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स्वामी विवेकानंद की जीवनी | Swami Vivekananda Biography in Hindi

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Swami Vivekananda
Swami Vivekananda
पूरा नाम नरेंद्रनाथ विश्वनाथ दत्त
जन्म        12 जनवरी 1863
जन्मस्थान  कलकत्ता, पश्चिम बंगाल, भारत
पिता        विश्वनाथ दत्त
माता        भुवनेश्वरी देवी
शादी अविवाहित
शिक्षाबी. ए.
व्यवसायभारतीय भिक्षु, दार्शनिक
नागरिकताभारतीय

 

भारत के आध्यात्मिक गुरु स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda Biography in Hindi) :

स्वामी विवेकानन्द वेदांत के प्रख्यात और प्रेणनादायक गुरु थे। स्वामी विवेकानन्द ने अमेरिका के शिकागो में 1813 में सनातन धर्म का आयोजन हुआ था। उस में विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से नेतृत्व किया था। स्वामी विवेकानन्द ने भारत के वेदांत को अमेरिका और यूरोप जैसे बड़े देश में पहुँचाया और वह कई भासन भी किये। स्वामी विवेकानन्द रामकृष्ण संस्था अधिस्थापक है। जो आज भी अपना काम बखूबी कर रहा है। वे रामकृष्ण परमहंस के पहले शिष्य थे। Indian Spiritual Guru Swami Vivekananda

 

प्रारंभिक जीवन (Swami Vivekananda Early Life) :

स्वामी विवेकानन्द का वास्तविक नाम नरेन्द्रनाथ था।उनका जन्म 12th जनवरी 1863 को कलकत्ता के पश्चिम बंगाल में हुआ था। स्वामी विवेकानन्द के पिता का नाम श्री विश्वनाथ दत्त था। वे कलकत्ता के हाईकोर्ट में एक बहोत ही प्रख्यात वकील थे और इनकी माता का नाम श्रीमती भुवनेश्वरी देवीजी था। वे एक धार्मिक विचारों वाली महिला थीं। वे बचपन से बड़े बुध्दिमान थे, और इनकी पहले से ही परमात्मा से मिलने की लालसा भी तीव्र थी। स्वामी विवेकानन्द पढाई में तेज थे वे जो कुछ भी पढ़ते उसे एक बार में ही याद हो जाता था और कभी नहीं भूलते थे।

स्वामी विवेकानन्द जी की माँ को धार्मिक प्रवृति पर लगाव के कारण नियमित पूजा पाठ और कथा का आयोजन करते थे। इस वजह से स्वामी विवेकानन्द को महाभारत, रामायण की आदि कथा वे बहुत ही ध्यान से सुनते थे, जिस के कारण कभी कभी घर पर आये पंडितो से ऐसा सवाल पूछ लेते थे की जिसका जवाब उन के पास नही होता था।

 

शिक्षा (Swami Vivekananda Education) :

स्वामी विवेकानन्द जी ने 1879 में, प्रेसीडेंसी कॉलेज की परीक्षा में पहला नंबर लाने वाले वे पहले स्टूडेंट बने। उन्होनें 1881 में ललित कला की परीक्षा पास की थी वहीं 1884 में उन्होनें कला विषय से स्नातक की डिग्री हासिल कर ली थी। स्वामी विवेकानन्द जी ने 1884 में बीए की परीक्षा पास करर ली थी और फिर उन्होनें LLB की पढ़ाई की। Swami Vivekananda Biography in Hindi

 

स्वामी विवेकानंद और रामकृष्ण परमहंस (Swami Vivekananda and Ramakrishna Paramahamsa) :

स्वामी विवेकानंद जी को ईश्वर को पाने रूपी पचपन से ही थी। इसी लिए वे ब्रह्म समाज के महर्षि देवेन्द्र नाथ ठाकुरजी से मिले और फिर स्वामी विवेकानंद ने उनसे सिर्फ एक प्रश्न किया की “ठाकुर जी क्या आपने कभी ईश्वर को देखा है?”। इस प्रश्न को सुनकर ठाकुर जी आश्चर्यचकित हो गये और फिर उन्होंने कहा की अगर सच में तुम परमात्मा के दर्शन करना चाहते हो, तो तुम्हे रामकृष्ण परमहंस के शरण में जाना चाहिए।

महर्षि देवेन्द्र नाथ ठाकुरजी की यह बात सुनकर स्वामी विवेकानंद ने रामकृष्ण परमहंस के पास जाने का फैसला किया, उस वक्त रामकृष्ण परमहंस कोलकता में माँ दक्षिणेश्वर काली के मन्दिर में पुजारी थे। इस प्रकार स्वामी विवेकानंद जी रामकृष्ण परमहंस जी के पास पहुंचे और स्वामी विवेकानंद जी ने उन्हें भी वही सवाल किया की “क्या आपने ईश्वर को देखा है?”

