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महावीर स्वामी का इतिहास | Mahavir Swami History in Hindi

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Mahavir Swami History In Hindi
Mahavir Swami
पूरा नाम वर्धमान (महावीर )
जन्म 599 ई.पूर्व (चैत्र शुक्ला)
जन्मस्थान वैशाली
पिता         सिद्धार्थ
माता त्रिशिला
कार्यधार्मिक तीर्थंकर, संत

 

भगवान महावीर स्वामी (Mahavir Swami History in Hindi) :

महावीर स्वामी जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर अहिंसा के मूर्तिमान प्रतीक थे। उनका जीवन त्याग और तपस्या से ओतप्रोत था। उन्हें हिंसा, पशुबलि, जाति-पाँति के भेदभाव जिस युग में बढ़ गए, उसी युग में पैदा हुए, महावीर और बुद्ध, दोनों ने इन चीजों के खिलाफ आवाज उठाई। दोनों ने अहिंसा का भरपूर विकास किया। किसी भी जैन के लिए महावीर किसी भगवान से कम नहीं है। उनके दर्शन करने को गीता के ज्ञान के समान माना गया है। तप से ज्ञान अर्जित कर लेने के बाद भगवान महावीर ने पूरे भारतवर्ष में अगले 30 सालों तक जैन धर्म का प्रचार प्रसार किया। Great God  Mahavir Swami

 

प्रारंभिक जीवन (Mahavir Swami Early Life) :

महावीर स्वामी का जन्म 599, ईसा पूर्व में चैत्र महीने के 13 वें दिन शुक्ल पक्ष में हुआ था। महावीर स्वामी का बचपन नाम वर्धमान था। कुछ लोगों का कहना है, कि महावीर स्वामी का जन्म क्षत्रियकुंड राज्य में हुआ था। भगवान महावीर, राजा सिद्धार्थ और रानी त्रिशला के पुत्र थे। Mahavir Swami History in Hindi

जब रानी त्रिशला गर्भवती थी, तब उन्होंने जैन ग्रंथों में 14 सपनों के बारे में पढ़ा था। जिसे पढ़कर महान पुत्र की प्राप्ति होती हैं। उनके माता-पिता जैन तीर्थंकर पार्श्वनाथ के भक्त थे। वर्धमान बचपन में शांत परन्तु बहादुर बालक थे। उन्होंने अपनी बहादुरी कई बार दिखाकर अपने परिवार को मुश्किल हालातों से बचाया था। एक राजकुमार होने के बावजूद भी वह साधारण जीवन पसंद करते थे।

 

शादी (Mahavir Swami Marriage) :

दिगम्बर परम्परा के अनुसार महावीर बाल ब्रह्मचारी थे। भगवान महावीर शादी नहीं करना चाहते थे, क्योंकि ब्रह्मचर्य उनका प्रिय विषय था। भोगों में उनकी रूचि नहीं थी। परन्तु इनके माता पिता शादी करवाना चाहते थे। दिगम्बर परम्परा के अनुसार उन्होंने इसके लिए मना कर दिया था। श्वेतांबर परम्परा के अनुसार इनका विवाह यशोदा नामक सुकन्या के साथ सम्पन्न हुआ था। और कालांतर में एक कन्या भी प्राप्त हुई, जिसका नाम प्रियदर्शिनी था। Mahavir Swami History in Hindi

 

महावीर स्वामी का जीवन परिचय (Life of Mahavir Swami) :

जब महावीर 28 साल के थे, तब उनके माता-पिता की मृत्यु हो गयी थी। बाद में उनके बड़े भाई ने अपने पिता की राजगद्दी संभाली, वर्धमान ने अपने बड़े भाई से आज्ञा ली, कि वे घर को छोड़कर कहीं और जाना चाहते है। उनके भाई ने बहुत मनाया लेकिन वह नहीं माने, बाद उन्होंने घर त्याग दिया, और वन में जाकर तप और ध्यान करना शुरू कर दिया, जब वन जा रहे थे। तब अपने मुंह से नमो सिद्धाणं बोलकर एक भगवा कपडे के साथ चले गए। Mahavir Swami History in Hindi

 

तपस्या और सर्वज्ञता (Tapasya of Mahavir Swami) :

महावीर स्वामी ने अपने जीवन के 12 साल तप किया। इस दौरान उन्होंने शांति प्राप्त की, अपने गुस्से पर काबू करना सिखा, हर प्राणी के साथ उन्होंने अहिंसा की नीति अपनाई, जिसके बाद वह कई जगह जैन धर्मं का प्रचार करने गए। वे हर जगह की सभ्यता और अच्छी चीज़ों को अपने अन्दर समाते गए। वे उस समय केवल दिन में 3 घंटे ही सोते थे।

