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शंकर दयाल शर्मा की जीवनी | Shankar Dayal Sharma Biography in Hindi

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Shankar Dayal Sharma
Shankar Dayal Sharma
नामडॉ शंकर दयाल शर्मा
जन्म19 अगस्त 1918
जन्म स्थानभोपाल, मध्यप्रदेश
पिताखुशीलाल शर्मा
मातासुभद्रा शर्मा
पत्नीविमला शर्मा
पुत्रआशुतोष दयाल शर्मा, सतीश दयाल शर्मा
पुत्रीगीतांजलि माकन
व्यवसायराष्ट्रपति
राजनैतिक पार्टीराष्ट्रीय कांग्रेस
नागरिकताभारतीय

 

भारत के नवें राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा (Shankar Dayal Sharma Biography in Hindi) :

डॉ. शंकर दयाल शर्मा भारत के नवें राष्ट्रपति थे। राष्ट्रपति बनने से पूर्व वे भारत के आठवे उपराष्ट्रपति भी थे, वे भोपाल राज्य के मुख्यमंत्री 1952-1956 रहे तथा मध्यप्रदेश राज्य में कैबिनेट स्तर के मंत्री के रूप में उन्होंने शिक्षा, विधि, सार्वजनिक निर्माण कार्य, उद्योग तथा वाणिज्य मंत्रालय का कामकाज संभाला था। केंद्र सरकार में वे संचार मंत्री के रूप में 1974-1977 पदभार संभाला। 1972-1974 तक वे भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस के अध्यक्ष थे और 1974 से 1977 तक यूनियन मिनिस्टर बनकर उन्होंने सरकार में वापसी की थी।

 

प्रारंभिक जीवन (Shankar Dayal Sharma Early Life) :

शंकर दयाल शर्मा का जन्म 19 अगस्त 1918 मध्य प्रदेश के भोपाल में हुआ था। शंकर दयाल शर्मा के पिता का नाम खुशीलाल शर्मा था। उनकी माता का नाम सुभद्रा शर्मा था। 

 

शिक्षा (Shankar Dayal Sharma Education) :

पंजाब यूनिवर्सिटी और लखनऊ यूनिवर्सिटी के सेंट जॉन कॉलेज और आगरा कॉलेज से उन्होंने अपनी पढाई पूरी की थी। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के फिट्ज़विलियम कॉलेज से शर्मा ने पीएचडी की उपाधि प्राप्त की थी।

 

निजी जिंदगी (Shankar Dayal Sharma Personal Life) :

7 मई 1950 को 21 वर्ष की अवस्था में श्री शर्मा का विवाह विमला शर्मा के साथ संपन्न हुआ। इस समय विमला शर्मा ने स्नाकोत्तर परीक्षा दी थी और उसका नतीजा शादी के कुछ समय बाद आया था। इनका विवाह जयपुर में संपन्न हुआ था। शर्मा दंपँति को दो पुत्र एवं दो पुत्रियों की प्राप्ति हुई। उनके बेटो का नाम सतीश दयाल शर्मा और आशुतोष दयाल शर्मा था।

 

राजनीतिक करियर (Shankar Dayal Sharma Politically Career) :

डॉ शंकर दयाल जी के राजनैतिक सफ़र की शुरुवात 1940 में तब हुई, जब उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के लिए भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस में शामिल भी हुए थे। ये वो पार्टी थी जिसके अंदर रह कर उन्होंने स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए बहुत सारी लड़ाईयां लड़ी, बहुत से आन्दोलन में हिस्सा लिया। इसके साथ ही कई चुनाव लढ़े और जीत हासिल कर उच्च पद में विराजमान रहे। वे अपने जीवन के अंत तक इस पार्टी के प्रति बहुत ईमानदार रहे, उन्होंने इसका साथ कभी नहीं छोड़ा।

1942 में महात्मा गाँधी द्वारा चले गए “भारत छोड़ो आन्दोलन” में डॉ शंकर दयाल जी की महत्वपूर्ण भूमिका थी। भारत की आज़ादी के बाद भोपाल के नवाब ने भोपाल के राजसी राज्य ही बने रहने की मांग की। इसके विरोध में शर्मा ने दिसम्बर 1948 में सामाजिक आंदोलन भी किया था, इस वजह से उन्हें गिरफ्तार भी किया गया। और इसके बाद उन्होंने इंडियन यूनियन के साथ 30 अप्रैल 1949 को अग्रीमेंट भी बनाया।

