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रंगों का शानदार उत्सव होली की कहानी | Story of Colors Festival Holi

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Festival Holi

 

रंगों का उत्सव होली की कहानी (Story of Colors Festival Holi)

रंगो का यह होली त्यौहार भारत के सभी लोगो के लिये पारंपरिक और धार्मिक त्यौहार है, इस त्यौहार हम सब बहोत प्रसन्नता से एकसाथ मनाते है। इस होली एक ऐसा त्यौहार हे की सब धर्म के लोग पुरे जोश और मस्ती में एकजुट होकर मनाते हैं। रंगों से भरा यह त्यौहार सभी संप्रदाय, धर्म और सभी जातियों को एकजुट होकर भाईचारे का संकेत देता है। होली के दिन सभी लोग अपने पुराना मतभेद भूल के सब एक-दूसरे को गले लगाते हैं और एक-दूसरे पर रंग और गुलाल लगाते हैं।

( 1 ) कौन मानते हैं : यह त्यौहार होली रंगों का एक भव्य पर्व है जो भारत देश में हिन्दु धर्म और अन्य धर्मो के लोगो भी हरेक वर्ष बहोत धूमधाम पूर्वक मनाते है।

( 2 ) किस दिन मनाया जाता है : रंगो के त्यौहार के अगले दिन होलीका दहन भी हरेक साल बसंत के मौसम के समय फाल्गुन माह के अंतिन दिन में आता है, इस त्यौहार भी दिवाली त्यौहार के जैसे बहोत प्रसन्नता देने वाला पर्व है।

( 3 ) प्राकृतिक वातावरण : होलीका के दहन के बाद के दिन हरेक साल हिन्दू के कैलेंडर विक्रम सवंत के माह चैत्र के प्रथम दिन पर ही रंगो का त्यौहार मनाया जाता है, जिसे धुलेटी भी कहा जाता है। इस दिन पूरा प्राकृतिक वातावरण बहोत रंगीन और सुंदर देखने को मिलता है।

( 4 ) होली मनाने का वास्तविक कारण : इस त्यौहार में एक ऐसा सौभाग्य और खुशी मिलती है की सभी लोगो के जीवन में वास्तव में रंग और आनंद भर आता है। इस त्यौहार में रंगों के माध्यम से सभी लोगो और धर्मो के मध्य की कड़वाहट दूर हो जाती है।

 

होलिका की लोकप्रिय कहानी (Mythological Story for Holika) :

होलिका के त्यौहार को मनाने के पीछे भगवान विष्णु के परम भकत प्रहलाद और उनकी बुआ होलिका से संबंध में एक ऐतिहासिक कथा है। इस पर्व मनाने के पीछे भक्त प्रहलाद की प्रमुख भूमिका है। पहले के समय में एक हिरण्यकश्यप नाम का एक असुर राजा थे। हिरण्यकश्यप भक्त प्रहलाद के पिता और होलिका के भाई थे। Story of Colors Festival Holi in Hindi

हिरण्यकश्यप को यह वरदान प्राप्त था की कोई मनुष्य, या जानवर के हाथो वह मर नहीं सकता, नाही दिवस में और नाही रात में, नाही घर के अंदर या फिर बहार, और नाही किसी शस्त्र से और नाही किसी अस्त्र से। भगवान से मिला इस अद्वितीय वरदान के चलते राजा हिरण्यकश्यप बहोत अभिमानी हो गया था। वह खुद को भगवान मानने लगा था और अपने पुत्र सहित सभी को भगवान की बजाए खुद की पूजा करने का आदेश देता था।

चारे दिशाओ में उसका खौफ था, और इसी के चलते लोग डर कर उनकी पूजा भी करते थे लेकिन भकत प्रहलाद तो भगवान विष्णु का भक्त था इसीलिए उन्होंने उनके पिता का आदेश कभी नहीं माना। अपने पुत्र का यह बर्ताव देखने के बाद राजा हिरण्यकश्यप उनसे धृणा करते थे और उनको मारने का भी कई प्रयास किये।

होलिका को यह वरदान था की अग्नि में वह जल नहीं सकती। इसीलिए एक दिन हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका के साथ मिलकर प्रहलाद को मारने की योजना बनायी। इस योजना के चलते होलिका ने प्रहलाद को अपनी आँचल में बिठाकर लकडे के पर बैठ के अग्नि लगवाई। लेकिन अग्नि से नहीं जलने का वरदान होते हुए भी होलिका में अग्नि भस्म हो गई और भक्त प्रहलाद को अग्नि ने छुआ तक नहीं।

इस घटना के चलते हिन्दु धर्म के लोगों ने होली त्यौहार की शुरुआत की थी। इससे हमें सिख मिलती है की सभी अच्छाई पर बुराई की हार ही होती है। रंगो के पर्व होली के अगले दिन लोग घास, गोबर और लकड़ी के ढेर बनाते है और रात में उसे जलाके होलिका को दहन की पौराणिक कथा को याद करते है और सब लोग एक-जुट होकर खुखिया मनाते है।

होली त्यौहार के पीछे ऐसी मान्यता है की अपने घर सभी परिवार के सभ्य द्वारा सॉस के तेल का शरीर पर मालिश करने से बदन और घर की गंदगी मीट जाती है, और घर में खुशियाँ की प्राप्ति होती है। होलिका दहन के बाद के दिन सभी इस त्यौहार पर सभी लोगो अपने परिवार और दोस्तों को मिलते है, और गुलाल और रंगो लगाकर होली मानते है। और कई सारी अन्य कार्यो करके एक-दूसरे खुशियों मनाते है।

इस त्यौहार पर सभी लोगो नए नए पकवानो बनाते है और गीत-संगीत के साथ रंगों में विलीन होकर उत्सव मनाते है। इस त्यौहार के दिवस सभी सरकारी कार्यालय, स्कूलों और अन्य संस्थाओ में जाहेर रजा रखते है क्यूकी सब लोगो इस आनंदभरे उत्सव को परिवार के साथ मना सके। Story of Colors Festival Holi

होली के इस त्यौहार पर सभी धर्मो के लोग सामाजिक पक्षपात भुलाके एकसाथ रंगों की वर्षा करते है, और छोटे बच्चो पिचकारियों और बेलून में रंग भर के अन्य दूसरों पर डालते है। इसके साथ एक-दूसरे को मिठाईयाँ और पकवान खिलाकर खुशीया मनाते है। इस प्रकार लोगो रंगो लगाकर अपनी खुशबू भरी जिंदगी को ज्यादा रंगीन कर देते है अपनों के साथ ढेर सारी खुशिया मनाते है।

 

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