पृश्य माने जाने वाले लोगों का इलाज किया।

महाराष्ट्र के सामाजिक सुधार आंदोलन का एक प्रमुख व्यक्तित्व और उन्हें बी आर अम्बेडकर, अन्नाभाऊ साठे की पसंद के साथ दलित मंगल जाति का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने अस्पृश्यता के खिलाफ अभियान चलाया और जाति व लिंग आधारित भेदभाव को समाप्त करने में सक्रिय रूप से काम किया।

फुले दंपति को महिला शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए 1852 में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने सम्मानित भी किया। केंद्र और महाराष्ट्र सरकार ने सावित्रीबाई फुले की स्मृति में कई पुरस्कारों की स्थापना की है। Savitribai Phule Biography in Hindi

 

सावित्रीबाई का शिक्षा के लिए संघर्ष (Savitribai Struggle for Education) :

सावित्रीबाई फुले को दकियानूसी लोग पसंद नहीं करते थे. उनके द्वारा शुरू किये गये स्कूल का लोगों ने बहुत विरोध किया था. जब वे पढ़ाने स्कूल जातीं थीं तो लोग अपनी छत से उनके ऊपर गन्दा कूड़ा इत्यादि डालते थे, उनको पत्थर मारते थे. सावित्रीबाई एक साड़ी अपने थैले में लेकर चलती थीं और स्कूल पहुँच कर गंदी कर दी गई साड़ी बदल लेती थीं. लेकिन उन्होंने इतने विरोधों के बावजूद लड़कियों को पढाना जारी रखा था.

 

सावित्रीबाई फुले ने दो काव्य पुस्तकें लिखीं (Savitribai Phule Poetry Books) :

  • काव्य फुले
  • बावनकशी सुबोधरत्नाकर

 

मृत्यु (Savitribai Phule Death) :

1897 में पुणे में भयंकर प्लेग फैला तब अपने अस्पताल में सावित्रीबाई और दत्तक पुत्र यशवंतराव खुद मरीज का ध्यान रखता था, उन्हें विविध सुविधाये प्रदान करता था। इस तरह मरीजो का इलाज करते-करते सावित्रीबाई खुद प्लेग की चपेट में आ गईं और एक दिन मरीज बन गयी। और इसी के चलते 10 अक्टुंबर 1897 को उनकी मृत्यु हो गयी।

सावित्रीबाई रोगीयों की सेवा करते-करते प्लेग के चपेट में आकर उनका उपचार होने के पूर्व ही उनका निधन 10 मार्च 1897 में हुआ।

_

कहानी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर ज्वॉइन करें…

Leave A Reply