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संत कबीर दास का इतिहास | Sant Kabir Das History in Hindi

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Sant Kabir Das Biography In Hindi
Sant Kabir Das
पूरा नाम  संत कबीरदास
जन्म    1398
जन्मस्थान लहरतारा ताल, काशी
पत्नी लोई
पिता नीरू जुलाहे
माता नीमा
पुत्र कमाल
पुत्री कमाली
शिक्षा निरक्षर
कार्यक्षेत्र  कवि, संत, समाज सुधारक
गुरु  गुरु रामानंद जी
नागरिकता/राष्ट्रीयता भारतीय

 

संत कबीर दास (Sant Kabir Das History in Hindi) :

संत कबीर दास भारत के महान आध्यात्मिक कवि और समाज सुधारक थे। कबीर दास के नाम का अर्थ महानता से है, वे भारत के महानतम कवियों में से एक थे। जब भी भारत में धर्म, भाषा, संस्कृति की चर्चा होती है। तो कबीर दास जी का नाम का जिक्र सबसे पहले होता है, क्योंकि कबीर दास जी ने अपने दोहों के माध्यम से भारतीय संस्कृति को दर्शाया है। Sant Kabir Das

 

प्रारंभिक जीवन (Sant Kabir Das Early Life) :

कबीर के जन्म सम्बंधित अनेक कथाये प्रचलित हैं, एक कथा के अनुसार संत कबीर दास का जन्म 1440 ईसवी को गरीब विधवा ब्राह्मणी के यहाँ हुआ था। जिसे ऋषि रामानंद जी ने भूलवश पुत्रवती होने का आशीर्वाद दे दिया था। विधवा ब्राह्मणी ने संसार की लोक-लाज के कारण नवजात शिशु को लहरतारा ताल के पास छोड़ दिया था। शायद इसी कारण शायद कबीर सांसारिक परम्पराओं को कोसते नजर आते थे। कहा जाता है कि गुरु नानक और सिकंदर लोदी भी उनके समकालीन थे।

एक कथा के अनुसार कबीर का पालन-पोषण नीरू और नीमा के यहाँ मुस्लिम परिवार में हुआ, नीरू को यह बच्चा लहरतारा ताल के पास मिला था। कबीर के माता-पिता कौन थे, इसके बारे में एक निश्चित राय नहीं हैं। कबीर नीरू और नीमा की वास्तविक संतान थी, या उन्होंने सिर्फ उनका लालन-पोषण किया इसके बारे में इतिहासकारों के अपने-अपने मत है।

 

शिक्षा (Sant Kabir Das Education) :

कबीर की शिक्षा के बारे में यहाँ कहा जाता हैं कि, कबीर को पढने-लिखने की रूचि नहीं थी। बचपन में उन्हें खेलों में किसी भी प्रकार शौक नहीं था। गरीब माता-पिता होने से मदरसे में पढ़ने लायक स्थिति नहीं थी, दिन भर भोजन की व्यवस्था करने के लिए कबीर को दर-दर भटकना पड़ता था। इसी कारण कबीर कभी किताबी शिक्षा नहीं ले सके।

 

निजी जीवन (Sant Kabir Das Married Life) :

संत कबीरदास का विवाह लोई नाम की कन्या से हुआ था। विवाह के बाद कबीर और लोई
को दो संतानें हुई, जिसमें एक लड़का कमाल और दूसरी लड़की कमाली था। कबीर की धार्मिक प्रवृति होने के कारण उनके घर साधु-संत और सत्संग करने वालों की हर दिन आवाजाही बनी रहती थी। अत्यधिक गरीबी और ऊपर से निरंतर मेहमानों की आवाजाही के कारण अक्सर कबीर की पत्नी कबीर से झगड़ा करती थी। पर कबीर अपनी पत्नी को समझाते थे।

 

साहित्यिक जीवन (Sant Kabir Das Literary Life) :

संत कबीर दास को अक्षर ज्ञान भी नहीं था। फिर भी उनकी कविता का भाव इतना सशक्त बन पड़ा जिसके दृष्टिगत भाषा अथवा शैली का दोष अपदार्थ हो जाता है। यद्यपि कबीर जी पर कई विचारधाराओं का प्रभाव पड़ा तो, भी कबीर जी का अपना मौलिक दर्शन है। परिणाम स्वरूप रवीन्द्रनाथ टैगोर की प्रतिष्ठित रचना गीतांजलि पर कबीर की रचना बीजक की गहरी छाप मिलती है। Sant Kabir Das History in Hindi

संत कबीर स्वयं ग्रंथ नहीं लिखे, मुँह से भाखे और उनके शिष्यों ने उसे लिख लिया। उनके समस्त विचारों में रामनाम की महिमा प्रतिध्वनित होती है। वे एक ही ईश्वर को मानते थे। उन्होने हिन्दू-मुस्लीम दोनों जातियों को एक सुत्र में बांधने का प्रयास किया, और धर्म के झूठे आडंबर-पूर्ण कर्मकांडों पर जमकर प्रहार किये।

अवतार, मूर्त्ति, रोज़ा, ईद, मसजिद, मंदिर आदि को वे नहीं मानते थे। वे निर्गुण ब्रह्म के उपासक थे, और जाति-व्यवस्था के घोर विरोधी। उन्होंने भारतीय समाज को दकियानसी और तंगदिली से बाहर निकालकर एक नयी राह पर डालने का प्रयास किया। भारतीयों की रूढ़िवादित और आडंबरों पर करारी चोट करने वाले महात्मा कबीर की वाणी आज भी घर-घर में गूँजती है। वे भक्ति-काल के प्रखर साहित्यकार थे। Sant Kabir Das History in Hindi

 

संत कबीर दास का समाज कार्य (Sant Kabir Das Social work) :

कबीर मूलत भक्त और संत थे, भक्ति साधना में वे सहज और सत्याचरण के हिमायती थे। समाज सुधार के मार्ग में आने वाली विकृतियों के विरुद्ध उन्होंने बिना लाग लपेट के अपना स्वर व्यक्त किया जो आज भी जरुरी है। कबीर जन्म से विद्रोही थे, उन्होंने धर्म, साधना के ही सामजिक संरचना में मानवीय आचरण में समस्त आडम्बरों, निरर्थक कर्मकाण्डों का विरोध किया ।

कबीर के रूप में हमें एक ऐसा प्रकाश स्तम्भ मिला है, जो मानव समाज की एकता, परस्पर प्रेम और सहज सामाजिक जीवन, जिसमें धर्म, वर्ण और जाति का कोई भेद न हो , ऐसे समाज की संरचना में और सबसे ऊपर व्यक्ति को मानवीय गुणों से सम्पृक्त करने में सदियों से प्रकाश देता रहा है और भविष्य में भी देता रहेगा। Sant Kabir Das History in Hindi

 

संत कबीर दास की प्रसिद्ध रचनाएं (Sant Kabir Das Compositions) :

  • रमैनी
  • साखी
  • सबद
  • अगाध मंगल
  • अठपहरा
  • अनुराग सागर
  • अर्जनाम कबीर
  • अलिफ़ नामा
  • अक्षर खंड की रमैनी
  • अक्षर भेद की रमैनी
  • आरती कबीर कृत
  • उग्र गीता
  • निर्भय ज्ञान
  • राम सार

 

मृत्यु (Sant Kabir Das Death) :

कहा जाता है की 1518 ई में जनवरी के महीने में मगहर में संत कबीर की मृत्यु हुई, और मृत्यु के स्थान पर उनकी समाधी बनाई गयी हैं।

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