The Amazing Facts

, / 2198 0

चित्तौड़गढ़ किला का इतिहास | History of Chittorgarh Fort

SHARE
Chittorgarh Fort
Chittorgarh Fort

 

चित्तौड़गढ़ किला – राजस्थान (History of Chittorgarh Fort)

चित्तौड़गढ़ का किला बहुत ही आलीशान और शानदार संरचना है। जो चित्तौड़गढ़ के भव्य इतिहास को बताता है। जो राजस्थान शहेर का प्रसिद्ध टूरिज्म स्थल है। इस चित्तौड़गढ़ किले का निर्माण वहा के राजा मौर्य ने 7वीं शताब्दी के दौरान किया था। यह शानदार किला 180 मीटर ऊँची पहाड़ी पर स्थित है। और 700 ऐकर में फैला हुआ है। यह वास्तुकला सिद्धि का एक प्रतीक माना जाता है। जो कई तबाही के बाद भी बचा हुआ है। Chittorgarh Fort in Rajasthan

चित्तौड़गढ़ किले के उपर सबसे ज्यादा सिसोदिया वंश ने ही राज किया था। और इस वंश में कई प्रतापी राजा हुए, जैसे की राजा रतन सिंह, महाराणा सांगा, महाराणा कुंभा चित्तौड़गढ़ के महान राजाओं ने राज किया था। इन राजाओं ने चित्तौड़गढ़ को एक अलग पहचान दिलवाई थी। और चित्तौड़गढ़ के महाराणा प्रताप का नाम आज भी बड़े शान से लिया जाता है। History of Chittorgarh Fort in Hindi

 

पौराणिक कथाओं में चित्तौड़गढ़ :

  • इस किले कूल 7 लोहे के दरवाज़े हैं। और इस दरवाजे पर हिंदू देवताओं के नाम लिखे गए है। इस किले में कई मंदिरों और रानी पद्मिनी और महाराणा कुंभा का आलीशान महल हैं। किले में कई जल निकाय हैं। जिन्हें बारिश से पानी मिलता रहता है।
  • एक लोककथा के अनुसार एक महत्वपूर्ण चरित्र भीम ने एक साधु से अमरत्व का रहस्य जानने के लिए इस स्थान की यात्रा की थी।
  • लेकिन वह अपनी आतुरता के कारण अपने कोशिश में सफल नहीं हो पाए। उसने क्रोध में जमीन पर पैर पटका जिसके कारण इस स्थान पर एक तालाब बना जो “भीम लात” के नाम से जाना जाता है।

  चित्तौड़गढ़ के आसपास के पर्यटन स्थल (Tourist Places in Around Chittorgarh) :

  • इस राजस्थान शहर का आकर्षण चित्तौड़गढ़ का किला है। जो 180 मीटर ऊँची पहाड़ी पर स्थित है। इस किले में कई प्रतिमा है। जिनमें से सब के निर्माण के पीछे कुछ कहानी है।
  • फतेह प्रकाश महल एक आकर्षक ऐतिहासिक स्थान है। जो महाराणा फ़तेह सिंह द्वारा बनवाया गया था। महल के अंदर श्री भगवान गणेश की एक सुंदर मूर्ति, फ़व्वारा और सुंदर आकृति देखने को मिलेगी जो पिछले युग की कला को दर्शाते हैं।
  • यहाँ इस स्थान में कई धार्मिक मंदिर हैं। जैसे की सांवरियाजी मंदिर, तुलजा भवानी मंदिर, जोगिनिया माता जी मंदिर और कुंडिया मंदिर शामिल है।
  • प्रकृति का पूर्ण रूप से आनंद लेने के लिए टूरिस्ट बस्सी वन्य जीवन अभ्यारण्य का भ्रमण कर सकते हैं। जो 50 किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है।
  • “सीतामाता अभ्यारण्य और भैन्स्रोगढ़ वन्य जीवन अभ्यारण्य” जिव और वनस्पतियों के लिए पर्यटकों में बहुत प्रसिद्ध हैं।
  • पर्यटक जो इस शहर के बारे में और इसकी संस्कृति के बारे में जानना चाहते हैं। वे “पुरातत्व संग्रहालय” की यात्रा कर सकते हैं। जहाँ सुंदर मूर्तियाँ, दुर्लभ चित्र मूर्तियाँ और प्राचीन युग के भित्ति चित्र देख ने को मिलते हैं।
  • म्यूज़ियम में कुछ मूर्तियाँ मौर्य राजवंशों के रहस्यमय से जुड़ी हुई हैं। बीजापुर में स्थित एक पुराने किले में टूरिस्ट भ्रमण कर सकते हैं। क्योकि जिसे होटल में परिवर्तित कर दिया गया है। प्रतापगढ़ के पास 16 वीं शताब्दी का देवगढ़ किला भी एक प्रचलित पर्यटन स्थल है। यह स्थल अनेक मंदिरों और महलों के लिए जाना जाता है।
  • मेनल एक छोटा सा शहेर है। जो चित्तौड़गढ़ से 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। अपने मंदिरों की वास्तुकला के कारण यह स्थान “मिनी खजुराहो” के नाम से भी जाना जाता है।
  • इस स्थान पर खुदाई करने के बाद कई बौद्ध मंदिर मिले जिसमे 12 वीं शताब्दी का मंदिर है। अपने सुंदर दृश्यों के कारण यह स्थान एक प्रचलित पिकनिक स्थल बन गया है।
  • इसके अल्वा पर्यटक “गायमुख कुंड” के भ्रमण की योजना भी बना सकते हैं जिसका आकार इसके नाम के अनुसार गाय के मुख के समान है। इस जलाशय के पास रानी बिंदर का टनल है। जो शहर का प्रचलित आकर्षण भी है।

   चित्तौड़गढ़ का मौसम (Chittorgarh Weather) :

  • गर्मियों के दौरान इस स्थान का मौसम बहुत गर्म होता है। और अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक रहता है।
  • वर्षाऋतु के दौरान रुक कर होने वाली वर्षा के कारण हवा नम होती है। इस क्षेत्र में प्रति वर्ष 60 सेमी।से 80 सेमी. तक वर्षा होती है।
  • इस स्थान की यात्रा के लिए ठंड का मौसम सबसे अधिक माना जाता है। क्योंकि तापमान 11 डिग्री सेल्सियस और 28 डिग्री सेल्सियस के बीच होता है।

_

आगे जानिए महाराणा प्रताप के इतिहास

_

कहानी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर ज्वॉइन करें…

Leave A Reply