The Amazing Facts

उधम सिंह की जीवनी | Udham Singh Biography in Hindi

SHARE
, / 1390 0
Udham Singh
Udham Singh
नाम शहीद-ए-आज़म सरदार उधम सिंह
जन्म26 दिसंबर 1899
जन्मस्थानसुनाम, भारत
पिता  सरदार तहल सिंह
मातानारायण कौर
पत्नी गुरमेज कौर
पेशा  क्रांतिकारी
धर्म  हिंदू
वंश  कंबोज
नागरिकताभारतीय

 

शहीद-ए-आजम सरदार उधम सिंह (Udham Singh Biography in Hindi) :

उधम सिंह एक महान क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सेनानी थे। जिनके दिल में सिर्फ और सिर्फ देश प्रेम की भावना और अंग्रेजों के प्रति अगम्य क्रोध भरा हुआ था। उधम सिंह ने प्रतिशोध की भावना के फलस्वरुप पंजाब के पूर्व राज्यपाल माइकल ओ ड्वायर की हत्या कर दी थी। कहा जाता है, की यह हत्या उन्होंने में अमृतसर में हुए, जलियांवाला बाग़ नरसंहार का बदला लेने के लिए किया।

भारतीय स्वतंत्रता अभियान में उधम सिंह एक जाना माना चेहरा है। स्थानिक लोग उन्हें शहीद-ए-आजम सरदार उधम सिंह के नाम से भी जानते है। 1995 में मायावती सरकार ने उत्तराखंड के (उधम सिंह नगर) एक जिले का नाम उन्ही के नाम पर रखा है। Shaheed-e-Azam Sardar Udham Singh

 

प्रारंभिक जीवन  (Udham Singh Early Life) :

शहीद उधम सिंह का जन्म 26 दिसम्बर, 1899 को शेर सिंह के नाम से भारत के पंजाब राज्य के संगरूर जिले के सुनाम में हुआ था। उनके पिता सरदार टहल सिंह उपल्ली गाँव के रेल्वे क्रोसिंग वॉचमैन थे। उनके पिता की मृत्यु के बाद सिंह और उनके बड़े भाई मुक्ता सिंह को अमृतसर के पुतलीघर के सेंट्रल खालसा अनाथालय में डाला गया।

 

शिक्षा (Udham Singh Education) :

अनाथालय में सिख दीक्षा संस्कार देकर उनको उधम सिंह नाम दिया गया। 1918 में मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात 1919 में उन्होंने अनाथालय छोड़ दिया। Udham Singh Biography in Hindi

 

उधम सिंह की क्रांतिकारी गतिविधियां (Udham Singh Revolutionary Activities) :

13 अप्रैल 1919 को स्थानीय नेताओ ने अंग्रेजो के रोलेट एक्ट के विरोध में जलियावाला बाग़ में एक विशाल सभा का आयोजन किया था। इस रोलेट एक्ट के कारण भारतीयों के मूल अधिकारों का हनन हो रहा था। अमृतसर के जलियावाला बाग़ में उस समय लगभग 20000 निहत्थे प्रदर्शनकारी जमा हुए थे। उस समय उधम सिंह उस विशाल सभा के लिए पानी की व्यवस्था में लगे हुए थे।

अंग्रेज जनरल डायर को जलियावाला बाग़ में विद्रोह का पता चला तो उसने विद्रोह का दमन करने के लिए अपनी सेना को बिना किसी पूर्व सुचना के निहत्थे प्रदर्शनकारीयो पर अंधाधुंध गोलिया चलाने का आदेश दिया। अब डायर के आदेश पर डायर की सेना ने 15 मिनट में 1650 राउंड गोलिया चलाई थी। Udham Singh Biography in Hindi

उधम सिंह उस नरसंहार में जीवित बच गये थे। और उन्होंने अपनी आँखों से ये नरसंहार देखा था, जिससे उन्हें भारी आघात लगा। उधम सिंह उस समय लगभग 11-12 वर्ष के थे। और इतनी कम उम्र में उन्होंने संकल्प लिया कि “जिस डायर ने क्रूरता के साथ मेरे देश के नागरिको की हत्या की है। इस डायर को मै जीवित नही छोडूंगा और यही मेरे जीवन का आखिरी संकल्प है। अब उधम सिंह अपने संकल्प को पूरा करने के लिए क्रांतिकारी दलों में शामिल हो गये। 1924 को वो गदर पार्टी में शामिल हो गये, और भगत सिंह के पद चिन्हों पर चलने लगे।

इस घटना उधम सिंह के जीवन पर काफी प्रभाव पड़ा। उधम सिंह के अनुसार पंजाब के गवर्नर माइकल ओ’डायर ने इन आक्रमणकारियों की सहायता की थी, और उनके अनुसार इस नरसंहार के वही जिम्मेदार थे। इसके बाद उधम सिंह क्रांतिकारी राजनीती में शामिल हो गए, और भगत सिंह और उनके क्रांतिकारी समूह का उनपर काफी प्रभाव पड़ा। 1924 में सिंह ग़दर पार्टी में शामिल हो गये, और विदेशो में जमे भारतीयों को जमा करने लगे।

