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सम्राट अशोक का इतिहास | Samrat Ashoka History in Hindi

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Samrat Ashoka Biography In Hindi
Samrat Ashoka
पूरा नाम अशोक बिंदुसार मौर्य
जन्म 304 बी सी
जन्मस्थान  पाटलीपुत्र
पिता       राजा बिंदुसार
माता सुभद्रांगी
पत्नी महारानी देवी
पुत्र महिंदा
नागरिकता/राष्ट्रीयता भारतीय

 

महान शासक सम्राट अशोक (Samrat Ashoka History in Hindi) :

सम्राट अशोक Samrat Ashoka भारतीय इतिहास के एक ऐसे महान शासक थे। जिसकी तुलना विश्व में किसी से नहीं की जा सकती वो अपने राजवंश मौर्य साम्राज्य का तीसरा शासक माना जाता था। जिसने लगभग भारत के सभी महाद्वीपों पर राज किया। विश्व के कई देशों में भगवान बुद्ध के विचारों को लोगों तक पहुँचाने और बौद्ध धर्म का जोर शोर से प्रचार करने के कारण उसका नाम पुरे विश्व भर में प्रसिद्द है। सम्राट अशोक को एक सफल और कुशल सम्राट बनाने मे आचार्य चाणक्य का बहुत बड़ा हाथ है।

 

प्रारंभिक जीवन (Samrat Ashoka Early Life) :

सम्राट अशोक का जन्म 304 ईसा पूर्व पटना के पाटलीपुत्र मे हुआ था। उनके पिता का नाम बिंदुसार था, उनकी 16 पत्नियों 101 पुत्रों थे, अशोक माता सुभाद्रंगी के पुत्र थे। उनका एक छोटा भाई जिसका नाम विट्ठोका था, लेकिन कई बड़े सौतेले भाई भी थे। Samrat Ashoka History in Hindi

सम्राट अशोक  बचपन से ही शिकार के शौकीन थे तथा खेलते खेलते वे इसमे निपूर्ण भी हो गए थे। कुछ बड़े होने पर वे अपने पिता के साथ साम्राज्य के कार्यो मे हाथ बटाने लगे थे तथा वे जब भी कोई कार्य करते अपनी प्रजा का पूरा ध्यान रखते थे, इसी कारण उनकी प्रजा उन्हे पसंद करने लगी थी।

सम्राट अशोक के पिता ने अपने सभी पुत्रों को बेहतरीन शिक्षा देने की व्यवस्था की, लेकिन उन सबमें सबसे श्रेष्ठ और बुद्धिमान अशोक था। उनकी प्रशासनिक शिक्षा के लिये बिंदुसार ने अशोक को उज्जैन का सुबेदार नियुक्त किया था। अपने बचपन के दिनों से ही अशोक ने हथियार कौशल के साथ-साथ शिक्षाविदों के क्षेत्र में भी बहुत बड़ा नाम किया था। Samrat Ashoka Education

 

सम्राट अशोक का शासनकाल सम्राज्य (Samrat Ashoka Reign Empire) :

अशोक के बडे़ भाई सुशीम अवन्ती की राजधानी उज्जैन के प्रांतपाल थे। उसी दौरान अवन्ती में हो रहे विद्रोह में भारतीय और यूनानी मूल के लोगों के बीच दंगा भड़क उठा, जिसको देखते हुए राजा बिन्दुसार ने अपने पुत्र अशोक को इस विद्रोह को दबाने के लिए भेजा, जिसके बाद अशोक ने अपनी कुशल रणनीति अपनाते हुए इस विद्रोह को शांत किया।

जिससे प्रभावित होकर राजा बिन्दुसार ने सम्राट अशोक को मौर्य वंश का शासक नियुक्त कर दिया गया। अवन्ती में हो रहे विद्रोह को दबाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बाद सम्राट अशोक को अवंती प्रांत के वायसराय के रुप में भी नियुक्त किया गया था। और उनके सौतेले भाईयों के बीच घमासान युद्ध हुआ। वहीं इस दौरान उनकी छवि एक कुशल राजनीतिज्ञ योद्धा के रुप में भी बन गई। 

उन्होने सर्व प्रथम उज्जैन का शासन संभाला, उज्जैन ज्ञान और कला का केंद्र था तथा अवन्ती की राजधानी। जब उन्होने अवन्ती का शासन संभाला तो वे एक कुशल रजनीतिज्ञ के रूप मे उभरे। उन्होने उसी समय विदिशा की राजकुमारी शाक्य कुमारी से विवाह किया। शाक्य कुमारी देखने मे अत्यंत ही सुंदर थी। उनके विवाह के पश्चात उनको पुत्र महेंद्र तथा पुत्री संघमित्रा का जन्म हुआ।