1952 में शर्मा भोपाल राज्य के मुख्यमंत्री बने थे और 1956 तक उन्होंने राज्य का मुख्यमंत्री बने रहे हुए सेवा की थी। फिर 1956 में भोपाल राज्य को मध्यप्रदेश राज्य की स्थापना करने के लिए उसमे मिला लिया गया था। 1956 में लोकसभा के सदस्य चुने गए और केन्द्र सरकार में संचार मंत्री बने। 1971 में वे पाँचवीं लोकसभा के लिए भी निर्वाचित हुए।

जब इंदिरा गाँधी जी की सरकार आई, तब 1974 से 1977 तक वे कबिनेट में संचार मंत्री रहे। डॉ शंकर दयाल 2 बार 1971 और 1980 में लोकसभा सीट के लिए भोपाल से खड़े हुए, दोनों ही बार इन्हें सफलता प्राप्त हुई। इस तरह वे दिल्ली संसद पहुँच गए। इसके बाद वे सबसे पहले 1984 में आंध्रप्रदेश के राज्यपाल बन गए। इसी दौरान दिल्ली में रह रहे, उनकी बेटी गीतांजलि और दामाद ललित मेकन, जो की एक राजनेता थे, उन्हें सिख उग्रवादियों ने मार डाला। इसके बाद शंकरजी से आंधप्रदेश से राज्यपाल पद को छोड़ दिया और 1985 में उन्होंने आंध्र प्रदेश छोड़ दिया और पंजाब के राज्यपाल बन गए। इस समय भारत सरकार और सिख उग्रवादियों के बीच हिंसा छिड़ी हुई थी।

1986 में डॉ शंकर दयाल जी महाराष्ट्र के राज्यपाल रहे। 1987 तक वे महाराष्ट्र के गवर्नर बने रहे और फिर उसी साल उनकी नियुक्ती भारत के आठवे उपराष्ट्रपति और राज्य सभा के चेयरमैन के रूप में की गयी थी। 1987 में उपराष्ट्रपति के साथ साथ, डॉ शंकर जी राज्यसभा के अध्यक्ष भी रहे।  उपराष्ट्रपति पद पर वे 5 साल तक विराजमान रहे।

इसके बाद 1992 में जब आर. वेंकटरमण का कार्यकाल समाप्त हुआ, तब डॉ शंकर दयाल  जी को राष्ट्रपति पद से नवाजा गया। 1992-97 तक शंकर दयाल जी राष्ट्रपति पद पर कार्यरत रहे।

भोपाल की ‘गुलिया दाई की गली’ से राष्ट्रपति भवन तक का डॉक्टर शर्मा का सफर बहुतों को रोमांचित करता है, परंतु यह निर्विवाद सत्य है, कि वे बाल्यकाल से ही मेधावी थे। उनके समकक्ष असाधारण शैक्षणिक योग्यता के धनी आज की राजनीतिक प़ीढी में तो बिरले ही मिलते है। Shankar Dayal Sharma Biography in Hindi

 

पुरस्कार (Shankar Dayal Sharma Award) :

  • सृन्गेरीके शंकराचार्य ने डॉ शंकर दयाल शर्मा को “राष्ट्र रत्नम” उपाधि दी थी।
  • इंटरनेशनल बार एसोसिएशन, ने कानून की पढाई और उसमें योगदान के लिए डॉ शंकर दयाल को ‘दी लिविंग लीजेंड ऑफ़ लॉ’ के अवार्ड  से सम्मानित किया था।
  • इसके अलावा डॉ शंकर को देश के कई बड़े कॉलेज के द्वारा डोक्टरेट की उपाधि दी गई है, इसके साथ ही उन्हें गोल्ड मेडल से भी सम्मानित किया गया है।

मृत्यु (Shankar Dayal Sharma Death) :

अपने जीवन के आखिरी पांच सालों में दयाल जी को स्वास्थ्य संबंधी बहुत परेशानियाँ हुई। 26 दिसंबर, 1999 को दिल का दौरा पड़ने के कारण डॉ शंकर दयाल जी का देहांत हो गया था। उनका दाह संस्कार दिल्ली में विजय घाट के पास कर्म भूमि में हुआ था।

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