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विजया लक्ष्मी पंडित की जीवनी | Vijaya Lakshmi Pandit Biography in Hindi

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Vijaya Lakshmi Pandit Biography In Hindi
Vijaya Lakshmi Pandit
नाम विजया लक्ष्मी पंडित
जन्म       18 अगस्त 1900
जन्मस्थान  इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश
पिता       मोतीलाल नेहरु
माता स्वरूपरानी नेहरु
पतिरंजित सीताराम पंडित
पुत्रनयनतारा सहगल
व्यवसायपूर्व भारतीय राजदूत संयुक्त राज्य अमेरिका
पुरस्कारपद्म विभूषण
नागरिकताभारत, ब्रिटिश राज

 

भारतीय राजदूत विजया लक्ष्मी पंडित (Vijaya Lakshmi Pandit Biography in Hindi) :

संयुक्त राष्ट्र संघ महासभा की प्रथम महिला अध्यक्ष विजया लक्ष्मी पंडित भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की बहन थीं। वे एक ब्रिटिश राज में कैबिनेट पद पर पहुंचने वाली पहली महिला भी वही थीं। 1937 में उनका निर्वाचन यूनाइटेड प्रॉविंसेज के विधानमंडल में हुआ। उन्हें स्थानीय स्वप्रशासन और जन स्वास्थ्य विभाग में मंत्री बनाया गया। Indian Ambassador Vijaya Lakshmi Pandit

 

प्रारंभिक जीवन (Vijaya Lakshmi Pandit Early Life) :

श्रीमती विजयलक्ष्मी पण्डित का जन्म 18 अगस्त 1900 को उत्तर प्रदेश के इलाहावाद में हुआ था। विजय लक्ष्मी के पिता मोतीलाल नेहरू एक धनि बैरिस्टर थे। आज़ादी के लिये संघर्ष करते समय उन्होंने दो बार राष्ट्रिय कांग्रेस की अध्यक्ष बनकर सेवा की, उनकी माता स्वरूपरानी नेहरू की दूसरी पत्नी थी, और जवाहरलाल नेहरू उनके भाई थे। 

उन्होंने घर पर रहकर अंग्रेजी शिक्षा प्राप्त की थी। वह शिक्षा के साथ-साथ राजनीति साहित्य, घुड़सवारी आदि में भी रुचि लेती थीं। उनका परिवार राजनीतिक गतिविधियों का केन्द्र था। उन पर उसका प्रभाव पड़ना स्वाभाविक था।

 

 

शादी (Vijaya Lakshmi Pandit Marriage) :

1921 में उनका विवाह रंजित सीताराम पंडित से हुआ, जो काठियावड के सफल महाराष्ट्रियन बैरिस्टर थे और अपनी स्कूल के विद्वान थे। उनकी 3 पुत्रियां चन्द्रलेखा, नयनतारा और रीता थीं। Vijaya Lakshmi Pandit Biography in Hindi

 

महात्मा गांधीजी से मुलाकात (Vijaya Lakshmi Pandit Meeting Gandhi) :

महात्मा गांधीजी से उनकी पहली मुलाकात 1919 में हुई थी। गांधीजी के जीवन पर्यन्त निकट रही। उनसे वे इतनी अधिक प्रभावित थी कि कई बातो में मतभेद के बावजूद उनके निर्देश के बिना कोई कदम नही उठाती थी। असहयोग आन्दोलन के दिनों पिता और भाई के जेल जाने पर आनन्द भवन जो कांग्रेस का गढ़ था के संचालन का भार उनके कन्धो पर ही आ पड़ा था।

उनके मन में साधारण गृहिणी बनकर अपना जीवन व्यतीत करने की अपेक्षा देश की सेवा में जीवन देने का ऐसा विचार आया कि सर्वप्रथम 1930 के सविनय अवज्ञा आन्दोलन में गांधीजी के साथ जेलयात्रा पर गयीं।

 

राजनितिक जीवन (Vijaya Lakshmi Pandit Political Career) :

1934 में इलाहाबाद म्यूनिसिपल बोर्ड की सम्मानित सदस्य निर्वाचित हईं, साथ ही शिक्षा समिति का अध्यक्ष पद भी उन्हें प्राप्त हुआ। 1937 के चुनाव में विजयलक्ष्मी उत्तर प्रदेश विधानसभा की सदस्य चुनी गयी। उन्होंने भारत की प्रथम महिला मंत्री के रूप में शपथ ली। मंत्री स्तर का दर्जा पाने वाली भारत की वह प्रथम महिला थी।

उन्होंने गांवों की दशा सुधारने के लिए पंचायत राज व्यवस्था अधिनियम भी पारित करवाया। 1940 के सत्याग्रह आन्दोलन में 4 माह जेल में बिताये। 1942 के ”भारत छोड़ो आन्दोलन” में उन्हें अस्वस्थतावश 9 माह उपरान्त रिहा कर दिया गया।

रिहा होते ती उन्होंने अकाल पीड़ित भारतीयों की सेवा हेतु ”बंगाल राहत कोष” भी गठित किया। 1944 में उन्हें अपने पति के स्वर्गवास का दुःख झेलना पड़ा। वह अखिल भारतीय महिला सम्मेलन की अध्यक्ष भी रही थीं। 1945 में विजयलक्ष्मी अमेरिका गयी और अपने भाषणों के द्वारा उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के पक्ष में जोरदार प्रचार किया।

देश स्वतंत्र होने के बाद विजयलक्ष्मीजी ने 1949 से 1952 तक अमेरिका में भारतीय राजदूत के पद पर अपनी सेवाएं प्रदान की। 

दक्षिण अफ्रीकी सरकार के द्वारा भारतीयों पर होने वाले अत्याचारों का ऐसा मार्मिक वर्णन किया कि अमेरिका के समाचार पत्रों के मुखपृष्ठ पर उन्हें साहसिक नारी के रूप में स्थान दिया गया। 1953-1954 में संयुक्त राष्ट्र संघ की साधारण सभा की अध्यक्षता की।

1954 से 1961 तक ब्रिटेन में उच्चायुक्त तथा स्पेन और आयरलैण्ड के राजदूतों के पद पर अपनी सेवाएं प्रदान की। 1962 में महाराष्ट्र की गवर्नर रहीं। 1967 में लोकसभा सीट फूलपुर से निर्वाचित हुईं। 1979 में उन्हें UN ह्यूमन राइट्स कमीशन में भारत का प्रतिनिधित्व घोषित किया और तभी से वे समाजसेवा ही कर रही है।

1975 में उन्होंने इंदिरा गांधी के आपातकाल के विरुद्ध जनता पार्टी के समर्थन में खुलकर प्रचार किया। इसके बाद इंदिरा गांधी और उनके बीच कटुता इतनी अधिक बढ़ी कि इंदिरा गांधी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद उनकी घोर उपेक्षा करनी शुरू कर दी थी, जिससे व्यथित होकर उन्होंने राजनीति से लगभग सन्यास ही ले लिया था।

 

मृत्यु (Vijaya Lakshmi Pandit Death) :

अपने अंतिम समय में वे प्रचार से दूर देहरादून के अपने घर में कुछ आत्मीय मित्रो और लडकियों के साथ शांत जीवन गुजार रही थी। 01 दिसम्बर 1990 को उनका निधन हो गया। Vijaya Lakshmi Pandit Biography in Hindi

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