अशोक ने दक्षिण के मैसूर, कर्नाटक और कृष्ण गोदावरी की घाटी में भी कब्जा किया। उनके सम्राज्य की राजधानी पाटलिपुत्र (मगध, आज का बिहार) और साथ ही उपराजधानी तक्षशिला और उज्जैन भी थी। इस तरह सम्राट अशोक का शासन धीरे-धीरे बढ़ता ही चला गया। और उनका सम्राज्य उस समय तक का सबसे बड़ा भारतीय सम्राज्य बना, हालांकि तमिलनाडू, श्रीलंका और केरल सम्राज्य का विस्तार में नाकामयाब हुए।

 

सम्राट अशोक और कलिंग युद्ध (Samrat Ashoka War with Kalinga) :

सम्राट अशोक ने अपने मौर्य सम्राज्य का विस्तार करने के लिए कलिंग (ओडिशा) राज्य पर आक्रमण कर दिया। और इसके खिलाफ एक विध्वंशकारी युद्ध की घोषणा की, इस युद्ध में करीब 1 लाख लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई, मरने वालों में सबसे ज्यादा संख्या सैनिकों की थी। इसके साथ ही इस युद्ध में करीब डेढ़ लाख लोग बुरी तरह घायल हो गए। इस तरह सम्राट अशोक कलिंग पर अपना कब्जा जमाने वाले मौर्य वंश के सबसे पहले शासक तो बन गए, लेकिन इस युध्द में हुए भारी रक्तपात ने उन्हें हिलाकर रख दिया।

 

बौद्ध धर्म का प्रचार (Samrat Ashoka Prompt As a Buddhism) :

सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म अपनाने के बाद एक महान शासक योद्धा के रुप में सामने आए। इसके बाद उन्होंने अपने मौर्य सम्राज्य के सभी लोगों को अहिंसा का मार्ग अपनाने और भलाई कामों को करने की सलाह दी, और उन्होंने खुद भी कई लोकहित के काम किए। साथ ही उन्हें शिकार और पशु हत्या करना पूरी तरह छोड़ दिया। Samrat Ashoka History in Hindi

ब्राह्मणों को खुलकर दान किया और कई गरीब असहाय की सेवा की। इसके साथ ही जरूरतमंदों के इलाज के लिए अस्पताल खोला और सड़कों का निर्माण करवाया यही नहीं सम्राट अशोक ने शिक्षा के प्रचार को लेकर 20 हजार से भी ज्यादा विश्वविद्यालयों की नींव रखी। सम्राट अशोक ने सबसे पहले पूरे एशिया में बौध्द धर्म का जोरो-शोरों से प्रचार किया।

इसके लिए उन्होंने कई धर्म ग्रंथों का सहारा लिया। इस दौरान सम्राट अशोक ने दक्षिण एशिया में भगवान बुद्ध के अवशेषों को सुरक्षित रखने के लिए करीब 84 हजार स्तूपों का निर्माण भी कराया। बौध्द धर्म के प्रचार के लिए, अपने पुत्र महेन्द्र और पुत्री संघमित्रा तक को भिक्षु-भिक्षुणी के रूप में अशोक ने भारत के बाहर, नेपाल, अफगानिस्तान, मिस्त्र, सीरिया, यूनान, श्रीलंका आदि में भेजा।

बौद्ध धर्म के प्रचारक के रुप में सबसे ज्यादा सफलता उनके बेटे महेन्द्र को मिली, उसने श्री लंका के राजा तिस्स को बौद्ध धर्म के उपदेशों के बारे में बताया, जिससे प्रभावित होकर उन्होंने बौद्ध धर्म को अपना राजधर्म बना दिया। 

 

सम्राट अशोक की उपलब्धियाँ (Samrat Ashoka Achievements) :

  • सम्राट अशोक नें दक्षिण एशिया और मध्य एशिया में भगवान बुद्ध के अवशेषों को संग्रह  रखने के लिए कुल 84000 स्तूप बनवाएं।
  • “अशोक चक्र” जिसको धर्म का चक्र भी कहा जाता था, जो भारतीय गणराज्य के तिरंगे के बीच में दिखाई देता है।
  • मौर्य साम्राज्य के सभी बॉर्डर में 40-50 फीट ऊँचा अशोक स्तम्भ स्थापित किया गया है।
  • सम्राट अशोक नें चार आगे पीछे एक साथ खड़े सिंह की मूर्तिभी बनवाई थी। और इस मूर्ति को भारत के सारनाथ मुसियम में रखा गया है।

मृत्यु (Samrat Ashoka Death) :

सम्राट अशोक की मृत्यु करीबन 232 ईसा पूर्व के आसपास हुई। कहा जाता है अशोक की मृत्यु के बाद भी मोर्या वंश का साम्राज्य लगभग 50 वर्षो तक चला।

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