12 साल तपस्या करने के दौरान वे बिहार, बंगाल, उड़ीसा और उत्तरप्रदेश भी गए। वहाँ पर उन्होंने जैन धर्म का प्रचार किया। महावीर जिस वन में थे, वहाँ रहकर उन्होंने अपने ज्ञान को लोगों तक पहुँचाया, वन में 11 ब्राह्मणों को बुलाया गया ताकि वे महावीर के कहे शब्दों को लिखित रूप दे सके, यही आगे चलकर त्रिपादी ज्ञान, उपनिव, विगामिवा और धुवेइव कहलाये।

महावीर के शिष्य अपने मित्र और सगे सम्बन्धी को महावीर की शरण में लाये। महावीर उन्हें सुखद जीवन जीने और मोक्ष प्राप्ति का ज्ञान देने लगे, लोगों की संख्या बढ़कर लाखों तक पहुँच गयी। उनकी संस्था में 14 हजार मुनि, 36 हजार आर्यिका, 1 लाख 59 हजार श्रावक और 3 लाख 18 हजार श्राविका थी। ये 4 समूह अपने आप में ही एक तीर्थ थे।

 

महावीर स्वामी के पंचशील सिद्धांत (Mahavir Swami Panchsheel Theory) :

( 1 ) सत्य – महावीर जी कहते हैं, कि सत्य सबसे बलवान है, और हर इंसान को किसी भी परिस्थिति में सत्य का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। सदा सत्य बोलो।

( 2 ) अहिंसा – दूसरों के प्रति हिंसा की भावना नहीं रखनी चाहिए। जितना प्रेम हम खुद से करते हैं, उतना ही प्रेम दूसरों से भी करें। अहिंसा का पालन करें।

( 3 ) अस्तेय – महावीर स्वामी कहते हैं, कि दूसरों की चीज़ों को चुराना और दूसरों की चीज़ों की इच्छा करना महापाप है। जो मिला है, उसमें संतुष्ट रहें।

( 4 ) बृह्मचर्य – महावीर जी कहते हैं, कि बृह्मचर्य सबसे कठोर तपस्या है, और जो पुरुष इसका पालन करते हैं, वो मोक्ष की प्राप्ति करते हैं।

( 5 ) अपरिग्रह – ये दुनियां नश्वर है। चीज़ों के प्रति मोह ही आपके दुखों का कारण है। सच्चे इंसान किसी भी सांसारिक चीज़ का मोह नहीं करते।

 

महावीर स्वामी जयंती (Mahavir Swami Jayanti) :

पूरे भारत वर्ष मे बड़ी उत्साह के साथ महावीर जयंती भगवान महावीर के जन्म उत्सव के रूप मे मनाई जाती है। जैन समाज द्वारा मनाए जाने वाले इस त्योहार को महावीर जयंती के साथ-साथ महावीर जन्म कल्याणक नाम से भी जानते है। महावीर जयंती हर वर्ष चैत्र माह के 13 वे दिन मनाई जाती है। महावीर जयंती के अवसर पर जैन धर्मावलंबी प्रात: काल प्रभातफेरी निकालते हैं। उसके बाद भव्य जुलूस के साथ पालकी यात्रा निकालने के बाद स्वर्ण और रजत कलशों से महावीर स्वामी का अभिषेक किया जाता है तथा शिखरों पर ध्वजा चढ़ाई जाती है।

 

भगवान महावीर प्रमुख ग्यारह गणधर (Mahavir Swami Gandhar List) :

  • श्री इंद्र्भूती जी
  • श्री अग्निभूति जी
  • श्री वायुभूति जी
  • श्री व्यक्त स्वामीजी
  • श्री सुधर्मा स्वामीजी
  • श्री मंडितपुत्रजी
  • श्री मौर्यपुत्र जी
  • श्री अकम्पित जी
  • श्री अचलभ्राता जी
  • श्री मोतार्यजी
  • श्री प्रभासजी

 

मृत्यु (Mahavir Swami Death) :

भगवान महावीर ने आखिरी प्रवचन पावापूरी में दिया था। वो समागम लगातार 48 घंटे चला था। अपने आखिरी प्रवचन को ख़त्म करने के बाद 527 ईसा पूर्व उन्हें मौक्ष की प्राप्ति हुई।

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