रामकृष्ण परमहंस यह बात सुनकर जवाब दिया की  “हां मैंने परमात्मा को देखा है और परमात्मा से बात भी कि है और ये ऐसा ही अनुभव है जैसे तुम्हे देख रहा हु और तुमसे बात कर रहा हु”।

स्वामी जी यह बात सुनकर स्वामी विवेकानंद रामकृष्ण से इतना प्रभावित हुए की उन्हें अपना धर्म गुरु मान लिया और इस तरह स्वामी विवेकानंद जी फिर हमेसा उनसे मिलने माँ दक्षिणेश्वर काली माता के मन्दिर में रामकृष्ण से मिलने के लिए जाने लगे, और इस तरह स्वामी विवेकानन्द और रामकृष्ण परमहंस जी के बीच में गुरु शिष्य का रिश्ता बन गया।

 

भारत भ्रमण (Swami Vivekananda Trips) :

स्वामी विवेकानंद जी ने मात्र 25 वर्ष की उम्र में भगवा वस्त्र धारण कर संत बन गये और फिर पूरे भारत की यात्रा के लिए पैदल ही निकल पड़े। स्वामी विवेकानंद जी अपनी इन यात्रा के दौरान अयोध्या, मथुरा, काशी, वृन्दावन जैसे कई तीर्थ स्थानों और पाक जग्यो पर गये। उन्हें इस यात्रा के चलते भारत के अलग-अलग लोगो से मिलने हुए उनकी संस्कृति जानने का मौका मिला। 

स्वामी विवेकानंद ने जोसफिन मक्लोइड, सारा बुल और भगिनी निवेदिता के साथ मिलकर कश्मीर के साथ भारत के कई और भाग की यात्रा कि और वह के लोगों, इतिहास और संस्कृति को समाज ने की कोशिश की उन्होंने काफी हद तक उन्हें समजा और उन्होंने उनमे जागरूकता फ़ैलाने का प्रयास किया।

इसी तरह स्वामी विवेकानंद को अपनी इन साडी यात्रा से ये ज्ञात हुआ की भारत के लोगो को आध्यात्मिक की ज्ञान की नहीं परन्तु विकास की ज्यादा जरूरत है। जिससे इनकी तमाम बुराईयों और कृतिओ को खत्म किया जा सकता है। Swami Vivekananda Biography in Hindi

 “उठो, जागो और तब तक नही रुकना जबतक लक्ष्य प्राप्त न हो जाये” 

शिकागो में भाषण (Swami Vivekananda Speech in Chicago) :

स्वामी विवेकानंद ने भारत की समस्या और गरीबी खत्म करने के लिए अमेरिका की यात्रा करने का निर्णय लिया और फिर उन्होंने 1893 में शिकागो में आयोजित विश्व धर्म सभा में भारत की और से प्रतिनिधि के रूप में भासन करने का मौका मिला। उस समय में भारत को अमेरिका, यूरोप जैसे बड़े देशो में बहुत ही गरीब देश की नजर से देखा जाता था जिसके चलते कई लोगो ने कोशिश की की विश्व धर्म सभा में स्वामी विवेकानंद को भासन करने का मौका ही न मिले।

लेकिन फिर भी एक अमेरिकी अतिथि आचार्य के सुझाव के बाद स्वामी विवेकानंद को उस सभा में भासन करने का मौका मिला। स्वामी विवेकानंद ने अपने भाषण की शुरुआत हिन्दी में की और उनका पहला ही वाक्य “मेरे प्यारे अमेरिकी भाईयो और बहनों” था इस वाक्य से वे पूरे अमेरिका में छा गए और इसे सुनकर लोगो में तालियों की गूंज सुनाई देने लगी और इस तरह स्वामी विवेकानंद अपने भाषण के द्वारा पूरे अमेरिका में छा गए।

उसके बाद करीब 3 साल तक स्वामी विवेकानंद अमेरिका में ही रहे और वहा के लोगो को आध्यात्मिक और तत्वज्ञान का निराला ज्ञान दिया, इसके बाद वे भारत लौट आये। उसके बाद उन्होंने श्रीलंका की यात्रा की और इस समय के चलते उन्होंने वहा के लोगो को अध्यात्म की ज्ञान से रूबरू कराया ।

 

योगदान और कार्य (Swami Vivekananda Contribution and Work) :

स्वामी विवेकानंद ने 1st मई 1897 को रामकृष्ण मिशन का प्रतिस्थापन किया। जिसका उदेश्य नये विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का था। इसके चलते उन्होंने कई अस्पताल, स्कूल, कॉलेज की स्थापना की और कई सामाजिक कार्यो को बढ़ावा दिया। स्वामी विवेकानंद ने 1898 में बेलूर मठ की भी स्थपाना की। जिसका मुख्य उद्देश्य भारतीय जीवन दर्शन का प्रचार करना था।

स्वामी विवेकानंद अंग्रेजी शिक्षण के विरोधी थे उनका मनाना था की यदि भारत को विकसित होना है तो अपने धर्म शास्त्र और अपनी भाषा के जरिये ही आगे बढ़ा जा सकता है, इसी हेतु को पूरा करने के स्वामी विवेकानंद जी ने रामकृष्ण मिशन की मदद से अनेक स्कूल, कालेजो का निर्माण भी किया। आज भी रामकृष्ण मिशन अपने हेतु पर कायम हे हुए अपना कार्य कर रहा है।

 

मृत्यु (Swami Vivekananda Death) :

स्वामी विवेकानंद 39 वर्ष की उम्र में दमा और अस्थमा जैसी शारीरिक बीमारी के चलते उनकी 4th जुलाई 1902 को मृत्यु हो गयी। उनके शिष्यों ने उनकी याद में वहाँ एक मंदिर बनवाया। इतना ही नहीं परन्तु पुरे विश्व में विवेकानंद और उनके गुरु रामकृष्ण की याद में और उनके संदेशों के प्रचार के लिए कुल 130 से भी ज्यादा केंद्रों की स्थापना की। Swami Vivekananda Biography in Hindi

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