 

जलियांवाला बाग नरसंहार का बदला (Udham Singh Revenge of Jallianwala Bagh ) :

उन्होंने विदेश जाने का विचार किया क्योंकि उनको वहा से असला गोला बारूद लाना था। इसके लिए उनके पास धन नही था तो उन्होंने धन इकट्ठा करने के लिए बढई का काम करना शुरू कर दिया था। लकड़ी का काम करते करते उन्होंने इतना पैसा कमा लिया कि वो विदेश चले  गये।1927 में भगत सिंह के आदेश पर वे भारत वापिस आ गए और अपने साथ वे 25 सहयोगी, रिवाल्वर और गोलाबारूद भी ले आए।

इसके तुरंत बाद उन्हें बिना लाइसेंस के हथियार रखने के लिए गिरफ्तार किया गया। इसके बाद उनपर मुकदमा चलाया गया, और उन्हें पाँच साल की सजा देकर जेल भेजा गया। 1931 में जेल से रिहा होने के बाद, सिंह के अभियान पर पंजाब पुलिस निरंतर निगरानी रख रही थी। इसके बाद वे कश्मीर चले गये, और वहाँ वे पुलिस से बचने में सफल रहे, और भागकर जर्मनी चले गए। 1934 में सिंह लन्दन पहुचे और वहाँ उन्होंने माइकल ओ’डायर की हत्या करने की योजना बनायीं थी।

पुलिस को चकमा देकर पहले कश्मीर पहुचे और वहा से जर्मनी चले गये। 1934 से जर्मनी से लन्दन पहुच गये और लन्दन में जाकर वहा पर भी उन्होंने एक होटल में वेटर का काम किया, ताकि कुछ ओर पैसे इकट्ठे कर बन्दुक खरीदी जा सके। उनको ये सब काम करने में पुरे 21 साल लग गये फिर भी उनके मन में प्रतिशोध की ज्वाला कम नही हुयी थी। 21 साल तक केवल अपने संकल्प को पूरा करने के लिए जीवित थे, और अब वो मौका आ गया था। 

 

माइकल ओड्वायर की हत्या (Udham Singh Murder of Michael Odwyer
) :

13 मार्च, 1940 को लन्दन के एक शहर किंग्स्टन में जनरल डायर का रक बड़ा कार्यक्रम चल रहा था। उस सामरोह में जनरल डायर का सम्मान किया जा रहा था। उस कार्यक्रम में उधम सिंह पहुचे और अपनी जेब में रिवोल्वर छुपाकर एक सीट पर बैठ गये। जहां माइकल ओडायर को उसके किए का दंड देने के लिए तैयार बैठा था। Udham Singh Biography in Hindi

जैसे ही वह बैठक का वक्त समीप आया वैसे ही उधम सिंह ने आगे बढ़कर जनरल डायर को मारने के लिए दो शॉर्ट दाग दिए, जिससे जनरल डायर की घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई। इस शूटिंग में दुसरे लोग भी घायल हुए, जिनमे मुख्य रूप से लुइस डेन, लॉरेंस डुंडा और चार्ल्स कोच्राने-बैल्लि इत्यादि शामिल थे। शूटिंग के बाद सिंह ने जरा भी भागने की कोशिश नही की, और उन्हें उसी जगह पर ब्रिटिश सेना ने पकड़ लिया था।

 

सम्मान और विरासत (Udham Singh The Honor and Heritage) :

  • सिखों के हथियार जैसे, चाकू, डायरी और शूटिंग के दौरान उपयोग की गई, गोलियों को स्कॉटलैंड यार्ड में ब्लैक म्यूजियम में उनके सम्मान के रूप में रखा गया है। 
  • सिंह को समर्पित एक दान दिया जाता है, जिसे बिर्मिंघम के सोहो रोड से संचालित किया जाता है। Udham Singh Biography in Hindi
  • अक्टूबर, 1995 में मायावती सरकार ने उत्तराखंड के (उधम सिंह नगर) एक जिले का नाम उन्ही के नाम पर रखा है।
  • राजस्थान के अनूपगढ़ में शहीद उधम सिंह के नाम पर चौकी भी मौजूद है।
  • अमृतसर के जलिया वाले बाग के नजदीक में सिंह लोगों को समर्पित एक म्यूजियम भी बनाया गया है।
  • एशियन डब फाउंडेशन ने अपने 1998 के ट्रैक में सिंह को “हत्यारा” बताया।

 

मृत्यु (Udham Singh Death) :

उधम सिंह को 4 जून, 1940 को जनरल डायर के मृत्यु का अपराधी ठहराया गया, और 31 जुलाई, 1940 को लंदन के “पेंटोनविले जेल” में उनको फांसी की सजा दी गई।

उधम सिंह जी के मृत शरीर के अवशेष को उनकी पुण्यतिथि 31 जुलाई 1974 के दिन भारत को सौंप दिया गया था। उधम सिंह जी की अस्थियों को सम्मान पूर्ण भारत वापस लाया गया। और उनके गांव में उनकी समाधि को बनाया गया।

 

कहानी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें  Facebook पर ज्वॉइन  करें…

Leave A Reply